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सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली दोहरी नीति के चलते कैसे कामयाब होगा बागवानी मिशन
Updated Sun, 12 Aug 2018 12:17 AM IST
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कैथल को बागवानी मिशन से जोड़ने की उठी मांग
पॉली हाउस में संरक्षित खेती करने वाले किसानों ने की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। सरकार की दोहरी नीतियों को लेकर पॉली हाउस में संरक्षित खेती करने वाले जिला के किसानों की एक साझा बैठक गांव जुलानी खेड़ा में हुई। इसमेें सर्वसम्मति से मांग की गई कि जिला कैथल को भी राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना में जोड़ा जाए ताकि उनको भी अन्य जिलों की तरह से मिलने वाले अनुदान का लाभ हो सके।
बैठक में शामिल संरक्षित खेती करने वाले किसान श्री कुमार, सुधीर कुमार, बलवंत सिंह, दलबीर सिंह, जितेंद्र सिंह, राजा राम्र शादी लाल आदि का कहना था कि विभागीय सर्वे इस बात की पुष्टि करते हैं कि जिला कैथल में नेट हाउस खेती पूरी तरह से सफल है। प्रतिशत के आधार पर जिला कैथल में नेट हाउस खेती 93 प्रतिशत है जबकि अन्य जिलों में केवल 59 प्रतिशत सफल है। सुधीर कुमार ने बताया कि प्रदेश के 22 जिलों में से 19 जिलों के किसान राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना का लाभ ले रहे हैं, जबकि कैथल, रेवाड़ी व फरीदाबाद जिलों को इसका लाभ नहीं दिया गया। इन तीन जिलों में आईएचडी नामक योजना में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि 4 हजार वर्ग मीटर में बनाए जाने वाले पाली हाउस के निर्माण की लागत कैथल, रेवाड़ी व फरीदाबाद में 504 रुपये वर्ग मीटर रखी गई है जबकि शेष जिलों में लागत का आधार 590 से 650 रुपये वर्ग मीटर रखा गया। किसान को लागत के आधार पर ही 65 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। जिला कैथल के किसान को 4 हजार वर्ग गज के पाली हाउस के निर्माण पर 13 लाख का अनुदान मिलता है जबकि अन्य जिलों के किसान को उतनी ही भूमि पर किए जाने वाले निर्माण पर लगभग 18 लाख का अनुदान मिलता है।
कैथल में हैं 60 नेट हाउस : जितेंद्र सिंह ने बताया कि जिला कैथल के विभिन्न गांवों में लगभग 60 नेट हाउस संरक्षित खेती कर रहे हैं। सभी पाली हाउस में किसान बेमौसमी सब्जियां खीरा व शिमला मिर्च की पैदावार ले रहे हैं।
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विधान सभा में उठाया जाएगा मुद्दा : बैठक में शामिल सभी सदस्यों ने बताया कि योजना की अनियमितताओं को लेकर जिला के किसान कृषि आयुक्त, डीजी बागवानी, कृषि मंत्री से मिल चुके हैं पर कोई सुनवाई नहीं हो पाई। विधायक जयप्रकाश ने कहा कि वे इस मामले को विधान सभा सत्र में उठाएंगे।
क्या है संरक्षित खेती : सरकार द्वारा पॉली हाउस में संरक्षित खेती करने के लिए उन्हें प्रेरित किया जा रहा है। सरकार किसानों को संरक्षित खेती के लिए भी प्रेरित कर रही है ताकि घटती जोत में अधिक आय हो सके। हरियाणा सरकार द्वारा किसानों को पॉली हाउस लगाने के लिए 65 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
पॉली हाउस में संरक्षित खेती करने वाले किसानों ने की बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
कलायत। सरकार की दोहरी नीतियों को लेकर पॉली हाउस में संरक्षित खेती करने वाले जिला के किसानों की एक साझा बैठक गांव जुलानी खेड़ा में हुई। इसमेें सर्वसम्मति से मांग की गई कि जिला कैथल को भी राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना में जोड़ा जाए ताकि उनको भी अन्य जिलों की तरह से मिलने वाले अनुदान का लाभ हो सके।
बैठक में शामिल संरक्षित खेती करने वाले किसान श्री कुमार, सुधीर कुमार, बलवंत सिंह, दलबीर सिंह, जितेंद्र सिंह, राजा राम्र शादी लाल आदि का कहना था कि विभागीय सर्वे इस बात की पुष्टि करते हैं कि जिला कैथल में नेट हाउस खेती पूरी तरह से सफल है। प्रतिशत के आधार पर जिला कैथल में नेट हाउस खेती 93 प्रतिशत है जबकि अन्य जिलों में केवल 59 प्रतिशत सफल है। सुधीर कुमार ने बताया कि प्रदेश के 22 जिलों में से 19 जिलों के किसान राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना का लाभ ले रहे हैं, जबकि कैथल, रेवाड़ी व फरीदाबाद जिलों को इसका लाभ नहीं दिया गया। इन तीन जिलों में आईएचडी नामक योजना में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि 4 हजार वर्ग मीटर में बनाए जाने वाले पाली हाउस के निर्माण की लागत कैथल, रेवाड़ी व फरीदाबाद में 504 रुपये वर्ग मीटर रखी गई है जबकि शेष जिलों में लागत का आधार 590 से 650 रुपये वर्ग मीटर रखा गया। किसान को लागत के आधार पर ही 65 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है। जिला कैथल के किसान को 4 हजार वर्ग गज के पाली हाउस के निर्माण पर 13 लाख का अनुदान मिलता है जबकि अन्य जिलों के किसान को उतनी ही भूमि पर किए जाने वाले निर्माण पर लगभग 18 लाख का अनुदान मिलता है।
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कैथल में हैं 60 नेट हाउस : जितेंद्र सिंह ने बताया कि जिला कैथल के विभिन्न गांवों में लगभग 60 नेट हाउस संरक्षित खेती कर रहे हैं। सभी पाली हाउस में किसान बेमौसमी सब्जियां खीरा व शिमला मिर्च की पैदावार ले रहे हैं।
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विधान सभा में उठाया जाएगा मुद्दा : बैठक में शामिल सभी सदस्यों ने बताया कि योजना की अनियमितताओं को लेकर जिला के किसान कृषि आयुक्त, डीजी बागवानी, कृषि मंत्री से मिल चुके हैं पर कोई सुनवाई नहीं हो पाई। विधायक जयप्रकाश ने कहा कि वे इस मामले को विधान सभा सत्र में उठाएंगे।
क्या है संरक्षित खेती : सरकार द्वारा पॉली हाउस में संरक्षित खेती करने के लिए उन्हें प्रेरित किया जा रहा है। सरकार किसानों को संरक्षित खेती के लिए भी प्रेरित कर रही है ताकि घटती जोत में अधिक आय हो सके। हरियाणा सरकार द्वारा किसानों को पॉली हाउस लगाने के लिए 65 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।