{"_id":"d5f7dff034dd5019ceb144cbab899b02","slug":"the-performance-of-employees-arrested-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्मचारियों का प्रदर्शन, लघुसचिवालय पर किया गिरफ्तार ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कर्मचारियों का प्रदर्शन, लघुसचिवालय पर किया गिरफ्तार
Jind
Updated Sat, 09 Aug 2014 12:08 AM IST
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जींद। मांगों को लेकर सभी विभागों, निगम और बोर्डों के कर्मचारियों ने शुक्रवार को शहर में प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने करीब डेढ़ घंटे तक लघु सचिवालय में बवाल काटा। इस पर पुलिस ने कर्मचारियों को हिरासत में लेकर करीब साढ़े तीन घंटे पुलिस लाइन में रखने के बाद रिहा कर दिया। इस दौरान प्रशासन ने 267 कर्मचारियों को बिना शर्त रिहा करना पड़ा।
लघु सचिवालय में कर्मचारियों ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों की मांगों पर अमल करने की बजाय लाठी गोली से आवाज दबाने पर आमादा है। इससे कर्मचारियों में रोष है। फरवरी माह में मुख्यमंत्री और सर्व कर्मचारी संघ के बीच समझौता होने के बावजूद सरकार टालमटोल की नीति अपना रही है। सहमति के अनुसार आरसीएच सहित सभी परियोजनाओं में कार्यरत अनुबंधित अनुबंधित कर्मचारियों को नियमित किया जाना था। जनसंख्या के अनुसार विभागों में पद स्वीकृत करके नियमित भर्ती होनी चाहिए थी। कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर की जानी थी। रोडवेज के 3519 निजी रूट परमिट करने पर भी सहमति बनी थी। कर्मचारियों ने कहा कि नियमित करने की जिस नीति का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, उस नीति से राज्य में कार्यरत डेढ़ लाख कच्चे कर्मचारियों में से मात्र आठ हजार कर्मचारी नियमित होंगे। इस मौके पर सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान रामफल दलाल व सुनीता कालीरमण, महताब मलिक मौजूद रहे।
कम पड़ गई बसें
कर्मचारियों को गिरफ्तार करने के लिए पहले पुलिस ने दो बसों की व्यवस्था की थी, लेकिन यह कम पड़ गई। कर्मचारियों की संख्या को देखते हुए बाद रोडवेज की सात बस मंगवानी पड़ी।
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पुलिस लाइन में चला वार्ताओं को दौर
पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 267 कर्मचारियों को पुलिस लाइन में भेज दिया। यहां पुलिस व तहसीलदार ने कर्मचारियों को रिहाई के लिए निजी मुचलका भरने को कहा, लेकिन कर्मचारियों ने इसे नकारते हुए चालान कटवाने की बात कही। पुलिस लाइन में कर्मचारियों और प्रशासन के बीच तीन दौर की वार्ता हुई और इसके बाद शाम करीब साढ़े चार बजे कर्मचारियों को रिहा कर दिया गया।
वर्जन
प्रदर्शन कर रहे 267 कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हे तहसीलदार के समक्ष पेश किया गया। तहसीलदार ने कर्मचारियों को रिहा कर दिया गया।
धर्मबीर पूनिया, डीएसपी
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लघु सचिवालय में कर्मचारियों ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों की मांगों पर अमल करने की बजाय लाठी गोली से आवाज दबाने पर आमादा है। इससे कर्मचारियों में रोष है। फरवरी माह में मुख्यमंत्री और सर्व कर्मचारी संघ के बीच समझौता होने के बावजूद सरकार टालमटोल की नीति अपना रही है। सहमति के अनुसार आरसीएच सहित सभी परियोजनाओं में कार्यरत अनुबंधित अनुबंधित कर्मचारियों को नियमित किया जाना था। जनसंख्या के अनुसार विभागों में पद स्वीकृत करके नियमित भर्ती होनी चाहिए थी। कर्मचारियों की वेतन विसंगति दूर की जानी थी। रोडवेज के 3519 निजी रूट परमिट करने पर भी सहमति बनी थी। कर्मचारियों ने कहा कि नियमित करने की जिस नीति का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, उस नीति से राज्य में कार्यरत डेढ़ लाख कच्चे कर्मचारियों में से मात्र आठ हजार कर्मचारी नियमित होंगे। इस मौके पर सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान रामफल दलाल व सुनीता कालीरमण, महताब मलिक मौजूद रहे।
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कम पड़ गई बसें
कर्मचारियों को गिरफ्तार करने के लिए पहले पुलिस ने दो बसों की व्यवस्था की थी, लेकिन यह कम पड़ गई। कर्मचारियों की संख्या को देखते हुए बाद रोडवेज की सात बस मंगवानी पड़ी।
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पुलिस लाइन में चला वार्ताओं को दौर
पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे 267 कर्मचारियों को पुलिस लाइन में भेज दिया। यहां पुलिस व तहसीलदार ने कर्मचारियों को रिहाई के लिए निजी मुचलका भरने को कहा, लेकिन कर्मचारियों ने इसे नकारते हुए चालान कटवाने की बात कही। पुलिस लाइन में कर्मचारियों और प्रशासन के बीच तीन दौर की वार्ता हुई और इसके बाद शाम करीब साढ़े चार बजे कर्मचारियों को रिहा कर दिया गया।
वर्जन
प्रदर्शन कर रहे 267 कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हे तहसीलदार के समक्ष पेश किया गया। तहसीलदार ने कर्मचारियों को रिहा कर दिया गया।
धर्मबीर पूनिया, डीएसपी