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कंडेला खाप के दोनों प्रधानों ने दिया त्यागपत्र, अब दो महीने बाद बनेगा नया प्रधान
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पंचायत के फैसले की जानकारी देते ईश्वर सिंह लोहचब।
- फोटो : Jind
प्राचीनतम व प्रभावशाली खापों में शुमार कंडेला खाप के दोनों प्रधानों ने रविवार को त्यागपत्र दे दिया। रविवार को हुई पंचायत में नये प्रधान के नाम पर फैसला नहीं हो सका। लेकिन पंचायत ने तय किया है कि जरूरत पड़ने पर कंडेला गांव के कोई भी दो नंबरदार विमर्श कर खाप की तरफ से कोई भी फैसला ले सकते हैं। हालांकि इसमें सिर्फ पंचायत करने से संबंधित सूचना देने का फैसला मुख्य है। साथ ही पंचायत में यह भी तय हुआ कि अगले दो महीने तक यह व्यवस्था रहेगी। इस दौरान कंडेला गांव के लोग अपनी तरफ से खाप प्रधान के रूप में किसी का भी नाम तय कर सकते हैं। यदि ऐसा नहीं होता है तो फिर खाप के 28 गांवों में से प्रधान बनाया जा सकता है।
गत सप्ताह कंडेला गांव के लोगों ने बैठक कर टेकराम कंडेला को खाप प्रधान के पद से हटाने का एलान कर दिया था। साथ ही ओमप्रकाश को खाप का नया प्रधान बना दिया था। प्रधान को लेकर खींचतान में रविवार को पंचायत हुई, जिसमें खाप के सभी 28 गांवों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
खाप में ये गांव हैं शामिल
कंडेला, शाहपुर, दालमवाला, बोहतवाला, लोहचब, मनोहरपुर, खोखरी, रूपगढ़, अमरहेड़ी, अहिरका, कैरखेड़ी, जीतगढ़, जुलानी, बरसाना, खुंगा, रायचंद वाला, श्रीराग खेड़ा, जीवनपुर, झांझ कलां-खुर्द, निर्जन, पिंडारा, तलौडा, खेड़ी तलौडा, असरफगढ़, लखमीरवाला, मांडोखेड़ी, हबतपुर, छैने।
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1993 से लगातार प्रधान हैं टेकराम कंडेला
टेकराम कंडेला 1993 से लगातार खाप के प्रधान हैं। इस दौरान कई सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खाप ने अपनी ताकत दिखाई है। अब प्रधान बदला जा रहा है।
फिर एकजुट नजर आई कंडेला खाप
करीब छह साल पहले कंडेला खाप के अंतर्गत आने वाले 14 गांवों ने अलग से खेड़ा खाप का गठन करते हुए कंडेला खाप से अलग होने का फैसला लिया था। रविवार को हुई बैठक में सभी 28 गांवों के लोग एकजुट नजर आए।
मैंने दिया है त्यागपत्र
किसान आंदोलन के चलते मुझे अधिक समय बाहर देना पड़ रहा है। ऐसे में मैं त्यागपत्र दे दिया हूं। हालांकि लोग मुझे खाप प्रधान बनाना चाहते थे, लेकिन मैंने मना कर दिया। अब अगले एक-दो महीने में नया प्रधान बनाया जाएगा। तय हुआ है कि तब तक कोई भी खाप प्रधान के तौर पर काम नहीं करेगा।
टेकराम कंडेला, पूर्व प्रधान, कंडेला खाप।
जिले की राजनीति में खास भूमिका रखती है कंडेला खाप
कंडेला खाप के 28 गांवों की राजनीतिक रूप से भी खास भूमिका रहती है। वहीं 2001 में हुए किसान आंदोलन में कंडेला गांव ही आंदोलन का केंद्र रहा। इसके बाद से कंडेला खाप को नई पहचान मिली है। कंडेला खाप के लोगों को काफी संघर्षशील माना जाता है।
आठ कंडेले, नौ खेड़े, भिरड़ां के छाते किसनै छेड़े
दरअसल राजशाही के समय से ही कंडेला खाप काफी मजबूत रही है। जींद रियासत के राजा भी कंडेला खाप से हमेशा बनाकर ही रखते थे। ऐसे में कहावत रही है कि आठ कंडेले, नौ खेड़े, भिरड़ां के छाते किसनै छेड़े।
खाप के सभी 28 गांवों के लोगों की पंचायत हुई है। टेकराम कंडेल व ओमप्रकाश दोनों ने ही अपने पद से त्याग पत्र दे दिया। अब तय हुआ है कि दो महीने में नया प्रधान तय किया जाएगा। जब तक कोई भी प्रधान नहीं है। यदि खाप की तरफ से कोई संदेश देने की बात आती है तो कंडेला गांव के दो नंबरदार यह कर सकते हैं। इस दौरान खाप के सभी गांवों में चर्चा कर नया प्रधान तय किया जाएगा।
एडवाकेट ईश्वर सिंह लोहचब, पंचायत के अध्यक्ष।
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गत सप्ताह कंडेला गांव के लोगों ने बैठक कर टेकराम कंडेला को खाप प्रधान के पद से हटाने का एलान कर दिया था। साथ ही ओमप्रकाश को खाप का नया प्रधान बना दिया था। प्रधान को लेकर खींचतान में रविवार को पंचायत हुई, जिसमें खाप के सभी 28 गांवों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
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खाप में ये गांव हैं शामिल
कंडेला, शाहपुर, दालमवाला, बोहतवाला, लोहचब, मनोहरपुर, खोखरी, रूपगढ़, अमरहेड़ी, अहिरका, कैरखेड़ी, जीतगढ़, जुलानी, बरसाना, खुंगा, रायचंद वाला, श्रीराग खेड़ा, जीवनपुर, झांझ कलां-खुर्द, निर्जन, पिंडारा, तलौडा, खेड़ी तलौडा, असरफगढ़, लखमीरवाला, मांडोखेड़ी, हबतपुर, छैने।
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1993 से लगातार प्रधान हैं टेकराम कंडेला
टेकराम कंडेला 1993 से लगातार खाप के प्रधान हैं। इस दौरान कई सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खाप ने अपनी ताकत दिखाई है। अब प्रधान बदला जा रहा है।
फिर एकजुट नजर आई कंडेला खाप
करीब छह साल पहले कंडेला खाप के अंतर्गत आने वाले 14 गांवों ने अलग से खेड़ा खाप का गठन करते हुए कंडेला खाप से अलग होने का फैसला लिया था। रविवार को हुई बैठक में सभी 28 गांवों के लोग एकजुट नजर आए।
मैंने दिया है त्यागपत्र
किसान आंदोलन के चलते मुझे अधिक समय बाहर देना पड़ रहा है। ऐसे में मैं त्यागपत्र दे दिया हूं। हालांकि लोग मुझे खाप प्रधान बनाना चाहते थे, लेकिन मैंने मना कर दिया। अब अगले एक-दो महीने में नया प्रधान बनाया जाएगा। तय हुआ है कि तब तक कोई भी खाप प्रधान के तौर पर काम नहीं करेगा।
टेकराम कंडेला, पूर्व प्रधान, कंडेला खाप।
जिले की राजनीति में खास भूमिका रखती है कंडेला खाप
कंडेला खाप के 28 गांवों की राजनीतिक रूप से भी खास भूमिका रहती है। वहीं 2001 में हुए किसान आंदोलन में कंडेला गांव ही आंदोलन का केंद्र रहा। इसके बाद से कंडेला खाप को नई पहचान मिली है। कंडेला खाप के लोगों को काफी संघर्षशील माना जाता है।
आठ कंडेले, नौ खेड़े, भिरड़ां के छाते किसनै छेड़े
दरअसल राजशाही के समय से ही कंडेला खाप काफी मजबूत रही है। जींद रियासत के राजा भी कंडेला खाप से हमेशा बनाकर ही रखते थे। ऐसे में कहावत रही है कि आठ कंडेले, नौ खेड़े, भिरड़ां के छाते किसनै छेड़े।
खाप के सभी 28 गांवों के लोगों की पंचायत हुई है। टेकराम कंडेल व ओमप्रकाश दोनों ने ही अपने पद से त्याग पत्र दे दिया। अब तय हुआ है कि दो महीने में नया प्रधान तय किया जाएगा। जब तक कोई भी प्रधान नहीं है। यदि खाप की तरफ से कोई संदेश देने की बात आती है तो कंडेला गांव के दो नंबरदार यह कर सकते हैं। इस दौरान खाप के सभी गांवों में चर्चा कर नया प्रधान तय किया जाएगा।
एडवाकेट ईश्वर सिंह लोहचब, पंचायत के अध्यक्ष।

पंचायत में पहुंचे खाप के गांवों के लोग। अमर उजाला- फोटो : Jind