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Jind News: किसानों को जमीन का नहीं मिला मुआवजा, अदालत ने रोडवेज ट्रांसपोर्ट का खाता सीज करने के दिए आदेश
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जींद। किसानों को जमीन का मुआवजा नहीं देने पर एडिशनल सेशन जज जयबीर सिंह हुड्डा की अदालत ने रोडवेज ट्रांसपोर्ट का खाता सीज करने के आदेश जारी किए हैं। रोडवेज महाप्रबंधक राहुल जैन पर पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
अदालत ने रोडवेज जीएम को तलब कर पूछा, मुआवजे में देरी क्यों? इस पर वे बहाने बनाने लगे।
शहर में नए बस स्टैंड के लिए पांडू-पिंडारा के पास जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसकी प्रक्रिया 2012-2015 तक हुई थी। नए बस स्टैंड का निर्माण 12 एकड़ में हुआ है। तीन जून 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसकी घोषणा की थी। 2021 में यह बस स्टैंड पुराने में नए में शिफ्ट हो गया था।
बस स्टैंड के लिए रोडवेज ट्रांसपोर्ट ने किसानों से जमीन खरीदी थी। जमीन की राशि जिला राजस्व विभाग को वितरित करनी थी। जबकि राशि खजाना विभाग से ली जानी थी। ऐसे में जिला राजस्व विभाग ने कुछ किसानों को तो जमीन का मुआवजा वितरित कर दिया लेकिन 20 से ज्यादा किसानों को मुआवजे से वंचित रखा।
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मामले को लेकर अलग-अलग 20 याचिका अदालत में डाली गईं जिस पर 24 अप्रैल को अदालत में सुनवाई हुई। इसमें अदालत ने रोडवेज महाप्रबंधक राहुल जैन को भी तलब किया।
वहीं जिला राजस्व विभाग और खजाना विभाग के अधिकारियों को भी बुलाया गया। तीनों अधिकारियों से सुनवाई के दौरान अदालत ने जवाब मांगा कि मुआवजा वितरित करने में देरी क्यों और राशि का भुगतान करने में क्या प्रयास किए हैं।
इस पर महाप्रबंधक ने बताया कि यह मामला सरकार, परिवहन विभाग, चंडीगढ़ के एसीएस के संज्ञान में लाया गया था जिन्होंने दिलबाग सिंह, संयुक्त निदेशक राज्य परिवहन, निदेशक कार्यालय, राज्य परिवहन हरियाणा चंडीगढ़ को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के बारे में न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया था।
हालांकि वह अधिकारी न्यायालय में ही नहीं आए। इस पर शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि महाप्रबंधक केवल बहाने बना रहे हैं और सुनवाई की पिछली कई तारीखों से मामले को लंबा खींचा जा रहा है।
इस मामले के संबंध में अदालत में 20 याचिकाएं लंबित हैं। किसानों का विभाग पर 120 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। अदालत ने आदेश देकर रोडवेज ट्रांसपोर्ट के खाते का ब्योरा मांगा तो उसमें 140 करोड़ मिले। इस पर अदालत ने रोडवेज ट्रांसपोर्ट का खाता, 140 करोड़ रुपये समेत ट्रेजरी ऑफिसर के माध्यम से सीज करने के आदेश जारी किए हैं।
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अदालत ने रोडवेज जीएम को तलब कर पूछा, मुआवजे में देरी क्यों? इस पर वे बहाने बनाने लगे।
शहर में नए बस स्टैंड के लिए पांडू-पिंडारा के पास जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसकी प्रक्रिया 2012-2015 तक हुई थी। नए बस स्टैंड का निर्माण 12 एकड़ में हुआ है। तीन जून 2012 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इसकी घोषणा की थी। 2021 में यह बस स्टैंड पुराने में नए में शिफ्ट हो गया था।
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बस स्टैंड के लिए रोडवेज ट्रांसपोर्ट ने किसानों से जमीन खरीदी थी। जमीन की राशि जिला राजस्व विभाग को वितरित करनी थी। जबकि राशि खजाना विभाग से ली जानी थी। ऐसे में जिला राजस्व विभाग ने कुछ किसानों को तो जमीन का मुआवजा वितरित कर दिया लेकिन 20 से ज्यादा किसानों को मुआवजे से वंचित रखा।
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मामले को लेकर अलग-अलग 20 याचिका अदालत में डाली गईं जिस पर 24 अप्रैल को अदालत में सुनवाई हुई। इसमें अदालत ने रोडवेज महाप्रबंधक राहुल जैन को भी तलब किया।
वहीं जिला राजस्व विभाग और खजाना विभाग के अधिकारियों को भी बुलाया गया। तीनों अधिकारियों से सुनवाई के दौरान अदालत ने जवाब मांगा कि मुआवजा वितरित करने में देरी क्यों और राशि का भुगतान करने में क्या प्रयास किए हैं।
इस पर महाप्रबंधक ने बताया कि यह मामला सरकार, परिवहन विभाग, चंडीगढ़ के एसीएस के संज्ञान में लाया गया था जिन्होंने दिलबाग सिंह, संयुक्त निदेशक राज्य परिवहन, निदेशक कार्यालय, राज्य परिवहन हरियाणा चंडीगढ़ को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के बारे में न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया था।
हालांकि वह अधिकारी न्यायालय में ही नहीं आए। इस पर शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि महाप्रबंधक केवल बहाने बना रहे हैं और सुनवाई की पिछली कई तारीखों से मामले को लंबा खींचा जा रहा है।
इस मामले के संबंध में अदालत में 20 याचिकाएं लंबित हैं। किसानों का विभाग पर 120 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। अदालत ने आदेश देकर रोडवेज ट्रांसपोर्ट के खाते का ब्योरा मांगा तो उसमें 140 करोड़ मिले। इस पर अदालत ने रोडवेज ट्रांसपोर्ट का खाता, 140 करोड़ रुपये समेत ट्रेजरी ऑफिसर के माध्यम से सीज करने के आदेश जारी किए हैं।