{"_id":"6a1887082d4e9772ea0222a0","slug":"the-government-must-regularize-services-soon-no-excuses-left-now-jogender-lohan-jind-news-c-199-1-sroh1009-154169-2026-05-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार जल्द नियमित करे सेवाएं, अब कोई बहाना नहीं बचा : जोगेंद्र लोहान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार जल्द नियमित करे सेवाएं, अब कोई बहाना नहीं बचा : जोगेंद्र लोहान
विज्ञापन
जींद। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) ने उच्च न्यायालय की ओर से अतिथि अध्यापकों को नियमित करने संबंधी दिए गए फैसले का स्वागत किया है। जिला प्रधान जोगेंद्र लोहान ने कहा कि यह फैसला पिछले करीब 20 वर्षों से प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में सेवाएं दे रहे अतिथि अध्यापकों के लिए बड़ी राहत साबित होगा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में स्कूलों में अध्यापकों की कमी को देखते हुए सरकार ने अतिथि अध्यापकों की भर्ती की थी। भर्ती प्रक्रिया सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के तहत पूरी की गई थी लेकिन इसके बावजूद इन अध्यापकों को नियमित नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो दशकों से सरकार लगातार इनका शोषण करती रही है। जोगेंद्र लोहान ने कहा कि वर्ष 2014 में सरकार ने कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के लिए नीति बनाई थी लेकिन अतिथि अध्यापकों को उसका लाभ नहीं दिया गया।
विज्ञापन
इसके बाद अध्यापकों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। उच्च न्यायालय की ओर से नीति रद्द किए जाने के कारण मामला लंबे समय तक अटका रहा लेकिन 16 अप्रैल 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने उस नीति को सही ठहराया।
इसके बाद अतिथि अध्यापकों ने दोबारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उन्होंने बताया कि अब 27 मई को उच्च न्यायालय ने 2014 की नीति के तहत सभी अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के आदेश जारी किए हैं। फैसले के बाद कर्मचारियों में खुशी का माहौल है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में स्कूलों में अध्यापकों की कमी को देखते हुए सरकार ने अतिथि अध्यापकों की भर्ती की थी। भर्ती प्रक्रिया सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के तहत पूरी की गई थी लेकिन इसके बावजूद इन अध्यापकों को नियमित नहीं किया गया।
विज्ञापन
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो दशकों से सरकार लगातार इनका शोषण करती रही है। जोगेंद्र लोहान ने कहा कि वर्ष 2014 में सरकार ने कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के लिए नीति बनाई थी लेकिन अतिथि अध्यापकों को उसका लाभ नहीं दिया गया।
विज्ञापन
इसके बाद अध्यापकों को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। उच्च न्यायालय की ओर से नीति रद्द किए जाने के कारण मामला लंबे समय तक अटका रहा लेकिन 16 अप्रैल 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने उस नीति को सही ठहराया।
इसके बाद अतिथि अध्यापकों ने दोबारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उन्होंने बताया कि अब 27 मई को उच्च न्यायालय ने 2014 की नीति के तहत सभी अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के आदेश जारी किए हैं। फैसले के बाद कर्मचारियों में खुशी का माहौल है।