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कैथल की राजनीति में होगा जींद उप-चुनाव का असर
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कैथल की राजनीति में होगा जींद उप-चुनाव का असर
अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए अब सुरजेवाला को कैथल में लगाना पड़ेगा ज्यादा जोर
भाजपा नेताओं ने की कैथल से विधायक रणदीप सुरजेवाला की जींद में हुई हार में अपनी जीत की तलाश शुरू
इनेलो की दो फाड़ से भी बदल जाएंगे चुनावी बिसात के मोहरे
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जींद उप-चुनाव के परिणाम का कैथल की राजनीति पर बड़ा असर हो सकता है। कैथल से विधायक एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला को जींद में हुई हार के बाद कैथल विधानसभा में अपनी पिछले चुनाव की 23 हजार से अधिक वोटों की बढ़त बनाए रखने के लिए जहां ज्यादा जोर लगाना पड़ेगा। वहीं जींद में हुई उनकी हार में भाजपा नेताओं ने कैथल विधानसभा में अपनी जीत तलाशनी शुरू कर दी है। कैथल से इनेलो भी मजबूत रही है। लेकिन वर्तमान में इनेलो के दो फाड़ होने के बाद यहां चुनावी बिसात में मोहरे बदलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में रणदीप सुरजेवाला कैथल विधानसभा क्षेत्र से 23000 से अधिक मतों के भारी अंतर से विजयी हुए थे। इससे पूर्व वे वर्ष 2009 में 21000 से अधिक मतों के अंतर से विजयी हुए थे। जबकि इससे पूर्व 2005 में उनके पिता शमशेर सिंह सुरजेवाला 4400 मतों से विजयी हुए थे। सुरजेवाला मजबूत नेता के तौर पर पहचान रखते हैं और भाजपा व अन्य पार्टियां अभी तक उनके मुकाबले किसी दिग्गज नेता की तलाश में है। इन सबके बावजूद सुरजेवाला ने जींद में पार्टी के आदेशानुसार चुनाव लड़ा। वह अलग बात है कि उन्हें तीसरे स्थान के साथ हार से संतोष करना पड़ा।
भाजपा के प्रत्याशी राव सुरेंद्र सिंह पिछले विधानसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे। हालांकि अभी तक राव सुरेंद्र सिंह को ही भाजपा ने ग्रांट वितरित करने व विकास कार्यों की निगरानी का जिम्मा दे रखा है। लेकिन पूर्व विधायक भाई लीलाराम, जिला अध्यक्ष अशोक गुर्जर, सुरेश गर्ग, राजपाल तंवर, अरुण सर्राफ संजय भारद्वाज सहित कई नेता ऐसे हैं, जो अब टिकट के लिए ज्यादा जोर लगाने की जुगत भिड़ाएंगे। जिस तरह से जींद उप-चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत हुई है। उससे कई भाजपा नेताओं को अब कुर्सी नजदीक नजर आने लगी है।
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दूसरी ओर इनेलो के प्रत्याशी कैलाश भगत पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर थे। लेकिन आज इनेलो दो फाड़ हो चुकी है और जींद उप-चुनाव में इनेलो का हश्र काफी बुरा रहा। इनेलो उम्मीदवार की न केवल जमानत जब्त हुई, बल्कि पार्टी पांचवें नंबर पर रही। इनेलो से अलग होकर बनी नई पार्टी जेजेपी व नई स्थापित पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा मंच से भी काफी पीछे रहकर पांचवें स्थान पर संतोष करना पड़ा। इस परिणाम के बाद इनेलो को जहां कैथल में अब पिछले विधानसभा चुनाव जैसा मजबूत प्रदर्शन करना मुश्किल होगा, वहीं जेजेपी को भी कैथल की चुनावी बिसात में नया मोहरा तलाशना होगा। कुल मिलाकर इस बार कैथल विधानसभा चुनाव की बिसात में कई नए मोहरे नजर आएंगे।
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अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए अब सुरजेवाला को कैथल में लगाना पड़ेगा ज्यादा जोर
भाजपा नेताओं ने की कैथल से विधायक रणदीप सुरजेवाला की जींद में हुई हार में अपनी जीत की तलाश शुरू
इनेलो की दो फाड़ से भी बदल जाएंगे चुनावी बिसात के मोहरे
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जींद उप-चुनाव के परिणाम का कैथल की राजनीति पर बड़ा असर हो सकता है। कैथल से विधायक एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला को जींद में हुई हार के बाद कैथल विधानसभा में अपनी पिछले चुनाव की 23 हजार से अधिक वोटों की बढ़त बनाए रखने के लिए जहां ज्यादा जोर लगाना पड़ेगा। वहीं जींद में हुई उनकी हार में भाजपा नेताओं ने कैथल विधानसभा में अपनी जीत तलाशनी शुरू कर दी है। कैथल से इनेलो भी मजबूत रही है। लेकिन वर्तमान में इनेलो के दो फाड़ होने के बाद यहां चुनावी बिसात में मोहरे बदलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में रणदीप सुरजेवाला कैथल विधानसभा क्षेत्र से 23000 से अधिक मतों के भारी अंतर से विजयी हुए थे। इससे पूर्व वे वर्ष 2009 में 21000 से अधिक मतों के अंतर से विजयी हुए थे। जबकि इससे पूर्व 2005 में उनके पिता शमशेर सिंह सुरजेवाला 4400 मतों से विजयी हुए थे। सुरजेवाला मजबूत नेता के तौर पर पहचान रखते हैं और भाजपा व अन्य पार्टियां अभी तक उनके मुकाबले किसी दिग्गज नेता की तलाश में है। इन सबके बावजूद सुरजेवाला ने जींद में पार्टी के आदेशानुसार चुनाव लड़ा। वह अलग बात है कि उन्हें तीसरे स्थान के साथ हार से संतोष करना पड़ा।
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भाजपा के प्रत्याशी राव सुरेंद्र सिंह पिछले विधानसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे। हालांकि अभी तक राव सुरेंद्र सिंह को ही भाजपा ने ग्रांट वितरित करने व विकास कार्यों की निगरानी का जिम्मा दे रखा है। लेकिन पूर्व विधायक भाई लीलाराम, जिला अध्यक्ष अशोक गुर्जर, सुरेश गर्ग, राजपाल तंवर, अरुण सर्राफ संजय भारद्वाज सहित कई नेता ऐसे हैं, जो अब टिकट के लिए ज्यादा जोर लगाने की जुगत भिड़ाएंगे। जिस तरह से जींद उप-चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत हुई है। उससे कई भाजपा नेताओं को अब कुर्सी नजदीक नजर आने लगी है।
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दूसरी ओर इनेलो के प्रत्याशी कैलाश भगत पिछले विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर थे। लेकिन आज इनेलो दो फाड़ हो चुकी है और जींद उप-चुनाव में इनेलो का हश्र काफी बुरा रहा। इनेलो उम्मीदवार की न केवल जमानत जब्त हुई, बल्कि पार्टी पांचवें नंबर पर रही। इनेलो से अलग होकर बनी नई पार्टी जेजेपी व नई स्थापित पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा मंच से भी काफी पीछे रहकर पांचवें स्थान पर संतोष करना पड़ा। इस परिणाम के बाद इनेलो को जहां कैथल में अब पिछले विधानसभा चुनाव जैसा मजबूत प्रदर्शन करना मुश्किल होगा, वहीं जेजेपी को भी कैथल की चुनावी बिसात में नया मोहरा तलाशना होगा। कुल मिलाकर इस बार कैथल विधानसभा चुनाव की बिसात में कई नए मोहरे नजर आएंगे।