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Jind News: प्रवासी परिंदों से गुलजार रहती है कालवन गांव की झील
Fri, 02 Feb 2024 03:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 02 Feb 2024 03:00 AM IST
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01जेएनडी05 : गांव कालवन के पक्षी विहार केंद्र में उड़ान भरते विदेशी पक्षी। संवाद
सतीश जागलान
जींद। कालवन गांव में स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती प्रवासी पक्षी विहार को संरक्षित और विकसित करने के लिए इसे कम्युनिटी रिजर्व सेंटर का दर्जा दिया जाएगा। वन्यजीव संरक्षण एवं अनुसंधान केंद्र के चेयरमैन डॉ. जयवीर सिंह ने ग्राम पंचायत के सामने इसकी घोषणा की थी।
इस पक्षी विहार में हर वर्ष नवंबर में साइबेरिया, मंगोलिया, चीन व अन्य यूरोपीय देशों से 70 से ज्यादा प्रजाति के हजारों पक्षी आते हैं। यह पक्षी मार्च में यहां से चले जाते हैं। हजारों किलोमीटर का सफर तय करके यह पक्षी यहां आते हैं और प्रजनन भी करते हैं। टोहाना के साथ लगते जींद के कालवन गांव की बनिया पाना की 27 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक झील बनी हुई है। जिले में सबसे ज्यादा प्रवासी पक्षी कालवन गांव की इसी झील में आते हैं। कालवन गांव के लोग सर्दी में प्रवासी पक्षियों के स्वागत के लिए तैयार रहते हैं। मार्च में इन्हें विदा करते हैं। वन्य पक्षी विभाग इस प्राकृतिक झील को पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। वन्य प्राणी विभाग ने प्राकृतिक झील के आसपास परिंदों को बचाने के लिए बोर्ड लगाए हुए हैं। इन पर बेजुबान हैं पक्षी बेचारे, लेकिन परम मित्र हमारे। हम सबने ठाना है, कालवन की तरह पक्षियों को बचाना है। पंछी वहीं बार-बार आते हैं, जहां प्यार और सुरक्षा पाते हैं, जैसे स्लोगन लिखे गए हैं। विभाग के इस तरह के स्लोगन लोगों को बेजुबान परिंदों को बचाने और उन्हें सुरक्षा तथा प्यार देने का संदेश दे रहे हैं।
वन्य प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर मनबीर सिंह का कहना है कि कालवन की इस प्राकृतिक झील को पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित करने के लिए ग्राम पंचायत से प्रस्ताव मिल चुका है। जल्द ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। वन्यजीव संरक्षण एवं अनुसंधान केंद्र के चेयरमैन डॉ. जयवीर सिंह भी यहां का दौरा कर चुके हैं और ग्रामीणों को आश्वासन दिया है। संवाद
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जींद। कालवन गांव में स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती प्रवासी पक्षी विहार को संरक्षित और विकसित करने के लिए इसे कम्युनिटी रिजर्व सेंटर का दर्जा दिया जाएगा। वन्यजीव संरक्षण एवं अनुसंधान केंद्र के चेयरमैन डॉ. जयवीर सिंह ने ग्राम पंचायत के सामने इसकी घोषणा की थी।
इस पक्षी विहार में हर वर्ष नवंबर में साइबेरिया, मंगोलिया, चीन व अन्य यूरोपीय देशों से 70 से ज्यादा प्रजाति के हजारों पक्षी आते हैं। यह पक्षी मार्च में यहां से चले जाते हैं। हजारों किलोमीटर का सफर तय करके यह पक्षी यहां आते हैं और प्रजनन भी करते हैं। टोहाना के साथ लगते जींद के कालवन गांव की बनिया पाना की 27 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक झील बनी हुई है। जिले में सबसे ज्यादा प्रवासी पक्षी कालवन गांव की इसी झील में आते हैं। कालवन गांव के लोग सर्दी में प्रवासी पक्षियों के स्वागत के लिए तैयार रहते हैं। मार्च में इन्हें विदा करते हैं। वन्य पक्षी विभाग इस प्राकृतिक झील को पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित करने की योजना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। वन्य प्राणी विभाग ने प्राकृतिक झील के आसपास परिंदों को बचाने के लिए बोर्ड लगाए हुए हैं। इन पर बेजुबान हैं पक्षी बेचारे, लेकिन परम मित्र हमारे। हम सबने ठाना है, कालवन की तरह पक्षियों को बचाना है। पंछी वहीं बार-बार आते हैं, जहां प्यार और सुरक्षा पाते हैं, जैसे स्लोगन लिखे गए हैं। विभाग के इस तरह के स्लोगन लोगों को बेजुबान परिंदों को बचाने और उन्हें सुरक्षा तथा प्यार देने का संदेश दे रहे हैं।
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वन्य प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर मनबीर सिंह का कहना है कि कालवन की इस प्राकृतिक झील को पक्षी अभयारण्य के रूप में विकसित करने के लिए ग्राम पंचायत से प्रस्ताव मिल चुका है। जल्द ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा। वन्यजीव संरक्षण एवं अनुसंधान केंद्र के चेयरमैन डॉ. जयवीर सिंह भी यहां का दौरा कर चुके हैं और ग्रामीणों को आश्वासन दिया है। संवाद
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01जेएनडी05 : गांव कालवन के पक्षी विहार केंद्र में उड़ान भरते विदेशी पक्षी। संवाद

01जेएनडी05 : गांव कालवन के पक्षी विहार केंद्र में उड़ान भरते विदेशी पक्षी। संवाद