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जमीन पर अटका पानी
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Thu, 23 Mar 2017 12:34 AM IST
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हिमुडा परवाणू शहर में एक बार फिर अप्रैल से पानी की दरों में 10 फीसदी तक बढ़ोतरी करने वाला है।
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करीब तीन साल पहले शहर को नहरी पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई योजना को एक और झटका लगा है। अब जन स्वास्थ्य विभाग को इस योजना के तहत 106 एकड़ में बनने वाले जलघर के लिए जमीन नहीं मिल रही है। हालांकि, यह परियोजना केंद्र सरकार की अमृत योजना में डाली गई है, लेकिन फिलहाल इस योजना की राह में एक और रोड़ा अटकता दिख रहा है।
दरअसल, जन स्वास्थ्य विभाग ने तीन साल पहले शहर को नहरी पानी पेयजल के लिए मुहैया कराने के लिए योजना बनाई थी। हालांकि, प्रदेश सरकार ने इस योजना को रद्द कर दिया था, लेकिन दो साल पहले केंद्र सरकार की पेयजल के लिए अमृत योजना आने से फिर इस योजना की उम्मीद जगी थी, लेकिन यह योजना भी फिलहाल लटक गई है। हालांकि, इसके लिए हांसी ब्रांच नहर के पास एक साइट देखी गई थी, लेकिन इसका सौदा सिरे नहीं चढ़ा पाया है। अब जन स्वास्थ्य विभाग इसी स्कीम में जमीन के बजट की भी इंतजार कर रहा है।
यूं होती है शहर में पेयजल की सप्लाई
शहर की करीब साढ़े तीन लाख की आबादी को पेयजल जन स्वास्थ्य विभाग और हुडा द्वारा की जाती है। हुडा द्वारा करीब पांच हजार घरों में ही सप्लाई दी जा रही है, जबकि शहर के अन्य भागों में जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा 44 ट्यूबवेलों द्वारा सप्लाई दी जाती है। इन सभी क्षेत्रों में भूमिगत पानी ही सप्लाई किया जा रहा है। कई स्थानों पर जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी की गुणवत्ता सही नहीं है। स्वयं जन स्वास्थ्य विभाग भी इसको स्वीकार कर रहा है और यही कारण है कि नहरी पेयजल की योजना बनाई जा रही है।
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कैंपर का सहारा
शहर में पेयजल की हालत यह है कि घरों से लेकर निजी ऑफिसों और सरकारी कार्यालयों तक में कैंपरों के पानी की सप्लाई हो रही है। जींद शहर में प्रतिदिन करीब साढ़े चार हजार पानी के कैंपरों की खपत हो रही है। सरकारी दफ्तरों तक में कैंपर की सप्लाई जन स्वास्थ्य विभाग की सप्लाई की पोल खोल रहा है।
आरओ भी दे जाते हैं जवाब
कॉलोनी में पानी बहुत ही खराब आता है। इसके चलते आरओ भी जवाब दे जाते हैं। पानी ऐसा है कि पीना तो दूर इसमें नहाया भी नहीं जाता। अच्छे पानी की सप्लाई होनी चाहिए।
कुलदीप, दुर्गा कॉलोनी
पानी की गुणवत्ता हो ठीक
शहर में पानी की सप्लाई सही नहीं है। भूमिगत पानी की गुणवत्ता सही नहीं है और यही पानी सप्लाई किया जाता है। इसके चलते लोगों को काफी दिक्कत हो रही हैं। पीने के लिए कैंपर का प्रयोग किया जा रहा है।
दलीप कुमार, दुर्गा कॉलोनी
जमीन पर अटका है मामला
जन स्वास्थ्य विभाग ने योजना बनाकर सरकार को भेज दी थी, लेकिन यह अस्वीकार हो गई। अब अमृत योजना में नहरी पेयजल की सप्लाई की परियोजना को रखा गया है। इसके लिए हांसी ब्रांच नहर के पास करीब 106 एकड़ जमीन चाहिए, जो नहीं मिल रही है। इसके बाद ही योजना पर काम शुरू होगा।
बीपी शर्मा, एक्सईएन जन स्वास्थ्य विभाग
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दरअसल, जन स्वास्थ्य विभाग ने तीन साल पहले शहर को नहरी पानी पेयजल के लिए मुहैया कराने के लिए योजना बनाई थी। हालांकि, प्रदेश सरकार ने इस योजना को रद्द कर दिया था, लेकिन दो साल पहले केंद्र सरकार की पेयजल के लिए अमृत योजना आने से फिर इस योजना की उम्मीद जगी थी, लेकिन यह योजना भी फिलहाल लटक गई है। हालांकि, इसके लिए हांसी ब्रांच नहर के पास एक साइट देखी गई थी, लेकिन इसका सौदा सिरे नहीं चढ़ा पाया है। अब जन स्वास्थ्य विभाग इसी स्कीम में जमीन के बजट की भी इंतजार कर रहा है।
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यूं होती है शहर में पेयजल की सप्लाई
शहर की करीब साढ़े तीन लाख की आबादी को पेयजल जन स्वास्थ्य विभाग और हुडा द्वारा की जाती है। हुडा द्वारा करीब पांच हजार घरों में ही सप्लाई दी जा रही है, जबकि शहर के अन्य भागों में जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा 44 ट्यूबवेलों द्वारा सप्लाई दी जाती है। इन सभी क्षेत्रों में भूमिगत पानी ही सप्लाई किया जा रहा है। कई स्थानों पर जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्लाई किए जा रहे पानी की गुणवत्ता सही नहीं है। स्वयं जन स्वास्थ्य विभाग भी इसको स्वीकार कर रहा है और यही कारण है कि नहरी पेयजल की योजना बनाई जा रही है।
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कैंपर का सहारा
शहर में पेयजल की हालत यह है कि घरों से लेकर निजी ऑफिसों और सरकारी कार्यालयों तक में कैंपरों के पानी की सप्लाई हो रही है। जींद शहर में प्रतिदिन करीब साढ़े चार हजार पानी के कैंपरों की खपत हो रही है। सरकारी दफ्तरों तक में कैंपर की सप्लाई जन स्वास्थ्य विभाग की सप्लाई की पोल खोल रहा है।
आरओ भी दे जाते हैं जवाब
कॉलोनी में पानी बहुत ही खराब आता है। इसके चलते आरओ भी जवाब दे जाते हैं। पानी ऐसा है कि पीना तो दूर इसमें नहाया भी नहीं जाता। अच्छे पानी की सप्लाई होनी चाहिए।
कुलदीप, दुर्गा कॉलोनी
पानी की गुणवत्ता हो ठीक
शहर में पानी की सप्लाई सही नहीं है। भूमिगत पानी की गुणवत्ता सही नहीं है और यही पानी सप्लाई किया जाता है। इसके चलते लोगों को काफी दिक्कत हो रही हैं। पीने के लिए कैंपर का प्रयोग किया जा रहा है।
दलीप कुमार, दुर्गा कॉलोनी
जमीन पर अटका है मामला
जन स्वास्थ्य विभाग ने योजना बनाकर सरकार को भेज दी थी, लेकिन यह अस्वीकार हो गई। अब अमृत योजना में नहरी पेयजल की सप्लाई की परियोजना को रखा गया है। इसके लिए हांसी ब्रांच नहर के पास करीब 106 एकड़ जमीन चाहिए, जो नहीं मिल रही है। इसके बाद ही योजना पर काम शुरू होगा।
बीपी शर्मा, एक्सईएन जन स्वास्थ्य विभाग