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मुआवजा नहीं मिलने पर किसानों ने जुलाना तहसील पर फिर लगाया ताला
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जुलाना। बरसात के कारण खराब हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिलने पर सोमवार को धरनारत किसान बिफर गए। उन्होंने सुबह साढे़ 10 बजे तहसील कार्यालय को स्टाफ से खाली करवाकर तहसील के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। शाम को किसानों को मनाने पहुंचे तहसीलदार को लौटा दिया।
सोमवार को धरने की अध्यक्षता भाकियू के जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र ढ़ाडा ने की। उन्होंने कहा कि इतने दिन से धरना देेने के बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया।सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है। किसानों की खराब हुई फसलों का मुआवजा नहीं दिया जा रहा, जिसके चलते किसानों को आर्थिक संकट से होकर गुजरना पड़ रहा है। 15 दिन पहले भी किसानों ने तहसील पर ताला जड़ा था। उस समय प्रशासन ने पांच दिन में मुआवजा डालने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला है। इस कारण किसानों को दोबारा ताला लगाने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने मांग की कि गेहूं की जली फसल का मुआवजा दिया जाए। जलभराव से खाली रहे रकबे का भी किसानों को मुआवजा दिया जाए। किसानों ने कहा कि जब तक उन्हें खराब हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिलता, वह ताला नहीं खोलेंगे। इस मौके पर जुलाना बारहा के कार्यकारी प्रधान बसाऊ लाठर, कुलवंत लाठर, पवन करसोला, भूप सिंह, कप्तान भी मौजूद रहे। आम आदमी पार्टी नेता कविता दलाल भी धरने पर पहुंची और समर्थन दिया।
तहसीलदार, थाना प्रभारी की नहीं सुनी
तहसील कार्यालय पर ताला जड़कर बैठे किसानों को मनाने के लिए शाम को लगभग पांच बजे तहसीलदार राकेश मलिक व थाना प्रभारी समरजीत पुलिस बल के साथ पहुंचे। उन्होंने किसानों को जल्द मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया लेकिन किसान नहीं माने। उन्होंने कहा कि किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया जारी है। मंगलवार को एसडीएम किसानों के बीच पहुंचेंगे।
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सोमवार को धरने की अध्यक्षता भाकियू के जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र ढ़ाडा ने की। उन्होंने कहा कि इतने दिन से धरना देेने के बाद भी किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया।सरकार किसानों के साथ अन्याय कर रही है। किसानों की खराब हुई फसलों का मुआवजा नहीं दिया जा रहा, जिसके चलते किसानों को आर्थिक संकट से होकर गुजरना पड़ रहा है। 15 दिन पहले भी किसानों ने तहसील पर ताला जड़ा था। उस समय प्रशासन ने पांच दिन में मुआवजा डालने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला है। इस कारण किसानों को दोबारा ताला लगाने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने मांग की कि गेहूं की जली फसल का मुआवजा दिया जाए। जलभराव से खाली रहे रकबे का भी किसानों को मुआवजा दिया जाए। किसानों ने कहा कि जब तक उन्हें खराब हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिलता, वह ताला नहीं खोलेंगे। इस मौके पर जुलाना बारहा के कार्यकारी प्रधान बसाऊ लाठर, कुलवंत लाठर, पवन करसोला, भूप सिंह, कप्तान भी मौजूद रहे। आम आदमी पार्टी नेता कविता दलाल भी धरने पर पहुंची और समर्थन दिया।
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तहसीलदार, थाना प्रभारी की नहीं सुनी
तहसील कार्यालय पर ताला जड़कर बैठे किसानों को मनाने के लिए शाम को लगभग पांच बजे तहसीलदार राकेश मलिक व थाना प्रभारी समरजीत पुलिस बल के साथ पहुंचे। उन्होंने किसानों को जल्द मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया लेकिन किसान नहीं माने। उन्होंने कहा कि किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया जारी है। मंगलवार को एसडीएम किसानों के बीच पहुंचेंगे।
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