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Jind News: सच्चाखेड़ा में धान की फसल ने तोड़ी किसानों की कमर, खराब बीज ने बर्बाद कर दी मेहनत, ट्रैक्टर से नष्ट करनी पड़ी फसल
Sat, 19 Jul 2025 12:39 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 19 Jul 2025 12:39 AM IST
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18जेएनडी17-ट्रैक्टर से खेत में लगाई फ सल को बहाते हुए किसान। संवाद
नरवाना। खेतों में इस समय धान की फसल का सीजन जोरों पर है लेकिन नरवाना के सच्चाखेड़ा गांव में किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। खराब बीज ने ऐसा कहर ढाया कि किसान अपनी पूरी फसल ट्रैक्टर से बहाने को मजबूर हो गए। मामला सामने आने के बाद किसानों में भारी आक्रोश है और उन्होंने बीज कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
गांव सच्चाखेड़ा के किसान राहुल, सुरेश, नवीन, रामभक्त, राजेंद्र और मनीष ने बताया कि उन्होंने एक महीने पहले धान की बुवाई की थी लेकिन पौधे बढ़े नहीं शुरुआत में लगा कि यह मौसम का असर हो सकता है। धीरे-धीरे पता चला कि जड़ें लाल हो रही हैं।
गांठें पड़ रही हैं और पत्ते पीले होकर सूख रहे हैं। किसान राहुल ने बताया कि उसने 13 एकड़ में स्विफ्ट गोल्ड ब्रांड के बीज की धान लगाई थी लेकिन पौधे बौने के बाद वहीं के वहीं रह गए। पूरी फसल खराब हो गई। मजबूरी में 6 एकड़ की फसल ट्रैक्टर से नष्ट करनी पड़ी। प्रति किला 20 हजार रुपये का खर्च आया था और अब बर्बाद फसल नष्ट करने में भी तीन हजार रुपये प्रति एकड़ का खर्चा हो रहा है।
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बीज कंपनी पर किसानों का आरोप : कहा खराब बीज ने डुबाया
किसानों का आरोप है कि उन्हें जो बीज दिया गया, वह पूरी तरह से खराब था। उन्होंने कहा कि जब दुकानदार के पास शिकायत लेकर गए तो उसका कहना था कि वह वहीं बीज बेचते हैं जो कंपनी से आता है और वह बीज का पक्का बिल भी देने को तैयार है। किसान राहुल का कहना है कि उसने खाद, दवाइयां और हर उपाय किए लेकिन कुछ काम नहीं आया। कंपनी ने जो बीज दिया, वही खराब निकला। उसका खामियाजा अब उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
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अब फिर से खर्च कर लगाएंगे नई फसल
किसानों ने बताया कि अब वे नरवाना के उझाना से 1121 किस्म का नया बीज की पौध लाएंगे और खेत में दोबारा धान की बुवाई करेंगे। इससे दोबारा मेहनत और खर्च बढ़ेगा लेकिन खेती छोड़ना विकल्प नहीं है।
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प्रशासन से जांच और मुआवजे की मांग
ग्रामीण किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बीज कंपनी की जांच कराई जाए और जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें मुआवजा दिया जाए। गांव के अन्य किसानों में भी इस घटना के बाद चिंता का माहौल है।
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यदि किसानों के आरोप है कि बीज में गड़बड़ी है तो वह दुकानदार की ओर से बीज के दिए जा रहे पक्के बिल को लेकर विभाग में शिकायत दर्ज कराए और इसके बाद दुकान से बीज के सैंपल लेकर जांच के लिए भिजवा दिए जाएंगे ताकि बीच की गुणवत्ता का पता चल जाए।
-डॉ. सुरेंद्र मोर, ब्लॉक एग्रीकल्चर ऑफिसर नरवाना।
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गांव सच्चाखेड़ा के किसान राहुल, सुरेश, नवीन, रामभक्त, राजेंद्र और मनीष ने बताया कि उन्होंने एक महीने पहले धान की बुवाई की थी लेकिन पौधे बढ़े नहीं शुरुआत में लगा कि यह मौसम का असर हो सकता है। धीरे-धीरे पता चला कि जड़ें लाल हो रही हैं।
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गांठें पड़ रही हैं और पत्ते पीले होकर सूख रहे हैं। किसान राहुल ने बताया कि उसने 13 एकड़ में स्विफ्ट गोल्ड ब्रांड के बीज की धान लगाई थी लेकिन पौधे बौने के बाद वहीं के वहीं रह गए। पूरी फसल खराब हो गई। मजबूरी में 6 एकड़ की फसल ट्रैक्टर से नष्ट करनी पड़ी। प्रति किला 20 हजार रुपये का खर्च आया था और अब बर्बाद फसल नष्ट करने में भी तीन हजार रुपये प्रति एकड़ का खर्चा हो रहा है।
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बीज कंपनी पर किसानों का आरोप : कहा खराब बीज ने डुबाया
किसानों का आरोप है कि उन्हें जो बीज दिया गया, वह पूरी तरह से खराब था। उन्होंने कहा कि जब दुकानदार के पास शिकायत लेकर गए तो उसका कहना था कि वह वहीं बीज बेचते हैं जो कंपनी से आता है और वह बीज का पक्का बिल भी देने को तैयार है। किसान राहुल का कहना है कि उसने खाद, दवाइयां और हर उपाय किए लेकिन कुछ काम नहीं आया। कंपनी ने जो बीज दिया, वही खराब निकला। उसका खामियाजा अब उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
अब फिर से खर्च कर लगाएंगे नई फसल
किसानों ने बताया कि अब वे नरवाना के उझाना से 1121 किस्म का नया बीज की पौध लाएंगे और खेत में दोबारा धान की बुवाई करेंगे। इससे दोबारा मेहनत और खर्च बढ़ेगा लेकिन खेती छोड़ना विकल्प नहीं है।
प्रशासन से जांच और मुआवजे की मांग
ग्रामीण किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बीज कंपनी की जांच कराई जाए और जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें मुआवजा दिया जाए। गांव के अन्य किसानों में भी इस घटना के बाद चिंता का माहौल है।
यदि किसानों के आरोप है कि बीज में गड़बड़ी है तो वह दुकानदार की ओर से बीज के दिए जा रहे पक्के बिल को लेकर विभाग में शिकायत दर्ज कराए और इसके बाद दुकान से बीज के सैंपल लेकर जांच के लिए भिजवा दिए जाएंगे ताकि बीच की गुणवत्ता का पता चल जाए।
-डॉ. सुरेंद्र मोर, ब्लॉक एग्रीकल्चर ऑफिसर नरवाना।

18जेएनडी17-ट्रैक्टर से खेत में लगाई फ सल को बहाते हुए किसान। संवाद

18जेएनडी17-ट्रैक्टर से खेत में लगाई फ सल को बहाते हुए किसान। संवाद