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जांच अधिकारियों के सामने बदल गई जेल प्रशासन की भाषा
ब्यूरो/अमर उजाला, जींद
Updated Sun, 02 Apr 2017 11:16 PM IST
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मामले की जांच करने के बाद जेल से बाहर आते हुए डीसी विनय सिंह।
- फोटो : Amar Ujala
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जिला जेल में डांस और महिला डांसर पर बरस रहे नोट, जेल की मर्यादाओं और कानून का धता बताकर महिला डांसर के साथ कैदियों, बंदियों और खुद जेल कर्मचारियों की तस्वीरें आने के बाद रविवार को जेल प्रशासन बैकफुट पर रहा। हालांकि शुक्रवार तक जेल प्रशासन दावा ठोंक कर कार्यक्रम उनके जेल का नहीं होने की बात कह रहा था और इसके लिए शपथपत्र भी देने को तैयार था। लेकिन जांच अधिकारियों के जेल में पहुंचने के बाद उनके सुर बदले नजर आए।
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रविवार को जब जेल विभाग के आईजी जगजीत सिंह और जिला प्रशासन जांच के लिए पहुंचा तो जेल अधिकारियों की भाषा ही बदल गई। अब जेल अधिकारी कार्यक्रम को नकारने की स्थित में नहीं थे। डांसरों पर बरसने वाले नोट चिल्ड्रेन बैंक, बच्चों के खेलने के नोट बताए गए। सिर्फ इतना ही नहीं, सबूत के तौर पर करीब 10-12 ऐसे नोट अधिकारियों के समक्ष पेश किए गए। इससे पूरे मामले में गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि जेल विभाग के आईजी जगजीत सिंह ने कहा कि जांच में सभी कर्मचारियों व अधिकारियों को शामिल किया है। आईजी ने माना है कि सांस्कृतिक कार्यक्रम की आड़ में सभी सीमाओं को लांघा गया है।
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इस मामले में जेल वार्डन से लेकर जेल अधीक्षक स्तर तक हर जगह पर थोड़ी बहुत खामियां मिली हैं। जेल के अधिकारियों ने चूर्ण वाले नोट बिखरने की बात को माना है, लेकिन चूर्ण वाले नोट भी बाहर से ही जेल के अंदर गए हैं। जेल के अंदर तो कैदी और बंदी इस तरीके के नोट रख नहीं सकते। यह जांच का विषय है। महिला कलाकारों को मुफ्त लाया गया था, लेकिन उनके साथ कर्मचारियों और उनके साथ कैदियों का नाचना एक बड़ी खामी है। इसलिए सभी के बयान दर्ज करके रिपोर्ट तैयार की गई है। सोमवार को रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। उसके बाद किसी प्रकार की कार्रवाई का अधिकार सरकार के पास होगा।
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गैंगस्टर की कलाकारों की व्यवस्था
सूत्रों के अनुसार जेल में बंद एक शातिर बदमाश ने जेल के अंदर कलाकारों की व्यवस्था की थी। हालांकि पहले कार्यक्रम में डांसर सपना को बुलाने की योजना बनी, लेकिन बाद में इसके लिए हरियाणवी गायक वीरपाल के नेतृत्व में चार महिला कलाकार छह मार्च को जेल के अंदर पहुंची और पूरे दिन हरियाणवी गानों पर डांस किया। सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम के लिए कलाकारों को भुगतान के लिए जेल में उगाही भी हुई है। हालांकि अधिकारी इससे मना कर रहे हैं। डीसी विनय सिंह ने बताया कि कलाकारों की व्यवस्था एक व्यक्ति विशेष ने जिम्मेवारी ली थी और उसी ने जेल के अंदर कलाकारों को बुलाया था। कलाकारों को कोई पैसे नहीं दिए गए है।
कलाकार ही लाए थे नोट, आईजी ने उठाई कार्यक्रम पर उंगली
कार्यक्रम में कलाकारों पर बरसाए गए नोट नकली थे और यह अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए कलाकार ही साथ लाए थे, लेकिन यह कार्यक्रम गलत था। इस प्रकार का कार्यक्रम सरकारी लोक संपर्क विभाग या किसी स्वयं सेवी संस्था द्वारा करवाया जाना चाहिए न कि ऐसे कलाकारों से। वहीं जांच के दौरान अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन कैदियों और बंदियों की मांग पर ही किया था। इसके लिए कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। अनौपचारिक रूप से ही कार्यक्रम की अनुमति मिली थी। -जगजीत सिंह, आईजी, जेल विभाग।
लाख टके के सवाल पर चुप रहा प्रशासन
बेशक अब जांच में प्रशासन कलाकारों पर बरसाए गए नोट नकली बता रहा है, लेकिन यह बात किसी को भी हजम नहीं हो रही है। कारण है जांच टीम के आने से एक दिन पहले तक जेल प्रशासन कार्यक्रम को जींद जेल का ही होने से मना कर रहा था। ऐसे में जांच के बाद अधिकारियों द्वारा नोट नकली बताए जा रहे हैं। इससे साफ है कि यहां सब कुछ सही नहीं है और बहुत कुछ पहले भी छिपाया जा रहा था और अब भी छिपाया जा रहा है।