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उचाना की आरटीपीसीआर लैब की स्थापना के एक साल पूरे
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: नागरिक अस्पताल उचाना में स्थित आरटीपीसीआर लैब।
- फोटो : Jind
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उचाना के नागरिक अस्पताल में स्थित आरटीपीसीआर लैब का शुक्रवार को एक वर्ष पूरा हो गया। 25 सितंबर 2020 को लैब का शुरभारंभ स्वास्थ्यमंत्री अनिल विज व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने ऑनलाइन किया था। अब तक लैब में 2,25,984 कोविड नमूनों की जांच हो चुकी है। इनमें से 15196 रिपोर्ट पॉजिटिव आई हैं। यह आरटीपीसीआर लैब जिले के लिए भविष्य में वरदान साबित होगी क्योंकि इसमें कुछ अन्य जांच भी जल्द शुरू होने वाली हैं।
शुरूआती दिनों में लैब चलाना काफी टेढ़ी खीर था। सबसे पहले तो लैब को स्थापित करने में ही स्वास्थ्य विभाग को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पहले इस लैब को नागरिक अस्पताल जींद में ही स्थापित करना था लेकिन यहां जगह नहीं मिल पाई। इसके बाद लैब के सामान को सेक्टर-8 स्थित पॉलीक्लीनिक में ले जाया गया लेकिन यहां भी बात नहीं बनी। लैब को स्थापित करने के लिए कम से कम छह कमरे, दो बड़े हॉल की जरूरत थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने नए बने उचाना के नागरिक अस्पताल की तीसरी मंजिल पर जगह मिल पाई और यहां लैब को स्थापित किया गया। लैब इंचार्ज डॉ. जेके के प्रयासों से लैब को सुचारू रूप से चलाया गया। कोरोना संक्रमण की पहली व दूसरी लहर के दौरान लैब के आधे से अधिक कर्मचारी पॉजिटिव हो गए थे लेकिन इसके बावजूद बाकी स्टाफ ने लैब को चालू रखा और इतना ही काम किया जितना पूरा स्टाफ करता था। लैब शुरू होने के बाद कभी भी जींद के सैंपलों को जांच के लिए दूसरे जिलों में भेजने की जरूरत नहीं पड़ी। डॉ. मान ने बताया कि लैब के सफल संचालन में उचाना के एसएमओ डॉ. सुशील गर्ग, डॉ. राकेश मित्तल के अलावा पूरे स्टाफ का बड़ा योगदान रहा।
आरटीपीसीआर लैब जिले के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है। दिनरात यहां कर्मचारियों व अधिकारियों ने काम किया। लैब का स्टाफ संक्रमित होने के बावजूद काम को चालू रखा। भविष्य में यह लैब जींद के लिए वरदान साबित होगी। लैब में अब तक 2,25,984 सैंपलों की जांच हो चुकी है। इनमें से 15,196 रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी हैं।
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-डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन।
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शुरूआती दिनों में लैब चलाना काफी टेढ़ी खीर था। सबसे पहले तो लैब को स्थापित करने में ही स्वास्थ्य विभाग को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पहले इस लैब को नागरिक अस्पताल जींद में ही स्थापित करना था लेकिन यहां जगह नहीं मिल पाई। इसके बाद लैब के सामान को सेक्टर-8 स्थित पॉलीक्लीनिक में ले जाया गया लेकिन यहां भी बात नहीं बनी। लैब को स्थापित करने के लिए कम से कम छह कमरे, दो बड़े हॉल की जरूरत थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने नए बने उचाना के नागरिक अस्पताल की तीसरी मंजिल पर जगह मिल पाई और यहां लैब को स्थापित किया गया। लैब इंचार्ज डॉ. जेके के प्रयासों से लैब को सुचारू रूप से चलाया गया। कोरोना संक्रमण की पहली व दूसरी लहर के दौरान लैब के आधे से अधिक कर्मचारी पॉजिटिव हो गए थे लेकिन इसके बावजूद बाकी स्टाफ ने लैब को चालू रखा और इतना ही काम किया जितना पूरा स्टाफ करता था। लैब शुरू होने के बाद कभी भी जींद के सैंपलों को जांच के लिए दूसरे जिलों में भेजने की जरूरत नहीं पड़ी। डॉ. मान ने बताया कि लैब के सफल संचालन में उचाना के एसएमओ डॉ. सुशील गर्ग, डॉ. राकेश मित्तल के अलावा पूरे स्टाफ का बड़ा योगदान रहा।
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आरटीपीसीआर लैब जिले के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है। दिनरात यहां कर्मचारियों व अधिकारियों ने काम किया। लैब का स्टाफ संक्रमित होने के बावजूद काम को चालू रखा। भविष्य में यह लैब जींद के लिए वरदान साबित होगी। लैब में अब तक 2,25,984 सैंपलों की जांच हो चुकी है। इनमें से 15,196 रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी हैं।
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-डॉ. जेएस पूनिया, सिविल सर्जन।