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Jind News: 4000 एकड़ में अभी भी तीन फीट तक जलभराव, निकासी की नहीं कोई व्यवस्था
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11जेएनडी15: खेतों में भरे पानी की गहराई दिखाते हुए किसान। किसान
जींद। मुख्यमंत्री के दौरे के बाद भी प्रशासन नरवाना क्षेत्र में अब तक पानी निकासी के लिए कोई व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। इस क्षेत्र में ड्रेन न होने के चलते जलभराव से धरौंदी, ईस्माइलपुर, नरवाना और फैरण खुर्द गांव में सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है और खेतों में तीन फीट पानी खड़ा है।
वहीं जहां से इन गांवों का पानी निकल सकता है उस पुलिया को फरैण कलां गांव के किसानों ने बंद कर रखा है ताकि उनके खेतों में पानी न भरे। इन गांवों के किसानों ने पानी निकासी की मांग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के कई चक्कर काटे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। सात सितंबर को मुख्यमंत्री ने भी इन किसानों की समस्या सुनीं थी और उन्होंने पानी निकासी की मांग की थी।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने खेतों में जाकर किसानों को जल निकासी का आश्वासन तो दिया लेकिन पानी की एक भी बूंद खेतों से नहीं निकलवाई। अब मुख्यमंत्री के आश्वासन का इंतजार कर किसान वीरवार को डीसी कार्यालय पहुंचे जहां पर किसानों ने डीसी को शिकायत दी।
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2000 एकड़ फसल बर्बाद
नरवाना क्षेत्र में कपास और बाजरे की लगभग 2000 एकड़ में बिजाई की गई है जो फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त धान की फसल भी किसानों की बर्बादी की कगार पर है। अगर जल्द ही पानी निकासी नहीं हुई तो धान भी बर्बाद होगी। अभी तक लगभग तीन फीट पानी खेतों में खड़ा है।
गेहूं की नहीं हो पाएगी बिजाई
अगर समय रहते इन गांवों के खेतों से पानी की निकासी नहीं हो पाई तो किसान आगामी सीजन में गेहूं की फसल की बिजाई भी नहीं कर पाएंगे। अभी तक तीन फीट से ज्यादा पानी है। पीछे के गांवों से अभी पानी आकर बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन ने अभी तक एक भी मोटर पानी निकासी के लिए नहीं लगाई।
फरैण गांव के पास पुलिया खुले तो हो समाधान
किसानों ने बताया कि फरैण गांव के पास जिस पुलिया से पानी की निकासी हो सकती है। उसे वहां के किसानों ने बंद कर दिया है ताकि उनके खेतों में पानी न जाए। अगर वो पुलिया खुल जाए तो धरौंदी, ईस्माइलपुर, नरवाना और फैरण खुर्द जैसे कई गावं से पानी निकासी हो सकती है लेकिन फरैण गांव के किसान इस बात के लिए तैयार नहीं हैं।
वर्जन
किसानों की फसल खराब होने से बचाने के लिए प्रशासन काम कर रहा है। किसान उनसे मिले थे। फरैण गांव के नजदीक पुलिया बंद होने की समस्या किसानों ने बताई थी। उसको जल्द ही खुलवा दिया जाएगा ताकि किसानों के खेतों से पानी की निकासी आगे हो सके। -मोहम्मद इमरान रजा, डीसी जींद।
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वहीं जहां से इन गांवों का पानी निकल सकता है उस पुलिया को फरैण कलां गांव के किसानों ने बंद कर रखा है ताकि उनके खेतों में पानी न भरे। इन गांवों के किसानों ने पानी निकासी की मांग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के कई चक्कर काटे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। सात सितंबर को मुख्यमंत्री ने भी इन किसानों की समस्या सुनीं थी और उन्होंने पानी निकासी की मांग की थी।
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मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने खेतों में जाकर किसानों को जल निकासी का आश्वासन तो दिया लेकिन पानी की एक भी बूंद खेतों से नहीं निकलवाई। अब मुख्यमंत्री के आश्वासन का इंतजार कर किसान वीरवार को डीसी कार्यालय पहुंचे जहां पर किसानों ने डीसी को शिकायत दी।
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2000 एकड़ फसल बर्बाद
नरवाना क्षेत्र में कपास और बाजरे की लगभग 2000 एकड़ में बिजाई की गई है जो फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त धान की फसल भी किसानों की बर्बादी की कगार पर है। अगर जल्द ही पानी निकासी नहीं हुई तो धान भी बर्बाद होगी। अभी तक लगभग तीन फीट पानी खेतों में खड़ा है।
गेहूं की नहीं हो पाएगी बिजाई
अगर समय रहते इन गांवों के खेतों से पानी की निकासी नहीं हो पाई तो किसान आगामी सीजन में गेहूं की फसल की बिजाई भी नहीं कर पाएंगे। अभी तक तीन फीट से ज्यादा पानी है। पीछे के गांवों से अभी पानी आकर बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन ने अभी तक एक भी मोटर पानी निकासी के लिए नहीं लगाई।
फरैण गांव के पास पुलिया खुले तो हो समाधान
किसानों ने बताया कि फरैण गांव के पास जिस पुलिया से पानी की निकासी हो सकती है। उसे वहां के किसानों ने बंद कर दिया है ताकि उनके खेतों में पानी न जाए। अगर वो पुलिया खुल जाए तो धरौंदी, ईस्माइलपुर, नरवाना और फैरण खुर्द जैसे कई गावं से पानी निकासी हो सकती है लेकिन फरैण गांव के किसान इस बात के लिए तैयार नहीं हैं।
वर्जन
किसानों की फसल खराब होने से बचाने के लिए प्रशासन काम कर रहा है। किसान उनसे मिले थे। फरैण गांव के नजदीक पुलिया बंद होने की समस्या किसानों ने बताई थी। उसको जल्द ही खुलवा दिया जाएगा ताकि किसानों के खेतों से पानी की निकासी आगे हो सके। -मोहम्मद इमरान रजा, डीसी जींद।

11जेएनडी15: खेतों में भरे पानी की गहराई दिखाते हुए किसान। किसान

11जेएनडी15: खेतों में भरे पानी की गहराई दिखाते हुए किसान। किसान