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Jind News: सुबह चार बजे अखाड़े में पहुंचते हैं सिवाना माल के नन्हे पहलवान, मिट्टी में पसीना बहाकर गढ़ रहे भविष्य
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फोटो कैप्शन 20 एसएफडी 2 गांव सिवाना माल के अखाड़े में अभ्यास करते हुए छोटे पहलवान। संवाद
सफीदों। आज के दौर में जब अधिकांश बच्चे और युवा सुबह देर तक बिस्तर में पड़े रहते हैं, वहीं गांव सिवाना माल के नन्हे पहलवान तड़के चार बजे ही अखाड़े में पहुंच जाते हैं। सुबह की ताजी हवा के बीच मिट्टी के अखाड़े में दंड-बैठक, कसरत और कुश्ती के दांव-पेंच सीखते इन बच्चों का जज्बा गांव के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
गुरु के निर्देश पर सीखते हैं कुश्ती के दांव-पेंच
सुबह चार बजते ही गांव का अखाड़ा पहलवानों की चहल-पहल से गुलजार हो जाता है। अभ्यास की शुरुआत शरीर को कसरत के लिए तैयार करने से होती है। इसके बाद बच्चे दंड-बैठक, दौड़ और जोर-आजमाइश करते हैं। गुरु के निर्देश पर वे कुश्ती के अलग-अलग दांव-पेंच सीखते हैं और साथी पहलवानों के साथ अभ्यास कर अपनी तकनीक को निखारते हैं। मिट्टी में घंटों पसीना बहाने से उनका शरीर मजबूत होने के साथ ही उनमें अनुशासन और आत्मविश्वास भी विकसित हो रहा है।
मेहनत और अनुशासन को बना रहे जीवन का हिस्सा
ग्रामीण पहलवान सुनील, प्रवीन, राजेश, मनीष और अमित ने बताया कि अखाड़े में नियमित अभ्यास करने से बच्चों में अनुशासन की भावना मजबूत होती है। सुबह जल्दी उठकर समय पर अभ्यास करने की आदत उन्हें मेहनत और समय की अहमियत सिखाती है। पहलवानों के अनुसार, बच्चों के खान-पान और दिनचर्या का भी विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि अभ्यास के दौरान उन्हें पर्याप्त ऊर्जा मिल सके।
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गुरु के निर्देश पर सीखते हैं कुश्ती के दांव-पेंच
सुबह चार बजते ही गांव का अखाड़ा पहलवानों की चहल-पहल से गुलजार हो जाता है। अभ्यास की शुरुआत शरीर को कसरत के लिए तैयार करने से होती है। इसके बाद बच्चे दंड-बैठक, दौड़ और जोर-आजमाइश करते हैं। गुरु के निर्देश पर वे कुश्ती के अलग-अलग दांव-पेंच सीखते हैं और साथी पहलवानों के साथ अभ्यास कर अपनी तकनीक को निखारते हैं। मिट्टी में घंटों पसीना बहाने से उनका शरीर मजबूत होने के साथ ही उनमें अनुशासन और आत्मविश्वास भी विकसित हो रहा है।
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मेहनत और अनुशासन को बना रहे जीवन का हिस्सा
ग्रामीण पहलवान सुनील, प्रवीन, राजेश, मनीष और अमित ने बताया कि अखाड़े में नियमित अभ्यास करने से बच्चों में अनुशासन की भावना मजबूत होती है। सुबह जल्दी उठकर समय पर अभ्यास करने की आदत उन्हें मेहनत और समय की अहमियत सिखाती है। पहलवानों के अनुसार, बच्चों के खान-पान और दिनचर्या का भी विशेष ध्यान रखा जाता है, ताकि अभ्यास के दौरान उन्हें पर्याप्त ऊर्जा मिल सके।
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