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Jind News: मानसिक रूप से कमजोर लोगों पर ध्यान देने की जरूरत
Sun, 14 Jun 2026 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 14 Jun 2026 11:56 PM IST
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14जेएनडी26: जनसेवा संस्थान आश्रम भिवानी रोड। संवाद
जींद। समाज के उन बुजुर्गों पर भी ध्यान देना जरूरी है जो परिवार से बिछड़ चुके हैं या मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण अपने जीवन का संचालन स्वयं नहीं कर सकते। ऐसे जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए जिले में जन सेवा संस्थान रोहतक की जींद शाखा द्वारा दो आश्रय केंद्र संचालित किए जा रहे हैं जहां उन्हें सम्मानजनक जीवन और बेहतर देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।
संस्थान की ओर से महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग केंद्र बनाए गए हैं। महिलाओं के लिए शहर के भिवानी रोड स्थित आश्रय केंद्र संचालित है जबकि पुरुषों के लिए ईक्कस गांव के पास आश्रम बनाया गया है। इन केंद्रों में बेसहारा और मानसिक रूप से कमजोर बुजुर्गों के अलावा ऐसे महिला-पुरुष भी रह रहे हैं, जिनकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है और जिनके परिवारों का कोई पता नहीं चल पाया है।
आश्रम प्रधान समाजसेवी प्रहलाद राय गर्ग के मार्गदर्शन में चल रहा है। वर्तमान में दोनों केंद्रों में मानसिक रूप से कमजोर करीब 50 बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों की देखभाल की जा रही है। संस्थान की ओर से उन्हें रहने के लिए सुरक्षित वातावरण, पौष्टिक भोजन, नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
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राशन और अन्य सामग्री का मिलता है सहयोग
समाज के विभिन्न सामाजिक संगठन, दानदाता और आम नागरिक भी समय-समय पर राशन और अन्य सामग्री उपलब्ध कराकर सहयोग करते हैं। हालांकि आश्रम के नियमित संचालन का अधिकांश दायित्व संस्था स्वयं वहन करती है। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार दिवस पर यह आश्रम उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बने हुए हैं, जिन्हें कभी अपनेपन और सहारे की सबसे अधिक जरूरत थी। यहां उन्हें केवल छत ही नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और परिवार जैसा वातावरण भी मिल रहा है।
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संस्थान की ओर से महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग केंद्र बनाए गए हैं। महिलाओं के लिए शहर के भिवानी रोड स्थित आश्रय केंद्र संचालित है जबकि पुरुषों के लिए ईक्कस गांव के पास आश्रम बनाया गया है। इन केंद्रों में बेसहारा और मानसिक रूप से कमजोर बुजुर्गों के अलावा ऐसे महिला-पुरुष भी रह रहे हैं, जिनकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं है और जिनके परिवारों का कोई पता नहीं चल पाया है।
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आश्रम प्रधान समाजसेवी प्रहलाद राय गर्ग के मार्गदर्शन में चल रहा है। वर्तमान में दोनों केंद्रों में मानसिक रूप से कमजोर करीब 50 बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों की देखभाल की जा रही है। संस्थान की ओर से उन्हें रहने के लिए सुरक्षित वातावरण, पौष्टिक भोजन, नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
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राशन और अन्य सामग्री का मिलता है सहयोग
समाज के विभिन्न सामाजिक संगठन, दानदाता और आम नागरिक भी समय-समय पर राशन और अन्य सामग्री उपलब्ध कराकर सहयोग करते हैं। हालांकि आश्रम के नियमित संचालन का अधिकांश दायित्व संस्था स्वयं वहन करती है। विश्व बुजुर्ग दुर्व्यवहार दिवस पर यह आश्रम उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण बने हुए हैं, जिन्हें कभी अपनेपन और सहारे की सबसे अधिक जरूरत थी। यहां उन्हें केवल छत ही नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और परिवार जैसा वातावरण भी मिल रहा है।