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Jind News: परिवहन विभाग करेगा जांच, सात यात्रियों की क्षमता, बैठे थे 14 विद्यार्थी
Fri, 28 Mar 2025 12:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 28 Mar 2025 12:03 AM IST
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जींद। गांव नगूरां में प्राइवेट स्कूल की वैन का बुधवार को टायर फटने से अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराने के मामले में परिवहन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। इस हादसे में पांच बच्चों और चार महिला अध्यापिकाओं को चोटें आई थी। नियमों को ताक पर रख कर चल रही इस स्कूल वैन में सात यात्रियों की क्षमता है, लेकिन घटना के दौरान करीब 14 बच्चे और स्टाफ टीचर मौजूद थे।
वैन में परिचालक भी नहीं था। बताया जा रहा है कि आगे वाली सीट पर बच्चे बैठे थे। स्कूल वैन में क्षमता से अधिक विद्यार्थियों का बैठना या बस वैन में फिटनेस की कमी हादसे का कारण हो सकता है। परिवहन विभाग इस मामले की जांच करेगा। इसके बाद ही हादसे का सही कारण पता चल पाएगा। डीटीओ कार्यालय की ओर से रूटीन में स्कूल बसों की चेकिंग कर फिटनेस जांच की जाती है। हालांकि यह जांच नियमित होनी चाहिए लेकिन जब भी कोई हादसा होता है तो विभाग के कर्मचारी नींद से जाग जाते हैं। दो से तीन दिन तक अभियान चलाकर खानापूर्ति कर दी जाती है। जिले भर में 300 के करीब निजी स्कूल हैं, जिनमें एक हजार से ज्यादा बसें चल रही हैं। इनमें 30 प्रतिशत से ज्यादा बसें विभाग के नियमों पर खरा नही उतर रही हैं। इसके बावजूद भी ये बसें क्षमता से अधिक बच्चों को बैठा कर बे रोकटोक चल रही हैं। इतना ही नहीं शहर में भी ऐसे कई स्कूल हैं, जो बसों की बजाए छोटे वाहनों जैसे ऑटो में बच्चों को ढोने का काम करते हैं।
पहले भी हो चुके कई हादसे
तीन साल पहले ब्राह्मणवास गांव में स्कूल बस और रोडवेज बस की टक्कर हुई थी। जिसमें 12 विद्यार्थी घायल हुए थे। करीब ढाई साल पहले नरवाना के गांव हमीरगढ़ में निजी स्कूल बस की चपेट में आने से एक बच्चे की मौत हो गई थी। पिछले साल दिसंबर में जींद के हांसी रोड पर दिल्ली पब्लिक स्कूल की विद्यार्थियों से भरी बस को पीछे से परिवहन समिति की बस ने टक्कर मार दी। इस हादसे में एक छात्र को गंभीर चोट आई थी जबकि अन्य छात्रों को मामूली चोटें आई थी। इसके बावजूद भी डीटीओ कार्यालय की ओर से स्कूल बसों की जांच को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
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लापरवाही करने वाले के खिलाफ होगी कार्रवाई : एडीसी
एडीसी विवेक आर्य ने कहा कि स्कूल बस हादसे मामले में जिसकी भी लापरवाही पाई जाती है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्कूल बसों की पिछले दिनों जिला परिवहन ने जांच की थी। इस स्कूल वैन की जांच हुई थी या नहीं, अगर जांच हुई थी तो उसमें क्या पाया गया था। उसका पता किया जाएगा।
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वैन में परिचालक भी नहीं था। बताया जा रहा है कि आगे वाली सीट पर बच्चे बैठे थे। स्कूल वैन में क्षमता से अधिक विद्यार्थियों का बैठना या बस वैन में फिटनेस की कमी हादसे का कारण हो सकता है। परिवहन विभाग इस मामले की जांच करेगा। इसके बाद ही हादसे का सही कारण पता चल पाएगा। डीटीओ कार्यालय की ओर से रूटीन में स्कूल बसों की चेकिंग कर फिटनेस जांच की जाती है। हालांकि यह जांच नियमित होनी चाहिए लेकिन जब भी कोई हादसा होता है तो विभाग के कर्मचारी नींद से जाग जाते हैं। दो से तीन दिन तक अभियान चलाकर खानापूर्ति कर दी जाती है। जिले भर में 300 के करीब निजी स्कूल हैं, जिनमें एक हजार से ज्यादा बसें चल रही हैं। इनमें 30 प्रतिशत से ज्यादा बसें विभाग के नियमों पर खरा नही उतर रही हैं। इसके बावजूद भी ये बसें क्षमता से अधिक बच्चों को बैठा कर बे रोकटोक चल रही हैं। इतना ही नहीं शहर में भी ऐसे कई स्कूल हैं, जो बसों की बजाए छोटे वाहनों जैसे ऑटो में बच्चों को ढोने का काम करते हैं।
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पहले भी हो चुके कई हादसे
तीन साल पहले ब्राह्मणवास गांव में स्कूल बस और रोडवेज बस की टक्कर हुई थी। जिसमें 12 विद्यार्थी घायल हुए थे। करीब ढाई साल पहले नरवाना के गांव हमीरगढ़ में निजी स्कूल बस की चपेट में आने से एक बच्चे की मौत हो गई थी। पिछले साल दिसंबर में जींद के हांसी रोड पर दिल्ली पब्लिक स्कूल की विद्यार्थियों से भरी बस को पीछे से परिवहन समिति की बस ने टक्कर मार दी। इस हादसे में एक छात्र को गंभीर चोट आई थी जबकि अन्य छात्रों को मामूली चोटें आई थी। इसके बावजूद भी डीटीओ कार्यालय की ओर से स्कूल बसों की जांच को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
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लापरवाही करने वाले के खिलाफ होगी कार्रवाई : एडीसी
एडीसी विवेक आर्य ने कहा कि स्कूल बस हादसे मामले में जिसकी भी लापरवाही पाई जाती है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्कूल बसों की पिछले दिनों जिला परिवहन ने जांच की थी। इस स्कूल वैन की जांच हुई थी या नहीं, अगर जांच हुई थी तो उसमें क्या पाया गया था। उसका पता किया जाएगा।