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वन्य प्राणी विभाग के नाम पर ठग गिरोह सक्रिय
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जींद। सफीदों में 20 अप्रैल को एक पंसारी को वन्य प्राणियों के अंगों की तस्करी में पकड़वाने तथा बाद में उसको पुलिस से छुड़वाने के नाम पर 50 हजार रुपये लेने वाले लोग वन्य प्राणी विभाग के नहीं बल्कि ठग गिरोह के सदस्य हैं। ये लोग इसी प्रकार लोगों को पहले पकड़वाते हैं और बाद में उनको छुड़वाने के नाम पर पैसे ऐंठते हैं। ऐसा ही मामला तीन महीने पहले बहादुरगढ़ में भी सामने आया था।
सफीदों के पूर्व पार्षद विकास गुप्ता ने जिस दीपक व एक अन्य युवक पर उसके भाई को छुड़वाने की एवज में 50 हजार रुपये ठगने के आरोप लगाए हैं, उनका वन्य प्राणी विभाग से कोई लेना देना नहीं है। तीन महीने पहले दीपक व अभिषेक नामक दो युवकों ने बहादुरगढ़ में भी इसी प्रकार एक पंसारी को फंसाया था। उससे तीन लाख रुपये ऐंठ लिए थे। बाद में पंसारी ने पुलिस को शिकायत देकर इसी प्रकार वन्य प्राणी विभाग पर तीन लाख रुपये ऐंठने के आरोप लगाए थे। पुलिस ने जब वन्य प्राणी विभाग से संपर्क किया तो पता चला कि अभिषेक व दीपक नामक का कोई भी व्यक्ति यहां कार्यरत नहीं है। बाद में पुलिस ने अभिषेक व दीपक को काबू कर लिया था। अभिषेक खुद को वन्य प्राणी विभाग का इंस्पेक्टर बताता था। दिल्ली स्थित अभिषेक के घर से पुलिस ने वन्य प्राणियों के काफी अंग भी बरामद किए थे। सूत्रों के अनुसार फिलहाल दोनों जमानत पर हैं। हो सकता है, इन्हीं दोनों लोगों ने सफीदों में ठगी की इस घटना को अंजाम दिया हो।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दीपक ने पंसारी से टोना-टोटका करने के नाम पर वन्य प्राणियों के अंग मांगे थे। बाद में पंसारी ने इन अंगों को कहीं से मंगवा लिया था। जब दीपक को लगा कि यह अंग पंसारी के पास मौजूद हैं तो उसने वन्य प्राणी विभाग का कर्मचारी बताते हुए पुलिस को फोन करके रेड करवा दी। जब पुलिस ने पंसारी आशीष गर्ग को पकड़ लिया तो उसको छुड़वाने के लिए उसके भाई विकास गुप्ता से 50 हजार रुपये ऐंठ लिए। अब विकास गुप्ता बहादुरगढ़ वाले मामले के जैसे ही वन्य प्राणी विभाग पर आरोप लगा रहा है।
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दीपक का नहीं है विभाग से कोई लेनादेना
वन्य प्राणी विभाग जींद में कार्यरत इंस्पेक्टर मनबीर खटकड़ ने बताया कि दीपक नाम का कोई भी व्यक्ति वन्य प्राणी विभाग में कार्यरत नहीं है। 20 अप्रैल को जब सफीदों में पंसारी की दुकान से वन्य प्राणियों के अंग बरामद किए थे, उस समय उसके पास सफीदों पुलिस का फोन आया था। इसके बाद वह सफीदों पहुंचे थे। जब वह सफीदों पहुंचे तो पुलिस पंसारी आशीष गर्ग से वन्य प्राणियों के अंग बरामद कर चुकी थी। उन्होंने पुलिस से सूचना देने वाले के बारे में भी पूछा था लेकिन पुलिस ने उसे कुछ नहीं बताया। बहादुरगढ़ में भी इसी प्रकार तीन महीने पहले एक मामला सामने आया था। कुछ ठग वन्य प्राणी विभाग का नाम लेकर विभाग को बदनाम कर रहे हैं।
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सफीदों के पूर्व पार्षद विकास गुप्ता ने जिस दीपक व एक अन्य युवक पर उसके भाई को छुड़वाने की एवज में 50 हजार रुपये ठगने के आरोप लगाए हैं, उनका वन्य प्राणी विभाग से कोई लेना देना नहीं है। तीन महीने पहले दीपक व अभिषेक नामक दो युवकों ने बहादुरगढ़ में भी इसी प्रकार एक पंसारी को फंसाया था। उससे तीन लाख रुपये ऐंठ लिए थे। बाद में पंसारी ने पुलिस को शिकायत देकर इसी प्रकार वन्य प्राणी विभाग पर तीन लाख रुपये ऐंठने के आरोप लगाए थे। पुलिस ने जब वन्य प्राणी विभाग से संपर्क किया तो पता चला कि अभिषेक व दीपक नामक का कोई भी व्यक्ति यहां कार्यरत नहीं है। बाद में पुलिस ने अभिषेक व दीपक को काबू कर लिया था। अभिषेक खुद को वन्य प्राणी विभाग का इंस्पेक्टर बताता था। दिल्ली स्थित अभिषेक के घर से पुलिस ने वन्य प्राणियों के काफी अंग भी बरामद किए थे। सूत्रों के अनुसार फिलहाल दोनों जमानत पर हैं। हो सकता है, इन्हीं दोनों लोगों ने सफीदों में ठगी की इस घटना को अंजाम दिया हो।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दीपक ने पंसारी से टोना-टोटका करने के नाम पर वन्य प्राणियों के अंग मांगे थे। बाद में पंसारी ने इन अंगों को कहीं से मंगवा लिया था। जब दीपक को लगा कि यह अंग पंसारी के पास मौजूद हैं तो उसने वन्य प्राणी विभाग का कर्मचारी बताते हुए पुलिस को फोन करके रेड करवा दी। जब पुलिस ने पंसारी आशीष गर्ग को पकड़ लिया तो उसको छुड़वाने के लिए उसके भाई विकास गुप्ता से 50 हजार रुपये ऐंठ लिए। अब विकास गुप्ता बहादुरगढ़ वाले मामले के जैसे ही वन्य प्राणी विभाग पर आरोप लगा रहा है।
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दीपक का नहीं है विभाग से कोई लेनादेना
वन्य प्राणी विभाग जींद में कार्यरत इंस्पेक्टर मनबीर खटकड़ ने बताया कि दीपक नाम का कोई भी व्यक्ति वन्य प्राणी विभाग में कार्यरत नहीं है। 20 अप्रैल को जब सफीदों में पंसारी की दुकान से वन्य प्राणियों के अंग बरामद किए थे, उस समय उसके पास सफीदों पुलिस का फोन आया था। इसके बाद वह सफीदों पहुंचे थे। जब वह सफीदों पहुंचे तो पुलिस पंसारी आशीष गर्ग से वन्य प्राणियों के अंग बरामद कर चुकी थी। उन्होंने पुलिस से सूचना देने वाले के बारे में भी पूछा था लेकिन पुलिस ने उसे कुछ नहीं बताया। बहादुरगढ़ में भी इसी प्रकार तीन महीने पहले एक मामला सामने आया था। कुछ ठग वन्य प्राणी विभाग का नाम लेकर विभाग को बदनाम कर रहे हैं।