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सफेद हाथी बना जींद वेटनरी पॉलीक्लीनिक
jind
Updated Sun, 25 Sep 2016 12:35 AM IST
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बन कर तैयार सफीदों रोड पर पशु पॉलीक्लीनिक।
- फोटो : bureau
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जिले के पशुपालकों के लिए 43.54 करोड़ रुपये से बन कर तैयार पशु पॉलीक्लीनिक का भवन सफेद हाथी साबित हो रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी पशु पालकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि यह परियोजना पिछले कई माह से तैयार है, लेकिन अभी तक यहां पशुओं के इलाज में प्रयोग होने वाला कोई भी उपकरण नहीं पहुंचा है। जींद जिले को पशु व्यापार का हब माना जाता है। अकेले जींद शहर में करीब 300 दूध डेयरी हैं, जिनमें करीब पांच हजार मुर्राह नस्ल की भैंस रखी गई हैं। जिले में कुल पशुओं की संख्या डेढ़ लाख है। इसके बावजूद यहां पशुपालकों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसके लिए सरकार ने सफीदों रोड पर पशु पॉलीक्लीनिक का निर्माण तो कर दिया, लेकिन यहां उपकरण नहीं पहुंचे हैं।
अब हिसार का सहारा
फिलहाल गंभीर रूप से बीमार पशुओं को इलाज के लिए पशुपालक हिसार स्थित लाला लाजपत राय पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में लेकर जाना पड़ता है। इससे जिले के लोगों पर अधिक आर्थिक बोझ पड़ता है। एक बार पशु को हिसार ले जाने व वापस लाने के लिए करीब दो हजार रुपये किराया लग जाता है, लेकिन पॉलीक्लीनिक शुरू होने के बाद यह सुविधा जींद में ही मिल सकेगी।
ये मिलनी हैं सुविधाएं
पॉलीक्लीनिक शुरू होने पर पशुओं की तमाम गंभीर बीमारी, एक्सरे, सर्जरी, जैसी सुविधाएं होंगी। फिलहाल जिले में पशुओं के एक्स रे की कोई सुविधा नहीं है। वहीं पशुओं की बीमारी के समय होने वाली दिक्कतों से निपटने के लिए भी जिले में उपकरण नहीं हैं।
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भुगत चुके हैं लोग
निडाना गांव में पशुओं में फैली बीमारी के दौरान पशुपालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। गांव में करीब 20 भैंसों की मौत हो गई थी। इस दौरान कई पशुपालकों को अपने पशुओं को इलाज के लिए हिसार ले जाना पड़ा था।
चार साल पहले हुई थी घोषणा
जींद पशु पॉलीक्लीनिक के निर्माण की घोषणा 2012 में तीन जून को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने की थी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ और अब यह काम पूरा हो चुका है, लेकिन करीब एक साल के बाद भी पॉलीक्लीनिक में उपकरण नहीं आए हैं।
मिलेगी सुविधा
आजकल भैंसों की कीमत बहुत अधिक हो गई है। किसान को दूध उत्पादन का ही सहारा है। ऐसे में पशु को कुछ हो जाता है तो, यह बहुत गंभीर होता है। नजदीक ही पशुओं के इलाज की बेहतर सुविधा मिले तो ठीक रहेगा।
- राममेहर, पशुपालक
पशु पॉलीक्लीनिक के भवन का निर्माण पूरा हो चुका है। अब यहां उपकरण आने हैं, इसके बाद ही इलाज शुरू हो पाएगा। सरकार द्वारा उपकरण भेजे जाने हैं। उपकरणों का इंतजार है।
- डॉ. डीएस नरवाल, उप पशुपालन निदेशक, जींद।
अब हिसार का सहारा
फिलहाल गंभीर रूप से बीमार पशुओं को इलाज के लिए पशुपालक हिसार स्थित लाला लाजपत राय पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में लेकर जाना पड़ता है। इससे जिले के लोगों पर अधिक आर्थिक बोझ पड़ता है। एक बार पशु को हिसार ले जाने व वापस लाने के लिए करीब दो हजार रुपये किराया लग जाता है, लेकिन पॉलीक्लीनिक शुरू होने के बाद यह सुविधा जींद में ही मिल सकेगी।
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ये मिलनी हैं सुविधाएं
पॉलीक्लीनिक शुरू होने पर पशुओं की तमाम गंभीर बीमारी, एक्सरे, सर्जरी, जैसी सुविधाएं होंगी। फिलहाल जिले में पशुओं के एक्स रे की कोई सुविधा नहीं है। वहीं पशुओं की बीमारी के समय होने वाली दिक्कतों से निपटने के लिए भी जिले में उपकरण नहीं हैं।
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भुगत चुके हैं लोग
निडाना गांव में पशुओं में फैली बीमारी के दौरान पशुपालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। गांव में करीब 20 भैंसों की मौत हो गई थी। इस दौरान कई पशुपालकों को अपने पशुओं को इलाज के लिए हिसार ले जाना पड़ा था।
चार साल पहले हुई थी घोषणा
जींद पशु पॉलीक्लीनिक के निर्माण की घोषणा 2012 में तीन जून को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने की थी। इसके बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ और अब यह काम पूरा हो चुका है, लेकिन करीब एक साल के बाद भी पॉलीक्लीनिक में उपकरण नहीं आए हैं।
मिलेगी सुविधा
आजकल भैंसों की कीमत बहुत अधिक हो गई है। किसान को दूध उत्पादन का ही सहारा है। ऐसे में पशु को कुछ हो जाता है तो, यह बहुत गंभीर होता है। नजदीक ही पशुओं के इलाज की बेहतर सुविधा मिले तो ठीक रहेगा।
- राममेहर, पशुपालक
पशु पॉलीक्लीनिक के भवन का निर्माण पूरा हो चुका है। अब यहां उपकरण आने हैं, इसके बाद ही इलाज शुरू हो पाएगा। सरकार द्वारा उपकरण भेजे जाने हैं। उपकरणों का इंतजार है।
- डॉ. डीएस नरवाल, उप पशुपालन निदेशक, जींद।