{"_id":"62151cac0bd05260352d676d","slug":"the-people-of-the-city-will-be-hit-by-the-development-fee-according-to-the-collector-rate-the-development-fee-will-be-5-percent-jind-news-rtk6391771157","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर के लोगों पर पड़ेगी विकास शुल्क की मार, कलेक्टर रेट के अनुसार पांच प्रतिशत लगेगा विकास शुल्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर के लोगों पर पड़ेगी विकास शुल्क की मार, कलेक्टर रेट के अनुसार पांच प्रतिशत लगेगा विकास शुल्क
विज्ञापन
प्रदेश सरकार ने विकास शुल्क में वृद्धि की है। कलेक्टर रेट के अनुसार शहर के किसी भी हिस्से में पांच प्रतिशत राशि प्रॉपर्टी मालिक को बतौर विकास शुल्क जमा करवाना होगा। यह राशि एकमुश्त जमा करवानी होगी। जिन स्थानों पर पहले विकास शुल्क जमा करवाया है वहां भी बकाया राशि नगर परिषद में जमा करवानी होगी। इससे जहां नगर परिषद मालामाल होंगी। वहीं शहर के लोगों पर करोड़ रुपये के बोझ पड़ेगा। इसके तहत इंदिरा व जनता बाजा में व्यवसायिक भवनों पर 2750 रुपये प्रति गज तो अर्बन इस्टेट व डिफेंस कॉलोनी में प्रति वर्ग गज 875 रुपये के हिसाब से विकास शुल्क लगेगा।
नगर परिषद के दायरे में अब तक लोगों से रिहायशी प्रापर्टी पर 50 रुपये से 240 रुपये तक प्रति गज और व्यवसायिक प्रॉपर्टी पर 500 रुपये वर्ग गज के हिसाब से विकास शुल्क लिया जा रहा था। अब प्रदेश सरकार कलेक्टर रेट के हिसाब से विकास शुल्क की व्यवस्था कर दी है। इससे शहर के लोगों को चार से पांच गुणा ज्यादा विकास शुल्क चुकाना पड़ेगा। हालांकि अब तक अब तक विकास शुल्क का आधार कॉलोनी के अनुसार प्रति वर्ग गज रहा है। साल 2004 में वैध हुई शहर की कालोनियों में 120 रुपये प्रति वर्ग गज शुल्क तय किया गया था। वहीं साल 2014 में वैध हुई 60 कालोनियों में 50 रुपये गज और साल 2018 में वैध हुई 10 कालोनियों में 240 रुपये वर्ग गज विकास शुल्क तय था। नई व्यवस्थाओं के अनुसार विकास शुल्क कलेक्टर रेट के अनुसार पांच प्रतिशत वसूला जाएगा।
यहां पड़ेगा असर
शहरी स्थानीय निकाय द्वारा विकास शुल्क को लेकर नई अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार नगर परिषद की पुरानी परिधि में, लाल डोरा, कोर एरिया, वैध कालोनी, अधिसूचित कालोनी और औद्योगिक से विकास शुल्क कलेक्टर रेट का पांच प्रतिशत लिया जाएगा। जो लोग पुराने नियमों के अनुसार विकास शुल्क भर चुके हैं उन्हें भी अब नए नियमों के अनुसार विकास शुल्क देना होगा। इसके अनुसार पहले जमा की गई विकास शुल्क की राशि कम कर दी जाएगी।
विज्ञापन
आपकी जेब पर ऐसे पड़ेगा असर
नई व्यवस्था का विभिन्न संगठन व राजनीतिक दलों द्वारा विरोध किया जा रहा है। नई व्यवस्था से प्रॉपर्टी मालिक की जेब पर असर पड़ेगा। इसके तहत पुरानी व्यवस्था में किसी कॉलोनी में 100 वर्ग गज में मकान होने पर यदि वहां विकास शुल्क 100 रुपये वर्ग गज है तो 10 हजार रुपये की राशि भरनी थी लेकिन अब हुई व्यवस्था में कलेक्टर रेट के अनुसार पैसे लगेंगे। यदि कलेक्टर रेट पांच हजार रुपये है उसी 100 गज के मकान पर 25 हजार रुपये विकास शुल्क लगेगा। अब तक अर्बन एस्टेट, हाउसिंग बोर्ड, स्कीम नंबर पांच, छह, 10 व 19 में विकास शुल्क का प्रावधान नहीं था, लेकिन अब इन कॉलोनियों में भी विकास शुल्क लगेगा।
यह रहेगी व्यवस्था
नई व्यवस्थाओं के तहत राजकीय महाविद्यालय से रानी तालाब तक गोहाना रोड पर कलेक्टर रेट 26 हजार रुपये प्रति वर्ग गज है। इसके अनुसार यहां पर विकास शुल्क 1300 रुपये प्रति वर्ग गज देना होगा। इंदिरा बाजार व जनता बाजार में व्यवसायिक प्रापर्टी का कलेक्टर रेट रेट 55 हजार रुपये प्रति गज तय है। इसके हिसाब से यहां पर 2750 रुपये प्रति वर्ग गज विकास शुल्क बनेगा। वहीं बुलबुल होटल से नई सब्जी मंडी तक व्यवसायिक प्रापर्टी पर 45 हजार रुपये प्रति गज कलेक्टर रेट होने के कारण विकास शुल्क 2250 रुपये प्रति गज रहेगा। डीआरडीए के सामने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण मार्केट, राजकीय कॉलेज से लघु सचिवालय तक की व्यवासायिक साइट के लिए 38 हजार रुपये वर्ग गज के कलेक्टर रेट हैं। इसके अनुसार यहां पर 1900 रुपये प्रति वर्ग गज विकास शुल्क तय होगा। इसी प्रकार लघु सचिवालय से गोहाना रोड पर नगर परिषद की हद तक व्यवसायिक संपत्तियों का कलेक्टर रेट 28 हजार रुपये प्रति वर्ग गज है। इसके हिसाब से यहां पर विकास शुल्क 1400 रुपये प्रति वर्ग गज तय होगा। शहर की सबसे पॉश कॉलोनियों में शुमार स्कीम नंबर पांच-छह में रिहायशी क्षेत्र के कलेक्टर रेट 32 हजार रुपये प्रति वर्ग गज हैं। इसके अनुसार यहां पर विकास शुल्क 1600 रुपये प्रति वर्ग गज लिया जाएगा। अर्बन एस्टेट, डिफेंस कालोनी, सेक्टर आठ से 11 में रिहायशी प्रापर्टी के कलेक्टर रेट 17500 रुपये प्रति गज हैं। यहां पर विकास शुल्क की दर 875 रुपये प्रति वर्ग गज रहेगी।
लोग कर रहे हैं विरोध
विकास शुल्क की नई व्यवस्थाओं का लोग विरोध कर रहे हैं। जींद विकास संगठन ने पहले ही विकास शुल्क के विरोध में आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं नगर परिषद के चुनाव भी सिर पर है। ऐसे में चुनाव की तैयारी कर रहे लोग भी इसको मुद्दा बना रहे हैं। इनेलो द्वारा भी मंगलवार को एलान किया गया है कि यदि विकास शुल्क की नई व्यवस्था वापस नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
जो भी व्यवस्था की गई है वह सरकार द्वारा की गई है। ऐसे में इसके अनुसार लोगों को ही विकास शुल्क जमा करवाना होगा। यह सरकार के स्तर का मामला ऐसे में स्थानीय स्तर पर कुछ भी नहीं किया जा सकता।
-राजेंद्र प्रसाद, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, जींद ।
विज्ञापन
नगर परिषद के दायरे में अब तक लोगों से रिहायशी प्रापर्टी पर 50 रुपये से 240 रुपये तक प्रति गज और व्यवसायिक प्रॉपर्टी पर 500 रुपये वर्ग गज के हिसाब से विकास शुल्क लिया जा रहा था। अब प्रदेश सरकार कलेक्टर रेट के हिसाब से विकास शुल्क की व्यवस्था कर दी है। इससे शहर के लोगों को चार से पांच गुणा ज्यादा विकास शुल्क चुकाना पड़ेगा। हालांकि अब तक अब तक विकास शुल्क का आधार कॉलोनी के अनुसार प्रति वर्ग गज रहा है। साल 2004 में वैध हुई शहर की कालोनियों में 120 रुपये प्रति वर्ग गज शुल्क तय किया गया था। वहीं साल 2014 में वैध हुई 60 कालोनियों में 50 रुपये गज और साल 2018 में वैध हुई 10 कालोनियों में 240 रुपये वर्ग गज विकास शुल्क तय था। नई व्यवस्थाओं के अनुसार विकास शुल्क कलेक्टर रेट के अनुसार पांच प्रतिशत वसूला जाएगा।
विज्ञापन
यहां पड़ेगा असर
शहरी स्थानीय निकाय द्वारा विकास शुल्क को लेकर नई अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार नगर परिषद की पुरानी परिधि में, लाल डोरा, कोर एरिया, वैध कालोनी, अधिसूचित कालोनी और औद्योगिक से विकास शुल्क कलेक्टर रेट का पांच प्रतिशत लिया जाएगा। जो लोग पुराने नियमों के अनुसार विकास शुल्क भर चुके हैं उन्हें भी अब नए नियमों के अनुसार विकास शुल्क देना होगा। इसके अनुसार पहले जमा की गई विकास शुल्क की राशि कम कर दी जाएगी।
विज्ञापन
आपकी जेब पर ऐसे पड़ेगा असर
नई व्यवस्था का विभिन्न संगठन व राजनीतिक दलों द्वारा विरोध किया जा रहा है। नई व्यवस्था से प्रॉपर्टी मालिक की जेब पर असर पड़ेगा। इसके तहत पुरानी व्यवस्था में किसी कॉलोनी में 100 वर्ग गज में मकान होने पर यदि वहां विकास शुल्क 100 रुपये वर्ग गज है तो 10 हजार रुपये की राशि भरनी थी लेकिन अब हुई व्यवस्था में कलेक्टर रेट के अनुसार पैसे लगेंगे। यदि कलेक्टर रेट पांच हजार रुपये है उसी 100 गज के मकान पर 25 हजार रुपये विकास शुल्क लगेगा। अब तक अर्बन एस्टेट, हाउसिंग बोर्ड, स्कीम नंबर पांच, छह, 10 व 19 में विकास शुल्क का प्रावधान नहीं था, लेकिन अब इन कॉलोनियों में भी विकास शुल्क लगेगा।
यह रहेगी व्यवस्था
नई व्यवस्थाओं के तहत राजकीय महाविद्यालय से रानी तालाब तक गोहाना रोड पर कलेक्टर रेट 26 हजार रुपये प्रति वर्ग गज है। इसके अनुसार यहां पर विकास शुल्क 1300 रुपये प्रति वर्ग गज देना होगा। इंदिरा बाजार व जनता बाजार में व्यवसायिक प्रापर्टी का कलेक्टर रेट रेट 55 हजार रुपये प्रति गज तय है। इसके हिसाब से यहां पर 2750 रुपये प्रति वर्ग गज विकास शुल्क बनेगा। वहीं बुलबुल होटल से नई सब्जी मंडी तक व्यवसायिक प्रापर्टी पर 45 हजार रुपये प्रति गज कलेक्टर रेट होने के कारण विकास शुल्क 2250 रुपये प्रति गज रहेगा। डीआरडीए के सामने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण मार्केट, राजकीय कॉलेज से लघु सचिवालय तक की व्यवासायिक साइट के लिए 38 हजार रुपये वर्ग गज के कलेक्टर रेट हैं। इसके अनुसार यहां पर 1900 रुपये प्रति वर्ग गज विकास शुल्क तय होगा। इसी प्रकार लघु सचिवालय से गोहाना रोड पर नगर परिषद की हद तक व्यवसायिक संपत्तियों का कलेक्टर रेट 28 हजार रुपये प्रति वर्ग गज है। इसके हिसाब से यहां पर विकास शुल्क 1400 रुपये प्रति वर्ग गज तय होगा। शहर की सबसे पॉश कॉलोनियों में शुमार स्कीम नंबर पांच-छह में रिहायशी क्षेत्र के कलेक्टर रेट 32 हजार रुपये प्रति वर्ग गज हैं। इसके अनुसार यहां पर विकास शुल्क 1600 रुपये प्रति वर्ग गज लिया जाएगा। अर्बन एस्टेट, डिफेंस कालोनी, सेक्टर आठ से 11 में रिहायशी प्रापर्टी के कलेक्टर रेट 17500 रुपये प्रति गज हैं। यहां पर विकास शुल्क की दर 875 रुपये प्रति वर्ग गज रहेगी।
लोग कर रहे हैं विरोध
विकास शुल्क की नई व्यवस्थाओं का लोग विरोध कर रहे हैं। जींद विकास संगठन ने पहले ही विकास शुल्क के विरोध में आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं नगर परिषद के चुनाव भी सिर पर है। ऐसे में चुनाव की तैयारी कर रहे लोग भी इसको मुद्दा बना रहे हैं। इनेलो द्वारा भी मंगलवार को एलान किया गया है कि यदि विकास शुल्क की नई व्यवस्था वापस नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
जो भी व्यवस्था की गई है वह सरकार द्वारा की गई है। ऐसे में इसके अनुसार लोगों को ही विकास शुल्क जमा करवाना होगा। यह सरकार के स्तर का मामला ऐसे में स्थानीय स्तर पर कुछ भी नहीं किया जा सकता।
-राजेंद्र प्रसाद, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, जींद ।