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खाली पड़े सरकारी पदों को शीघ्र भरा जाए : नरेश दनौदा
Mon, 12 Jan 2026 12:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 12 Jan 2026 12:09 AM IST
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11जेएनडी28: नौजवान सभा के राज्य सचिव नरेश दनौदा । स्रोत सभा।
नरवाना। हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) के चेयरमैन आलोक वर्मा ने युवाओं को लेकर दिए गए बयान को लेकर प्रदेश में विरोध तेज हो गया है। भारत की जनवादी नौजवान सभा डीवाईएफआई ने बयान को अपमानजनक, संवेदनहीन और संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ बताते हुए निंदा की है।
प्रेस को जारी बयान में नौजवान सभा के राज्य सचिव नरेश दनौदा ने कहा कि चेयरमैन द्वारा हरियाणा के युवाओं को फ्लॉप बताना न केवल युवाओं के आत्मसम्मान पर चोट है बल्कि आयोग और सरकार की नाकामी छिपाने का प्रयास भी है। उन्होंने कहा कि यदि 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भी आयोग 151 पदों पर भर्ती नहीं कर पा रहा, तो इसका दोष युवाओं पर नहीं बल्कि जर्जर परीक्षा प्रणाली पर डालना चाहिए।
नरेश दनौदा ने कहा कि पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और अदालती प्रक्रियाओं में फंसे रहने के कारण युवाओं का कीमती समय बर्बाद हुआ है। ऐसे में उनकी योग्यता पर सवाल उठाना अनैतिक है। डीवाईएफआई ने मांग की कि एचपीएससी चेयरमैन को निलंबित किया जाए, खाली पड़े सरकारी पदों को शीघ्र भरा जाए और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हरियाणा का युवा फ्लॉप नहीं, बल्कि विफल व्यवस्था का शिकार है।
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प्रेस को जारी बयान में नौजवान सभा के राज्य सचिव नरेश दनौदा ने कहा कि चेयरमैन द्वारा हरियाणा के युवाओं को फ्लॉप बताना न केवल युवाओं के आत्मसम्मान पर चोट है बल्कि आयोग और सरकार की नाकामी छिपाने का प्रयास भी है। उन्होंने कहा कि यदि 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भी आयोग 151 पदों पर भर्ती नहीं कर पा रहा, तो इसका दोष युवाओं पर नहीं बल्कि जर्जर परीक्षा प्रणाली पर डालना चाहिए।
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नरेश दनौदा ने कहा कि पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और अदालती प्रक्रियाओं में फंसे रहने के कारण युवाओं का कीमती समय बर्बाद हुआ है। ऐसे में उनकी योग्यता पर सवाल उठाना अनैतिक है। डीवाईएफआई ने मांग की कि एचपीएससी चेयरमैन को निलंबित किया जाए, खाली पड़े सरकारी पदों को शीघ्र भरा जाए और भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हरियाणा का युवा फ्लॉप नहीं, बल्कि विफल व्यवस्था का शिकार है।
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