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Jind News: बीसवेदारों की जमीन को लेकर बीडीपीओ पहुंचे ग्रामीण
Tue, 08 Jul 2025 12:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 08 Jul 2025 12:43 AM IST
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07जेएनडी43-पिल्लूखेड़ा बीडीपीओ कार्यालय में मौजूद भूराण गांव के लोग। संवाद
पिल्लूखेड़ा। पंचायती जमीन की बोली नहीं करवाकर, बीसवेदारों की जमीन को खाते लगवाने की मांग को लेकर पिल्लूखेड़ा खंड के गांव भूराण के ग्रामीण सोमवार को बीडीपीओ से मिले।
ग्रामीणों ने कहा कि गांव के लोग इस जमीन पर खेतीबाड़ी कर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन गांव के कुछ शरारती तत्व इस जमीन को खाली करवाने का प्रयास कर गांव में विवाद करवाने का प्रयास कर रहे हैं।
अगर प्रशासन इस जमीन की बोली करवाने में उनका सहयोग करता है तो गांव में बहुत बड़ा विवाद हो जाएगा। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों ने कहा कि गांव की जो भी बीसवेदारों की जमीन है। वह गांव के लोगों के खाते लगा दी जाएगी और इसी निर्णय के अनुसार प्रदेश के ज्यादातर गांव में बीसवेदारों की जमीन को खाते लगा दिया गया है, लेकिन केवल उनके गांव की बीसवेदारों की जमीन को अभी तक सरकार द्वारा खाते लगाने का काम नहीं किया गया है।
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ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांव में लगभग 50 से 60 एकड़ बीसवेदारों की जमीन है और इस जमीन पर ग्रामीणों द्वारा पिछले 60-70 साल से खेतीबाड़ी की जा रही है। इसी जमीन पर खेतीबाड़ी कर ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से अपना गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन गांव के कुछ शरारती तत्व जानबूझ कर गांव में विवाद करवाना चाहते हैं।
सरपंच जोगिंद्र भूराण ने बताया कि उनकी तबीयत खराब होने की वजह से वह मौके पर नहीं पहुंच पाया। उन्होंने उच्चाधिकारियों से बातचीत की है, जिसमें निर्णय लिया गया है कि दोबारा तारीख तय करके बोली करवाई जाएगी।
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ग्रामीणों ने कहा कि गांव के लोग इस जमीन पर खेतीबाड़ी कर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन गांव के कुछ शरारती तत्व इस जमीन को खाली करवाने का प्रयास कर गांव में विवाद करवाने का प्रयास कर रहे हैं।
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अगर प्रशासन इस जमीन की बोली करवाने में उनका सहयोग करता है तो गांव में बहुत बड़ा विवाद हो जाएगा। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
ग्रामीणों ने कहा कि गांव की जो भी बीसवेदारों की जमीन है। वह गांव के लोगों के खाते लगा दी जाएगी और इसी निर्णय के अनुसार प्रदेश के ज्यादातर गांव में बीसवेदारों की जमीन को खाते लगा दिया गया है, लेकिन केवल उनके गांव की बीसवेदारों की जमीन को अभी तक सरकार द्वारा खाते लगाने का काम नहीं किया गया है।
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ग्रामीणों ने कहा कि उनके गांव में लगभग 50 से 60 एकड़ बीसवेदारों की जमीन है और इस जमीन पर ग्रामीणों द्वारा पिछले 60-70 साल से खेतीबाड़ी की जा रही है। इसी जमीन पर खेतीबाड़ी कर ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से अपना गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन गांव के कुछ शरारती तत्व जानबूझ कर गांव में विवाद करवाना चाहते हैं।
सरपंच जोगिंद्र भूराण ने बताया कि उनकी तबीयत खराब होने की वजह से वह मौके पर नहीं पहुंच पाया। उन्होंने उच्चाधिकारियों से बातचीत की है, जिसमें निर्णय लिया गया है कि दोबारा तारीख तय करके बोली करवाई जाएगी।