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नागरिक अस्पताल में सुधर नहीं रहे हालात, कुर्सियों पर दी जा रही मरीजों को ऑक्सीजन
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जींद। कोरोना संक्रमण के कारण नागरिक अस्पताल की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा। हालात जस के तस बने हुए हैं। यहां पर बेड खाली होने की संख्या कम है, लेकिन भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या अधिक है। इमरजेंसी वार्ड की क्षमता केवल आठ मरीज रखने की है, लेकिन यहां पर 20 मरीज रखे जा रहे हैं। इमरजेंसी वार्ड के बाहर कुर्सियों पर मरीजों को ऑक्सीजन दी जा रही है।
नागरिक अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में शुरू में केवल 40 बेड की व्यवस्था की थी। पिछले वर्ष तो इतनी ही संख्या से काम चल गया था, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के कारण सभी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं हैं। फिलहाल नागरिक अस्पताल में 146 बेड की व्यवस्था है। इन सभी पर ऑक्सीजन की भी व्यवस्था की गई है। सभी बेड भरे हुए हैं। नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग में 200 बेड हैं, लेकिन अस्पताल में केवल 100 मरीज रखने की ही सुविधाएं हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से 146 बेड पर ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है। प्रतिदिन नागरिक अस्पताल से चार-पांच मरीज ठीक होकर जा रहे हैं तो चार-पांच की मौत भी हो रही है। अस्पताल में प्रतिदिन 10 बेड खाली हो रहे हैं, लेकिन अस्पताल में दाखिल होने के लिए 15 से 20 मरीज आ रहे हैं। अस्पताल प्रशासन जिन मरीजों को ज्यादा जरूरत है, उनको ही खाली हुए बेड दे रहा है। बिना बेड के काफी मरीज प्रतिदिन वापस चले जाते हैं।
ऑक्सीजन की जितनी जरूरत उतनी है उपलब्ध
नागरिक अस्पताल में 146 बेड के लिए जितनी ऑक्सीजन की जरूरत है, उतनी नागरिक अस्पताल प्रशासन को मिल रही है। यदि इससे अधिक मरीज रखे गए तो व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी। इनके लिए ऑक्सीजन व अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाएगा। अस्पताल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है, उनको घर पर ही क्वारंटीन करके इलाज करवाएं।
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अस्पताल में जितनी व्यवस्थाएं हैं, उससे अधिक मरीजों को दाखिल किया जाता है। काफी मरीज प्रतिदिन भर्ती होने के लिए आते हैं, लेकिन बेड उस हिसाब से कम खाली मिलते हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग अधिक से अधिक मरीजों को इलाज मुहैया करवाने में लगा रहता है। फिलहाल जितने मरीज आते हैं, सभी को ऑक्सीजन की जरूरत है।
-डॉ. गोपाल गोयल, एसएमओ।
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नागरिक अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में शुरू में केवल 40 बेड की व्यवस्था की थी। पिछले वर्ष तो इतनी ही संख्या से काम चल गया था, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के कारण सभी व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं हैं। फिलहाल नागरिक अस्पताल में 146 बेड की व्यवस्था है। इन सभी पर ऑक्सीजन की भी व्यवस्था की गई है। सभी बेड भरे हुए हैं। नागरिक अस्पताल की नई बिल्डिंग में 200 बेड हैं, लेकिन अस्पताल में केवल 100 मरीज रखने की ही सुविधाएं हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से 146 बेड पर ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई है। प्रतिदिन नागरिक अस्पताल से चार-पांच मरीज ठीक होकर जा रहे हैं तो चार-पांच की मौत भी हो रही है। अस्पताल में प्रतिदिन 10 बेड खाली हो रहे हैं, लेकिन अस्पताल में दाखिल होने के लिए 15 से 20 मरीज आ रहे हैं। अस्पताल प्रशासन जिन मरीजों को ज्यादा जरूरत है, उनको ही खाली हुए बेड दे रहा है। बिना बेड के काफी मरीज प्रतिदिन वापस चले जाते हैं।
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ऑक्सीजन की जितनी जरूरत उतनी है उपलब्ध
नागरिक अस्पताल में 146 बेड के लिए जितनी ऑक्सीजन की जरूरत है, उतनी नागरिक अस्पताल प्रशासन को मिल रही है। यदि इससे अधिक मरीज रखे गए तो व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाएगी। इनके लिए ऑक्सीजन व अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाएगा। अस्पताल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है, उनको घर पर ही क्वारंटीन करके इलाज करवाएं।
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अस्पताल में जितनी व्यवस्थाएं हैं, उससे अधिक मरीजों को दाखिल किया जाता है। काफी मरीज प्रतिदिन भर्ती होने के लिए आते हैं, लेकिन बेड उस हिसाब से कम खाली मिलते हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग अधिक से अधिक मरीजों को इलाज मुहैया करवाने में लगा रहता है। फिलहाल जितने मरीज आते हैं, सभी को ऑक्सीजन की जरूरत है।
-डॉ. गोपाल गोयल, एसएमओ।