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Jind News: थाली को जहरमुक्त बनाने का दिया प्रशिक्षण
Sun, 07 Jul 2024 12:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 07 Jul 2024 12:44 AM IST
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जींद। हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी) में भारत सरकार के क्षेत्रीय विस्तार शिक्षा संस्थान नीलोखेड़ी के सहयोग से चल रहा चार दिवसीय प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण शनिवार को संपन्न हो गया। इसमें चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के प्राकृतिक खेती के दीन दयाल उपाध्याय उत्कृष्टता केंद्र में बागवानी विशेषज्ञ डॉ. सुरेश धानिया मुख्यातिथि व डॉ. राजेश लाठर मुख्य वक्ता रहे।
डॉ. सुरेश ने बताया कि फल और सब्जी हमारे भोजन के आवश्यक हिस्सा हैं। आजकल फलों व सब्जियों में अत्यधिक रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग हो रहा है। इनके अवशेष फलों व सब्जियों में बचे रह जाते हैं, जो भोजन के साथ हमारे शरीर में चले जाते हैं। यह रसायन हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं, इसलिए हमें जैविक तरीके से फल-सब्जियों का उत्पादन करना चाहिए। डॉ. राजेश लाठर ने बताया कि मनुष्य व पशुओं का स्वास्थ्य सीधे हमारी भूमि के स्वास्थ्य के साथ जुड़ा है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. भरत सिंह घनघस ने कृषि अधिकारियों को किसानों के उत्पादन की बिक्री में मदद करने की सलाह दी। हमेटी के प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया कि प्राकृतिक उत्पादों की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। प्रगतिशील महिला किसान सुमित्रा रानी ने बताया कि हम अनाज उत्पादन के साथ फल-सब्जी, मसाले वाली फसले, औषधीय फसलें उगाकर ज्यादा फायदा उठा सकते हैं।
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डॉ. सुरेश ने बताया कि फल और सब्जी हमारे भोजन के आवश्यक हिस्सा हैं। आजकल फलों व सब्जियों में अत्यधिक रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग हो रहा है। इनके अवशेष फलों व सब्जियों में बचे रह जाते हैं, जो भोजन के साथ हमारे शरीर में चले जाते हैं। यह रसायन हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक होते हैं, इसलिए हमें जैविक तरीके से फल-सब्जियों का उत्पादन करना चाहिए। डॉ. राजेश लाठर ने बताया कि मनुष्य व पशुओं का स्वास्थ्य सीधे हमारी भूमि के स्वास्थ्य के साथ जुड़ा है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. भरत सिंह घनघस ने कृषि अधिकारियों को किसानों के उत्पादन की बिक्री में मदद करने की सलाह दी। हमेटी के प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया कि प्राकृतिक उत्पादों की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। प्रगतिशील महिला किसान सुमित्रा रानी ने बताया कि हम अनाज उत्पादन के साथ फल-सब्जी, मसाले वाली फसले, औषधीय फसलें उगाकर ज्यादा फायदा उठा सकते हैं।
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