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Jind News: बड़नपुर की निशुल्क लाइब्रेरियां बनीं युवाओं की उम्मीद

Sun, 04 Jan 2026 11:19 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Sun, 04 Jan 2026 11:19 PM IST
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The free libraries of Baranpur have become the hope of the youth.
04जेएनडी23: बड़नपुर की निशुल्क लाइब्रेरी। संवाद
नरवाना। ग्रामीण क्षेत्र में संसाधनों की कमी के बावजूद अगर मजबूत इच्छाशक्ति और सामूहिक प्रयास हो तो बड़े बदलाव संभव हैं। इसका जीवंत उदाहरण गांव बड़नपुर में देखने को मिल रहा है। यहां एजुकेशन प्रमोटर कमेटी की देखरेख में चल रही तीन निशुल्क लाइब्रेरियां आसपास के कई गांवों के बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी हैं।
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इन लाइब्रेरियों से अब तक सैंकड़ों युवा पढ़ाई कर चुके हैं। इनमें से 100 से अधिक बच्चे सरकारी नौकरी पाकर बड़े पदों पर चयनित हो चुके हैं। इन लाइब्रेरियों की सबसे खास बात यह है कि यहां कोई अलग से अध्यापक नियुक्त नहीं है। इसके बावजूद बच्चे आपसी अनुशासन, मेहनत और लगन से तैयारी करते हैं।
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बच्चा जिस परीक्षा की तैयारी करता है, उसी में सफलता हासिल करने का जज्बा यहां के माहौल में साफ दिखाई देता है। आज इन लाइब्रेरियों का नाम न सिर्फ बड़नपुर बल्कि आसपास के कई गांवों में सम्मान के साथ लिया जाता है। एजुकेशन प्रमोटर कमेटी द्वारा गांव में तीन अलग-अलग लाइब्रेरियां संचालित की जा रही हैं।
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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम लाइब्रेरी केवल लड़कों के लिए है। वहीं डॉ. भीमराव अंबेडकर लाइब्रेरी एक बड़ी लाइब्रेरी है जहां लड़के और लड़कियां दोनों पढ़ाई कर सकते हैं। इसके अलावा कल्पना चावला लाइब्रेरी केवल छात्राओं के लिए संचालित की जा रही है। इन तीनों लाइब्रेरियों में किसी भी विद्यार्थी से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
कमेटी का उद्देश्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे। शहरों में लाइब्रेरी की महंगी फीस को देखते हुए यह व्यवस्था ग्रामीण बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है। एजुकेशन प्रमोटर कमेटी जो इन लाइब्रेरी की देखरेख कर रही हैं।

इनमें प्रोफेसर ज्ञानी राम, कुलवंत, बलवान सतबीर एसडीओ, अनूप जेई, दिलबाग, राजेश, रणवीर सिंह, रीजकराम, सुखदेव, प्रोफेसर राजेश आदि सदस्य शामिल है।


वर्ष 2020 में शुरू हुई थी लाइब्रेरी

कमेटी सदस्य रणधीर ने बताया कि वर्ष 2020 में इन लाइब्रेरियों की शुरुआत की गई थी। शुरुआती समय में 100 रुपये मासिक शुल्क लिया जाता था, लेकिन अब सभी सुविधाएं पूरी तरह निशुल्क हैं। करीब 150 विद्यार्थी एक साथ बैठकर पढ़ाई कर सकते हैं। लाइब्रेरियों में फ्री वाई-फाई, इनवर्टर, किताबें, पानी, बिजली और शौचालय की सुविधा उपलब्ध हैं। पूरे गांव का सहयोग इसमें अहम भूमिका निभा रहा है। शादी-विवाह जैसे आयोजनों में लोग स्वेच्छा से दान देते हैं। हाल ही में गांव बेलरखा से आए भातियों ने 21 हजार रुपये का दान देकर सुविधाएं बढ़ाने में योगदान दिया। कमेटी द्वारा हर दो साल में वार्षिक उत्सव आयोजित किया जाता है जिसमें पढ़ाई, खेल और सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को सम्मानित किया जाता है। बच्चों को प्रेरित करने के लिए उच्च पदस्थ अधिकारियों को भी आमंत्रित किया जाता है।


लाइब्रेरी में पढ़ने से बच्चों की उपलब्धियां

- राहुल का आईटीबीपी, इलाहाबाद में चयन

- कई विद्यार्थियों का सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में चयन

- बड़नपुर की छात्रा शमी पुलिस सब इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त

- गोपाल शर्मा बने सब इंस्पेक्टर

- सैंकड़ों युवा पंचायत सेक्रेटरी, आर्मी क्लर्क, ग्रुप-सी व ग्रुप-डी सहित अन्य पदों पर चयनित है
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