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Jind News: साहित्यकार लेखनी से समाज को देते हैं दिशा
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फोटो 30जेएनडी08-सीआरएसयू में आयोजित साहित्य अलंकरण समारोह में मौजूद साहित्यकार और अन्य। स्रोत प
जींद। साहित्य समाज की वैचारिक समृद्धि और सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम है। साहित्यकार अपनी लेखनी से समाज की वास्तविक परिस्थितियों को सामने लाने के साथ लोगों को सकारात्मक सोच और मानवीय मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा देते हैं। यह बात एडीसी प्रदीप कुमार ने शुक्रवार को चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में आयोजित साहित्य अलंकरण समारोह में कही।
हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था, जींद की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इसके बाद कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर किया।
एडीसी प्रदीप कुमार ने कहा कि हिंदी भाषा हमारी सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हिंदी साहित्य ने हमेशा एकता, भाईचारे, सद्भाव और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया है। साहित्यकारों का दायित्व है कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक चुनौतियों और जनसरोकारों को अभिव्यक्ति दें।
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उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को पुस्तकों के अध्ययन और साहित्यिक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में भले ही लोगों की पढ़ने की आदतों में बदलाव आया है, लेकिन पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है।
पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र हैं। इनके अध्ययन से ज्ञान, अनुभव और विचारों का विस्तार होता है। उन्होंने साहित्य अलंकरण समारोह के आयोजन के लिए हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था और हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की सराहना की। कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने सामाजिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय और मानवीय विषयों पर अपनी मौलिक रचनाएं प्रस्तुत की।
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हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था, जींद की ओर से आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इसके बाद कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर किया।
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एडीसी प्रदीप कुमार ने कहा कि हिंदी भाषा हमारी सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हिंदी साहित्य ने हमेशा एकता, भाईचारे, सद्भाव और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया है। साहित्यकारों का दायित्व है कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक चुनौतियों और जनसरोकारों को अभिव्यक्ति दें।
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उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को पुस्तकों के अध्ययन और साहित्यिक गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में भले ही लोगों की पढ़ने की आदतों में बदलाव आया है, लेकिन पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है।
पुस्तकें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र हैं। इनके अध्ययन से ज्ञान, अनुभव और विचारों का विस्तार होता है। उन्होंने साहित्य अलंकरण समारोह के आयोजन के लिए हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था और हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की सराहना की। कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने सामाजिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय और मानवीय विषयों पर अपनी मौलिक रचनाएं प्रस्तुत की।