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Jind News: नरवाना नगर परिषद कार्यालय दो हिस्सों में बंटा, जनता परेशान, पार्षद ने उठाए सवाल
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फोटो 4 नरवाना। पार्षद आशुतोष शर्मा।
नरवाना। नगर परिषद कार्यालय के दो अलग-अलग स्थानों पर संचालित होने से शहरवासियों को परेशानी हो रही है। जिला विकास, समन्वय एवं निगरानी समिति के सदस्य आशुतोष शर्मा ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कार्यालय को एक ही स्थान पर शिफ्ट करने की मांग की है।
पार्षद आशुतोष शर्मा ने बताया कि नई इमारत बनाने के उद्देश्य से मौजूदा कार्यालय को एलआईसी रोड स्थित कम्युनिटी सेंटर में अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया जाना था। इसके लिए मार्च 2025 के आसपास 32 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था।
जून 2026 के आसपास अस्थायी कार्यालय में हवन और मुहूर्त भी किया गया। इसके बावजूद कार्यालय का आधा हिस्सा ही नई जगह स्थानांतरित हुआ है। पुरानी इमारत में भी कार्यालय का एक हिस्सा अभी भी संचालित हो रहा है।
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अस्थायी कार्यालय के लिए 15 लाख रुपये की अतिरिक्त लागत से 10 एसी, पांच इन्वर्टर सेट और दो मोबाइल शौचालय मंगवाए गए। इस तरह कुल करीब 47 लाख रुपये खर्च हुए लेकिन व्यवस्था सुचारु नहीं हो पाई। आशुतोष शर्मा ने आरोप लगाया कि नई मुख्य इमारत के लिए अभी तक एस्टीमेट तैयार नहीं हुआ है। इसकी जगह भी तय नहीं की गई है। दोनों कार्यालयों के बीच चक्कर लगाने से आमजन को परेशानी हो रही है।
पार्षद आशुतोष शर्मा ने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी भी इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। जनता के कर के करीब 47 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी नगर परिषद की व्यवस्था ठीक नहीं हुई है। उन्होंने अधिकारियों से जनता की परेशानी को गंभीरता से लेने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कार्यालय एक जगह स्थानांतरित नहीं हुआ तो वे पार्षदों को साथ लेकर अनशन करेंगे।
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पार्षद आशुतोष शर्मा ने बताया कि नई इमारत बनाने के उद्देश्य से मौजूदा कार्यालय को एलआईसी रोड स्थित कम्युनिटी सेंटर में अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया जाना था। इसके लिए मार्च 2025 के आसपास 32 लाख रुपये का टेंडर जारी किया गया था।
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जून 2026 के आसपास अस्थायी कार्यालय में हवन और मुहूर्त भी किया गया। इसके बावजूद कार्यालय का आधा हिस्सा ही नई जगह स्थानांतरित हुआ है। पुरानी इमारत में भी कार्यालय का एक हिस्सा अभी भी संचालित हो रहा है।
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अस्थायी कार्यालय के लिए 15 लाख रुपये की अतिरिक्त लागत से 10 एसी, पांच इन्वर्टर सेट और दो मोबाइल शौचालय मंगवाए गए। इस तरह कुल करीब 47 लाख रुपये खर्च हुए लेकिन व्यवस्था सुचारु नहीं हो पाई। आशुतोष शर्मा ने आरोप लगाया कि नई मुख्य इमारत के लिए अभी तक एस्टीमेट तैयार नहीं हुआ है। इसकी जगह भी तय नहीं की गई है। दोनों कार्यालयों के बीच चक्कर लगाने से आमजन को परेशानी हो रही है।
पार्षद आशुतोष शर्मा ने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी भी इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। जनता के कर के करीब 47 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी नगर परिषद की व्यवस्था ठीक नहीं हुई है। उन्होंने अधिकारियों से जनता की परेशानी को गंभीरता से लेने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कार्यालय एक जगह स्थानांतरित नहीं हुआ तो वे पार्षदों को साथ लेकर अनशन करेंगे।