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भारत का संविधान आजादी के आंदोलन संघर्षों का निचोड़ : प्रमोद गौरी
Sun, 13 Apr 2025 01:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 13 Apr 2025 01:08 AM IST
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12जेएनडी22-सूबे सिंह स्माकर में आयोजित सेमिनार में भाग लेते हुए सदस्य। स्रोत समिति
जींद। शहीद यादगार समिति की ओर से सूबे सिंह स्मारक में भारत का संविधान और मौजूदा चुनौती विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें हरियाणा ज्ञान-विज्ञान समिति के राज्य अध्यक्ष प्रोफेसर प्रमोद गौरी ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया।
सेमिनार की अध्यक्षता जनवादी लेखक संघ के सचिव मंगतराम शास्त्री ने की। प्रमोद गौरी ने कहा कि भारत का संविधान सिर्फ एक कानून की किताब भर नहीं है, बल्कि आजादी के आंदोलन के संघर्षों का निचोड़ है। उन्होने कहा कि देश की आजादी के संघर्षों में विभिन्न विचारधाराएं शामिल थी, जो एक तरफ स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचार को चरितार्थ करने के लिए साम्राज्यवादी ताकतों के साथ लड़ रही थी, वहीं दूसरी ओर इन्हें धार्मिक व सांप्रदायिक ताकतों से भी जूझना पड़ रहा था। आजादी के बाद भारत का समाज कैसा हो, एक भारतीय नागरिक के क्या अधिकार हों और राज्य सत्ता का नागरिकों के प्रति क्या उत्तरदायित्व हो, इन बातों को लेकर पूरी बहस थी। इन्ही विमर्शों को पार करते हुए संविधान सभा की ओर से गठित प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान का निर्माण किया। इस अवसर पर सुरेश राठी, मंदीप नेहरा, जसपाल, अशोक, राजकुमार श्योकंद, विक्रम सिंह, महेंद्र बिश्नोई, कपूर सिंह, डॉ. मुरारी लाल, आजाद पांचाल, रामफल दहिया, जयप्रकाश लुदाना, राजकुमार और वेदप्रकाश भी मौजूद रहे।
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सेमिनार की अध्यक्षता जनवादी लेखक संघ के सचिव मंगतराम शास्त्री ने की। प्रमोद गौरी ने कहा कि भारत का संविधान सिर्फ एक कानून की किताब भर नहीं है, बल्कि आजादी के आंदोलन के संघर्षों का निचोड़ है। उन्होने कहा कि देश की आजादी के संघर्षों में विभिन्न विचारधाराएं शामिल थी, जो एक तरफ स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचार को चरितार्थ करने के लिए साम्राज्यवादी ताकतों के साथ लड़ रही थी, वहीं दूसरी ओर इन्हें धार्मिक व सांप्रदायिक ताकतों से भी जूझना पड़ रहा था। आजादी के बाद भारत का समाज कैसा हो, एक भारतीय नागरिक के क्या अधिकार हों और राज्य सत्ता का नागरिकों के प्रति क्या उत्तरदायित्व हो, इन बातों को लेकर पूरी बहस थी। इन्ही विमर्शों को पार करते हुए संविधान सभा की ओर से गठित प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान का निर्माण किया। इस अवसर पर सुरेश राठी, मंदीप नेहरा, जसपाल, अशोक, राजकुमार श्योकंद, विक्रम सिंह, महेंद्र बिश्नोई, कपूर सिंह, डॉ. मुरारी लाल, आजाद पांचाल, रामफल दहिया, जयप्रकाश लुदाना, राजकुमार और वेदप्रकाश भी मौजूद रहे।
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