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आयुष्मान भारत योजना के पैनल में दो और निजी अस्पताल शामिल
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आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के दो और निजी अस्पताल योजना के पैनल में शामिल हो गए हैं। इनमें सरस्वती आई केयर सेंटर में जहां जरूरतमंद लोग अपनी आंखों का इलाज करा सकेंगे, वहीं आस्था अस्पताल में बच्चों का इलाज हो सकेगा। ऐसे में आयुष्मान योजना के तहत जरूरतमंद लोगों को फायदा होगा। हालांकि पहले से आयुष्मान योजना के तहत पांच निजी अस्पताल पैनल में शामिल हैं। इसमें मंगला अस्पताल, गोयल ऑथोपेडिक, बालाजी अस्पताल, बाल धर्मार्थ व मीनाक्षी जैन अस्पताल शामिल हैं। हालांकि लोगों को फायदा दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों को पैनल में शामिल कर रहा है, लेकिन जिलेभर में अच्छे निजी चिकित्सक नहीं होने के चलते लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 300 मरीजों ने आयुष्मान योजना के तहत लाभ उठाया है, लेकिन इसमें से भी केवल 50 मरीज ही इलाज के लिए निजी अस्पताल में पहुंचे हैं, जबकि 250 मरीजों ने सरकारी अस्पताल में इलाज करवाया है। वहीं चिकित्सकों की कमी के चलते ज्यादातर मरीजों को रोहतक पीजीआई, मेडिकल कॉलेज अग्रोहा ही रेफर किया जाता है।
आयुष्मान भारत योजना के तहत जींद शहर के मंगला अस्पताल, गोयल ऑर्थोपेडिक, बालाजी अस्पताल, बाल धर्मार्थ अस्पताल तथा मीनाक्षी जैन के साथ-साथ सरस्वती आई केयर सेंटर व आस्था अस्पताल को पैनल में शामिल किया गया है। मंगला अस्पताल में मुख्य रुप से सर्जरी का काम किया है। इसमें पथरी से संबंधित सर्जरी, रसोली से संबंधित मरीजों की सर्जरी की जाती है। इसी प्रकार गोयल ऑर्थोपेडिक अस्पताल हड्डी रोग से संबंधित है। इसमें हड्डियों से संबंधित रोगों के ऑपरेशन व इलाज किया जाता है।
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दो अस्पतालों में हुआ 50 मरीजों का इलाज
पैनल के तहत निजी अस्पतलों में पांच अस्पताल शामिल हैं। वहीं दो नए अस्पताल सरस्वती आई सेंटर व आस्था अस्पताल को सोमवार को शामिल किया गया है। जिलेभर में 300 मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना के तहत हुआ है। इसमें से भी केवल 50 मरीजों ने ही निजी अस्पतालों में योजना का लाभ उठाया है। कहने को तो योजना के तहत पांच निजी अस्पताल शामिल हैं, लेकिन लोगों ने मंगला अस्पताल व गोयल ऑथोपेडिक अस्पताल में ही आस्था जताई है। निजी अस्पताल में हुए 50 मरीजों का इलाज मंगला व गोयल ऑथोपेडिक अस्पताल में ही करवाया है। जबकि अन्य तीन अस्पतालों में एक भी मरीज ने इलाज नहीं करवाया।
दो अस्पतालों को और लिया पैनल में
आयुष्मान योजना का ज्यादा से ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए दो और निजी अस्पतालों को शामिल किया गया है। पहले पांच निजी अस्पताल थे। अब सात निजी अस्पताल इस योजना के तहत पैनल में शामिल किए गए हैं। वहीं जिन तीन अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए नहीं पहुंच रहे हैं, उनमें चिकित्सकों की ओर से हमें लिखित में दिया गया है कि लोग इलाज के लिए नहीं आ रहे हैं। ऐसे में उनकी गलती नहीं है। वहीं मरीजों की ओर से भी कोई लिखित शिकायत नहीं है कि वे बाकी बचे तीन अस्पतालों में इलाज के लिए गए थे और चिकित्सकों ने इलाज नहीं किया। यह मरीज की मर्जी होती है कि वह किसी अस्पताल में अपना इलाज करवाना चाहता है।
-डॉ. अजय चालिया, नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत योजना।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 300 मरीजों ने आयुष्मान योजना के तहत लाभ उठाया है, लेकिन इसमें से भी केवल 50 मरीज ही इलाज के लिए निजी अस्पताल में पहुंचे हैं, जबकि 250 मरीजों ने सरकारी अस्पताल में इलाज करवाया है। वहीं चिकित्सकों की कमी के चलते ज्यादातर मरीजों को रोहतक पीजीआई, मेडिकल कॉलेज अग्रोहा ही रेफर किया जाता है।
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आयुष्मान भारत योजना के तहत जींद शहर के मंगला अस्पताल, गोयल ऑर्थोपेडिक, बालाजी अस्पताल, बाल धर्मार्थ अस्पताल तथा मीनाक्षी जैन के साथ-साथ सरस्वती आई केयर सेंटर व आस्था अस्पताल को पैनल में शामिल किया गया है। मंगला अस्पताल में मुख्य रुप से सर्जरी का काम किया है। इसमें पथरी से संबंधित सर्जरी, रसोली से संबंधित मरीजों की सर्जरी की जाती है। इसी प्रकार गोयल ऑर्थोपेडिक अस्पताल हड्डी रोग से संबंधित है। इसमें हड्डियों से संबंधित रोगों के ऑपरेशन व इलाज किया जाता है।
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दो अस्पतालों में हुआ 50 मरीजों का इलाज
पैनल के तहत निजी अस्पतलों में पांच अस्पताल शामिल हैं। वहीं दो नए अस्पताल सरस्वती आई सेंटर व आस्था अस्पताल को सोमवार को शामिल किया गया है। जिलेभर में 300 मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना के तहत हुआ है। इसमें से भी केवल 50 मरीजों ने ही निजी अस्पतालों में योजना का लाभ उठाया है। कहने को तो योजना के तहत पांच निजी अस्पताल शामिल हैं, लेकिन लोगों ने मंगला अस्पताल व गोयल ऑथोपेडिक अस्पताल में ही आस्था जताई है। निजी अस्पताल में हुए 50 मरीजों का इलाज मंगला व गोयल ऑथोपेडिक अस्पताल में ही करवाया है। जबकि अन्य तीन अस्पतालों में एक भी मरीज ने इलाज नहीं करवाया।
दो अस्पतालों को और लिया पैनल में
आयुष्मान योजना का ज्यादा से ज्यादा लोगों को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए दो और निजी अस्पतालों को शामिल किया गया है। पहले पांच निजी अस्पताल थे। अब सात निजी अस्पताल इस योजना के तहत पैनल में शामिल किए गए हैं। वहीं जिन तीन अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए नहीं पहुंच रहे हैं, उनमें चिकित्सकों की ओर से हमें लिखित में दिया गया है कि लोग इलाज के लिए नहीं आ रहे हैं। ऐसे में उनकी गलती नहीं है। वहीं मरीजों की ओर से भी कोई लिखित शिकायत नहीं है कि वे बाकी बचे तीन अस्पतालों में इलाज के लिए गए थे और चिकित्सकों ने इलाज नहीं किया। यह मरीज की मर्जी होती है कि वह किसी अस्पताल में अपना इलाज करवाना चाहता है।
-डॉ. अजय चालिया, नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत योजना।