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सदियों पुरानी परंपरा को निभा रहे कैथल के युवा
अमर उजाला, कैथ्ाल
Updated Thu, 26 Sep 2013 12:16 AM IST
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कैथल में दशहरा पर्व के साथ ही एक अनूठी परंपरा का सदियों से पालन हो रहा है। पाकिस्तान से आजादी के बाद विस्थापित होकर आए परिवार की ओर से आज भी इस परंपरा को निभाया जा रहा है। जिसके तहत दशहरा से 40 दिन पूर्व युवा हनुमान जी का स्वरूप धारण करते हुए व्रत शुरू करते हैं।
कई प्रकार के कड़े नियमों का पालन करते हुए युवा दशहरा के दिन रावण दहन कार्यक्रम में पहुंचने के बाद ही अपना व्रत खत्म करते हैं। इस दौरान लोग श्रद्धा के साथ हनुमान जी के स्वरूप को अपने घर एवं प्रतिष्ठानों में आमंत्रित करते हुए उनकी पूजा करते हैं।
इस बार कैथल में दर्जनों युवाओं ने यह व्रत रखा है और श्री हनुमान सेवा समिति के सौजन्य से दशहरा पर्व पर हनुमान बनने के लिए मूर्ति स्थापना करके प्रताप गेट पर दरबार लगाया गया। दरबार में मूर्तियों की स्थापना संस्था के प्रधान नरेंद्र सचदेवा द्वारा की गई।
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यह है परंपरा
शहरवासी नरेंद्र सचदेवा, महेंद्र खन्ना ने बताया कि परंपरा के अनुसार हनुमान जी से मन्नतें मांगते हुए युवा 40 दिन का व्रत दशहरे से 40 दिन पहले शुरू करते हैं। इस दौरान पूजा के समय व्रत रखने वाले बच्चे सिर पर हनुमान जी का विशेष स्वरूप रखते हुए उनका रूप ग्रहण करते हैं। वह 40 दिनों तक दिन में एक समय खाना खाते हैं। नंगे पांव रहते हैं और हनुमान जी के दरबार में ही सोते हैं। इस बीच लोग घरों एवं प्रतिष्ठानों में हनुमान जी के स्वरूप को आमंत्रित कर उनकी पूजा करते हैं। दशहरे के दिन ढोल नगाड़ों के साथ रावण दहन कार्यक्रम में पहुंचने के बाद ही यह व्रत पूरा होता है।
दर्जनों युवाओं ने रखे हैं व्रत
नरेंद्र सचदेवा ने बताया कि इस बार दलीप रंजन, योगेश सचदेवा, गुंजन, पवन कुमार, नयन दीप रंजन, रोहित कौचर, पवन दूआ, अमित बतरा, बिल्लू बत्तरा, भोला सिंधवानी, काला सिंधवानी, दीपक, पियूश, हिंमाशू, नरेश, राजेश ने हनुमान जी की सेवा का संकल्प लिया है। जो कैथल में पिछले 70 वर्षों से लगातार प्रताप गेट से हनुमान बनने की चली आ रही परंपरा का पालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह परंपरा कैथल में बिल्ला भक्त के समय से चली आ रही है। जो स्वयं हनुमान के स्वरूप में दशहरा स्थल तक पहुंचा करते थे। आगामी 28 सितंबर को शहर में इस्कॉन सेवा समिति के सौजन्य से निकाली जाने वाली भव्य भगवान जगन्नाथ यात्रा में भी इस दरबार के सौजन्य से चार भक्त हनुमान के भव्य स्वरूप में इस यात्रा में शामिल होंगे।
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कई प्रकार के कड़े नियमों का पालन करते हुए युवा दशहरा के दिन रावण दहन कार्यक्रम में पहुंचने के बाद ही अपना व्रत खत्म करते हैं। इस दौरान लोग श्रद्धा के साथ हनुमान जी के स्वरूप को अपने घर एवं प्रतिष्ठानों में आमंत्रित करते हुए उनकी पूजा करते हैं।
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इस बार कैथल में दर्जनों युवाओं ने यह व्रत रखा है और श्री हनुमान सेवा समिति के सौजन्य से दशहरा पर्व पर हनुमान बनने के लिए मूर्ति स्थापना करके प्रताप गेट पर दरबार लगाया गया। दरबार में मूर्तियों की स्थापना संस्था के प्रधान नरेंद्र सचदेवा द्वारा की गई।
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यह है परंपरा
शहरवासी नरेंद्र सचदेवा, महेंद्र खन्ना ने बताया कि परंपरा के अनुसार हनुमान जी से मन्नतें मांगते हुए युवा 40 दिन का व्रत दशहरे से 40 दिन पहले शुरू करते हैं। इस दौरान पूजा के समय व्रत रखने वाले बच्चे सिर पर हनुमान जी का विशेष स्वरूप रखते हुए उनका रूप ग्रहण करते हैं। वह 40 दिनों तक दिन में एक समय खाना खाते हैं। नंगे पांव रहते हैं और हनुमान जी के दरबार में ही सोते हैं। इस बीच लोग घरों एवं प्रतिष्ठानों में हनुमान जी के स्वरूप को आमंत्रित कर उनकी पूजा करते हैं। दशहरे के दिन ढोल नगाड़ों के साथ रावण दहन कार्यक्रम में पहुंचने के बाद ही यह व्रत पूरा होता है।
दर्जनों युवाओं ने रखे हैं व्रत
नरेंद्र सचदेवा ने बताया कि इस बार दलीप रंजन, योगेश सचदेवा, गुंजन, पवन कुमार, नयन दीप रंजन, रोहित कौचर, पवन दूआ, अमित बतरा, बिल्लू बत्तरा, भोला सिंधवानी, काला सिंधवानी, दीपक, पियूश, हिंमाशू, नरेश, राजेश ने हनुमान जी की सेवा का संकल्प लिया है। जो कैथल में पिछले 70 वर्षों से लगातार प्रताप गेट से हनुमान बनने की चली आ रही परंपरा का पालन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह परंपरा कैथल में बिल्ला भक्त के समय से चली आ रही है। जो स्वयं हनुमान के स्वरूप में दशहरा स्थल तक पहुंचा करते थे। आगामी 28 सितंबर को शहर में इस्कॉन सेवा समिति के सौजन्य से निकाली जाने वाली भव्य भगवान जगन्नाथ यात्रा में भी इस दरबार के सौजन्य से चार भक्त हनुमान के भव्य स्वरूप में इस यात्रा में शामिल होंगे।