फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jind News ›   The CBC machine at the hospital is out of order, causing problems for patients.

Jind News: अस्पतालों में बंद पड़ी सीबीसी मशीनें, मरीज परेशान

Wed, 17 Dec 2025 11:37 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 17 Dec 2025 11:37 PM IST
विज्ञापन
The CBC machine at the hospital is out of order, causing problems for patients.
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन



जींद। जिलेभर के सरकारी अस्पतालों में मेडोनिक कंपनी की सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) मशीनों के रीजेंट खत्म होने से जांच व्यवस्था प्रभावित हो गई हैं। कुछ अस्पतालों में सीबीसी जांच पूरी तरह बंद हो चुकी है और कुछ में सीमित स्तर पर जांच की जा रही है। इससे मरीजों को समय पर रिपोर्ट नहीं मिल रही और इलाज में भी देरी हो रही है।

नागरिक अस्पताल जींद में सीबीसी जांच के लिए कुल तीन मशीनें स्थापित हैं लेकिन रीजेंट की कमी के चलते इनमें से केवल एक मशीन ही काम कर रही है। प्रतिदिन औसतन 1500 से अधिक लैब जांच नागरिक अस्पताल में की जाती हैं। इनमें बड़ी संख्या सीबीसी जांच की होती हैं। दो मशीने बंद होने से एक ही मशीन पर पूरा दबाव आ गया है और रिपोर्ट मिलने में पहले की तुलना में तीन गुना तक अधिक समय लग रहा है।
विज्ञापन


अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के परिजन अशोक, सुषमा, पवन व सुमित का कहना है कि पहले सीबीसी रिपोर्ट आधे घंटे में मिल जाती थी। अब दो तक इंतजार करना पड़ता है। खासकर ओपीडी और इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को ज्यादा परेशानी हो रही है। चिकित्सक बिना रिपोर्ट के इलाज शुरू नहीं कर पाते। कुछ मरीज जांच के लिए निजी लैब का सहारा लेने को मजबूर हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिले में 26 सीबीसी मशीन, कई अस्पतालों में रीजेंट की किल्लत
जिलेभर में कुल 26 सीबीसी मशीनें सरकारी अस्पतालों में स्थापित हैं। इनमें से केवल तीन से चार स्थानों पर ही रीजेंट उपलब्ध है जबकि शेष अस्पतालों में रीजेंट की किल्लत बनी हुई है। इसका सीधा असर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपमंडल अस्पतालों पर भी पड़ा है।

तीन में से दो मशीन बिना रीजेंट के बंद
मेडोनिक कंपनी की सीबीसी मशीनों के लिए रीजेंट सप्लाई की जाती है। मांग के बावजूद समय पर नहीं पहुंचाया जा रहा। नागरिक अस्पताल में तीन में से दो मशीन बिना रीजेंट के बंद है। एक मशीन को ही तीनों मशीनों का काम करना पड़ रहा है। अगर इसमें कोई फाल्ट हो जाए तो जांच पूरी तरह से बंद हो जाएगी। कुछ अस्पतालों में नाममात्र का स्टॉक बचा है। इससे मशीनें लगातार नहीं चलाई जा सकतीं।



प्रतिदिन 1600 से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है
नागरिक अस्पताल में औसतन ओपीडी 1600 से अधिक मरीजों की होती है। जांच के दौरान एक मरीज के कई तरह के टेस्ट चिकित्सक लिखते हैं। कई बार तो एक ही मरीज के पांच से सात तरह के सैंपल लगते हैं। इस कारण जांच रिपोर्ट की संख्या बढ़ती है। इसमें एक मशीन पर ज्यादा दबाव होने के कारण समय ज्यादा लगता है। सबसे ज्यादा असर गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है, जिनकी नियमित रूप से ब्लड जांच होती है। निजी लैब में इन जांच का खर्च सामान्य 300 रुपये तक हो रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन गया है।


वर्जन
नागरिक अस्पताल में मरीजों की जांच हो रही है। एक मशीन के प्रिंटर की दिक्कत थी। वह उपलब्ध करवा दिया गया है। इसके अलावा अगर कहीं पर रीजेंट की कमी है तो उच्च अधिकारियों को अवगत करवा कर रीजेंट मंगवाया जाएगा। -डॉ. रघुवीर पूनिया, पीएमओ नागरिक अस्पताल जींद।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article