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जींद: खोखरी में जलघर, पांच स्थानों पर बनेंगे बूस्टिंग स्टेशन
Tue, 14 Feb 2023 12:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 14 Feb 2023 12:12 AM IST
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जींद। नहरी जल पर आधारित पेयजल परियोजना के पंचकूला जनस्वास्थ्य एवं अभियंत्रिकी प्रमुख अभियंता के कार्यालय में 19 करोड़ की पेयजल परियोजना के टेंडर अलॉट कर दिए गए हैं। एक सप्ताह में खोखरी गांव में जलघर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
जींद के भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने बताया कि जींद निर्वाचन क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र की पेयजल क्लस्टर परियोजना को लेकर 19 करोड़ के टेंडर आवंटित किए गए हैं। इनमें गांव खोखरी, बोहतवाला, दालमवाला, हैबतपुर, मांडो खेड़ी के लिए नहरी जल पर आधारित पेयजल परियोजना के टेंडर हैं। इनमें गांव खोखरी में योजना के तहत जलघर बनाया जाएगा और अन्य पांच स्थानों पर बूस्टिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इस परियोजना को शहर की तर्ज पर नई तकनीक से डब्ल्यूटीपी (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) के जरिए सभी गांव को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। सोमवार को पंचकूला जनस्वास्थ्य एवं अभियंत्रिकी प्रमुख अभियंता के कार्यालय में इन्हें आवंटित किया गया है। विधायक ने बताया कि उनके द्वारा निरंतर कलस्टर परियोजना के लिए विधानसभा और विधानसभा के बाहर मासिक बैठकों में परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए जोर दिया जा रहा था, क्योंकि इन गांवों का भूमिगत पानी टीडीएस और फ्लोराइड की वजह से पीने लायक नहीं रहा है। विधायक ने खुद अपने खर्चे से इन गांव के पेयजल के सैंपल करवाए थे जो फेल पाए गए थे।
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जींद के भाजपा विधायक डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने बताया कि जींद निर्वाचन क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र की पेयजल क्लस्टर परियोजना को लेकर 19 करोड़ के टेंडर आवंटित किए गए हैं। इनमें गांव खोखरी, बोहतवाला, दालमवाला, हैबतपुर, मांडो खेड़ी के लिए नहरी जल पर आधारित पेयजल परियोजना के टेंडर हैं। इनमें गांव खोखरी में योजना के तहत जलघर बनाया जाएगा और अन्य पांच स्थानों पर बूस्टिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इस परियोजना को शहर की तर्ज पर नई तकनीक से डब्ल्यूटीपी (वाटर ट्रीटमेंट प्लांट) के जरिए सभी गांव को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। सोमवार को पंचकूला जनस्वास्थ्य एवं अभियंत्रिकी प्रमुख अभियंता के कार्यालय में इन्हें आवंटित किया गया है। विधायक ने बताया कि उनके द्वारा निरंतर कलस्टर परियोजना के लिए विधानसभा और विधानसभा के बाहर मासिक बैठकों में परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए जोर दिया जा रहा था, क्योंकि इन गांवों का भूमिगत पानी टीडीएस और फ्लोराइड की वजह से पीने लायक नहीं रहा है। विधायक ने खुद अपने खर्चे से इन गांव के पेयजल के सैंपल करवाए थे जो फेल पाए गए थे।
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