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महिला किसान बनें कृषि-उद्यमी, अपनाएं टिकाऊ खेती के तरीके : डॉ. सुरेंद्र
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जींद। हमेटी के निदेशक डॉ. सुरेंद्र यादव ने कहा कि महिला किसानों को खेती के साथ-साथ कृषि-उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को आधुनिक व टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने को कहा। यह बात उन्होंने अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में कही।
हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी), जींद में आयोजित कार्यक्रम में महिला और पुरुष किसानों को सुरक्षित छिड़काव तकनीक, कीटनाशकों के सही उपयोग की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न गांवों से पहुंचे करीब 100 किसानों ने भाग लिया।
विशेषज्ञ व पूर्व निदेशक डॉ. कर्मचंद ने महिला किसानों को कीटनाशकों के सही इस्तेमाल, फसल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य बचाव से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया।
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उन्होंने कहा कि कीटनाशकों का उपयोग आवश्यकता और वैज्ञानिक सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए। अधिक मात्रा में रसायनों का प्रयोग फसल लागत बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति, जल स्रोतों और मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के फैसिलिटेटर डॉ. वजीर चौहान ने बताया कि छिड़काव करते समय मास्क, दस्ताने, चश्मे और अन्य सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करना बेहद जरूरी है। मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर सही समय पर छिड़काव करने और निर्धारित मात्रा में दवाओं का इस्तेमाल करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर किसान जहरीले रसायनों के दुष्प्रभाव से स्वयं और अपने परिवार को बचा सकते हैं।
खाली डिब्बों के सुरक्षित निस्तारण पर दिया जोर : कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को कीटनाशकों के खाली डिब्बों के सुरक्षित निस्तारण, छिड़काव के बाद खेत में प्रवेश के लिए निर्धारित समय का पालन और रसायनों के सुरक्षित भंडारण के बारे में भी जानकारी दी। किसानों ने फसलों में कीट नियंत्रण, रसायनों के विकल्प और कम लागत में बेहतर उत्पादन से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया।
सुरक्षित खेती ही भविष्य की समृद्ध खेती का आधार
हमेटी के निदेशक डॉ. सुरेंद्र यादव ने कहा कि आज खेती में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उन्हें वैज्ञानिक खेती और सुरक्षित कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित खेती ही भविष्य की समृद्ध खेती का आधार है।
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हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी), जींद में आयोजित कार्यक्रम में महिला और पुरुष किसानों को सुरक्षित छिड़काव तकनीक, कीटनाशकों के सही उपयोग की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न गांवों से पहुंचे करीब 100 किसानों ने भाग लिया।
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विशेषज्ञ व पूर्व निदेशक डॉ. कर्मचंद ने महिला किसानों को कीटनाशकों के सही इस्तेमाल, फसल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य बचाव से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया।
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उन्होंने कहा कि कीटनाशकों का उपयोग आवश्यकता और वैज्ञानिक सलाह के आधार पर ही किया जाना चाहिए। अधिक मात्रा में रसायनों का प्रयोग फसल लागत बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति, जल स्रोतों और मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के फैसिलिटेटर डॉ. वजीर चौहान ने बताया कि छिड़काव करते समय मास्क, दस्ताने, चश्मे और अन्य सुरक्षा उपकरणों का प्रयोग करना बेहद जरूरी है। मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर सही समय पर छिड़काव करने और निर्धारित मात्रा में दवाओं का इस्तेमाल करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर किसान जहरीले रसायनों के दुष्प्रभाव से स्वयं और अपने परिवार को बचा सकते हैं।
खाली डिब्बों के सुरक्षित निस्तारण पर दिया जोर : कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को कीटनाशकों के खाली डिब्बों के सुरक्षित निस्तारण, छिड़काव के बाद खेत में प्रवेश के लिए निर्धारित समय का पालन और रसायनों के सुरक्षित भंडारण के बारे में भी जानकारी दी। किसानों ने फसलों में कीट नियंत्रण, रसायनों के विकल्प और कम लागत में बेहतर उत्पादन से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया।
सुरक्षित खेती ही भविष्य की समृद्ध खेती का आधार
हमेटी के निदेशक डॉ. सुरेंद्र यादव ने कहा कि आज खेती में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उन्हें वैज्ञानिक खेती और सुरक्षित कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित खेती ही भविष्य की समृद्ध खेती का आधार है।