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पहले हुई तीन बच्चों की हत्या में पहले दर्ज होंगे गवाहों के बयान

Tue, 28 Jul 2020 11:54 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2020 11:54 PM IST
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The statements of witnesses will be recorded first in the murder of three children
एडवोकेट विनोद बंसल। - फोटो : Jind
डिडवाड़ा गांव में पिता द्वारा अपने ही पांच बच्चों की हत्या का जुर्म कुबूलने के बाद अब उसे अदालत से सजा दिलवाने के लिए पुलिस को कड़ी मेहनत करनी पडे़गी। कानून के जानकारों व पुलिस की माने तो जुम्मादीन का मामला अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति का है। जिस प्रकार के गंभीर अपराध को जुम्मादीन ने किया है, उसके साक्ष्य को जुटाना आसान नहीं है। ऐसे में पुलिस उन सभी लोगों के बयान पहले ही मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज करवाएगी जिनके समक्ष जुम्मादीन ने सबसे पहले जुर्म कुबूला है।
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जानकारी के लिए जुम्मादीन ने 15 जुलाई की रात में अपनी दो बेटियों निशा (7) व मुस्कान (11) को नींद की गोलियां खिलाकर नहर में फेंक दिया था। इसके बाद 23 जुलाई की रात में उसने गांव के लोगों के सामने बेटियों की हत्या के अलावा इससे पहले अपने तीन बच्चों की हत्या की बात स्वीकार कर ली थी। पहले तीन बच्चों की हुई हत्या की पुष्टि करने के लिए पुलिस डिडवाड़ा गांव के कब्रिस्तान से शवों को निकालने के लिए गई थी, मगर उनकी कब्र को नहीं ढूंढ पाई थी। ऐसे में पुलिस पहले हत्या किए गए तीन बच्चों का कोई साक्ष्य नहीं ढूंढ पाई है। इस मामले में बेशक जुम्मादीन ने हत्या की कुबूल चुका है, लेकिन उसे सजा दिलवाने के लिए पुलिस को साक्ष्य जुटाने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ेगा।
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तीन लोगों के बयान दर्ज करवाने की तैयारी
पहले से ही इस केस को मजबूत कर जुम्मादीन को सजा दिलवाने के लिए पुलिस ने तीन लोगों के ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज करवाने की तैयारी कर ली है। कानून के जानकारों का कहना है कि जुम्मादीन को सजा दिलवाने में यह अहम पॉइंट हो सकता है।
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रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस में हो सकती है गिनती
जुम्मादीन अपने पांच बच्चों की हत्या कुबूल रहा है, मगर कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे सजा दिलवाना आसान नहीं होगा। यह अदालत पर निर्भर करता है कि इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ द रेयर की श्रेणी में रखती है या नहीं। हालांकि धनजंय कुमार के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यही टिप्पणी की थी कि जिस पर रक्षा का दायित्व है, यदि वही हत्या करता है तो मामला गंभीर है। यहां भी कुछ ऐसा ही है। पिता पर बच्चों की रक्षा व पालन-पोषण का दायित्व होता है, लेकिन जुम्मा ने अपने पांचों बच्चों की हत्या की है।

विनोद बंसल, वरिष्ठ वकील।
मामले में काफी पेंच है। पुलिस के सामने कुबूला गया अपराध अदालत में मान्य नहीं होता, लेकिन जुम्मादीन ने गांव के लोगों के सामने अपना अपराध स्वीकार कर चुका है। ऐसे में तीन लोगों के बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष करवाने की तैयारी है। पंचायत में कई लोग थे, जरूरत पड़ी तो अन्य लोगों के भी बयान दर्ज करवाए जाएंगे।
अजीत सिंह शेखावत, एएसपी, सफीदों।

पांच बच्चों का हत्यारोपी जुम्मादीन।

पांच बच्चों का हत्यारोपी जुम्मादीन।- फोटो : Jind

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