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बचने के लिए हाथों में तिरंगा झंडा लेकर हॉस्टल से पहुंचे रेलवे स्टेशन, अधिक भीड़ होने के कारण तीन ट्रेनों में नहीं मिल पाई जगह
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विवेक व साहिल का घर पहुंचने पर स्वागत करते परिजन।
- फोटो : Jind
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रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच भारतीय विद्यार्थियों का यूक्रेन से लौटने का सिलसिला जारी है। वीरवार को अर्बन इस्टेट निवासी साहिल, तरुण शर्मा और विवेक अपने घर लौटे हैं। यह लोग 28 फरवरी को हॉस्टल से निकले थे और तभी से परिजन पलकें बिछाएं इनका इंतजार कर रहे थे। ऐसे में परिजनों ने घर पहुंचने पर अपने लख्ते जिगर का स्वागत किया। अपने बच्चों की सकुशल घर वापसी पर परिजन भावुक भी हो गए।
अर्बन इस्टेट निवासी तरूण ने बताया कि वह कीव विवि में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। जैसे ही भारतीय दूतावास से उन्हें कीव छोडने का संदेश मिला वे तभी हाथों में तिरंगा झंडा लेकर 28 फरवरी को सुबह हॉस्टल से रेलवे स्टेशन के लिए निकल गए। पैदल चल कर स्टेशन पर पहुंचे, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण ट्रेन में बड़ी मुश्किल से जगह मिली। यहां से बस किराये पर लेकर हंगरी सीमा पर पहुंचे। यहां पर भारतीय दूतावास के अधिकारी मिले और बुधवार को हंगरी से फ्लाइट से उन्हें भारत के लिए रवाना किया गया।
आसपास हो रहे थे बम धमके
तरुण ने बताया कि जब तक कीव में रहे, हर पल संकट में गुजरा। रात हमेशा बंकर में ही गुजरी। इसके बावजूद भी धमाके सुनते रहते थे। बच्चों व परिवार के लोगों ने इस मौके पर सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की तारीफ की।
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24 फरवरी को आना था स्वदेश, युद्ध के बीच फंसे
वहीं यूक्रेन से लौटे दोनों भाई। विवेक और साहिल ने बताया कि उन्हें 24 फरवरी को वतन वापसी करनी थी, लेकिन इसी बीच युद्ध शुरू हो गया है। इसके चलते वे युद्ध में फंस गए। हालांकि आसपास कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन युद्ध के माहौल ने परेशान किया।
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अर्बन इस्टेट निवासी तरूण ने बताया कि वह कीव विवि में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। जैसे ही भारतीय दूतावास से उन्हें कीव छोडने का संदेश मिला वे तभी हाथों में तिरंगा झंडा लेकर 28 फरवरी को सुबह हॉस्टल से रेलवे स्टेशन के लिए निकल गए। पैदल चल कर स्टेशन पर पहुंचे, लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण ट्रेन में बड़ी मुश्किल से जगह मिली। यहां से बस किराये पर लेकर हंगरी सीमा पर पहुंचे। यहां पर भारतीय दूतावास के अधिकारी मिले और बुधवार को हंगरी से फ्लाइट से उन्हें भारत के लिए रवाना किया गया।
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आसपास हो रहे थे बम धमके
तरुण ने बताया कि जब तक कीव में रहे, हर पल संकट में गुजरा। रात हमेशा बंकर में ही गुजरी। इसके बावजूद भी धमाके सुनते रहते थे। बच्चों व परिवार के लोगों ने इस मौके पर सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की तारीफ की।
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24 फरवरी को आना था स्वदेश, युद्ध के बीच फंसे
वहीं यूक्रेन से लौटे दोनों भाई। विवेक और साहिल ने बताया कि उन्हें 24 फरवरी को वतन वापसी करनी थी, लेकिन इसी बीच युद्ध शुरू हो गया है। इसके चलते वे युद्ध में फंस गए। हालांकि आसपास कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन युद्ध के माहौल ने परेशान किया।