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Jind News: नप का बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान नहीं हो रहा कारगर
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22जेएनडी35: शहर की मुख्य सड़क मार्ग के किनारे पर कूड़े के ढेर में मुंह मारते गोंवश। संवाद
जींद। शहर की सड़कों पर घूमते आवारा गोवंश लगातार लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। मुख्य मार्गों से लेकर कॉलोनियों तक बेसहारा गोवंश के झुंड खुले में घूमते दिखाई दे रहे हैं। इससे यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। नगर परिषद द्वारा चलाया जा रहा पशु पकड़ने का अभियान फिलहाल प्रभावी साबित नहीं हो रहा।
इसके कारण शहरवासियों में रोष है। रात ही नहीं बल्कि दिन के समय भी कई जगह गोवंश सड़क किनारे बैठ जाते हैं। इससे वाहन चालकों को निकलने में दिक्कत होती है लेकिन सबसे ज्यादा खतरा रात के समय रहता है। जब सड़कों पर पर्याप्त रोशनी न होने और गोवंश के बीच सड़क पर आ जाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
कई वाहन चालक रात के समय अचानक सामने आए पशुओं से टकराते बचते हैं। बाजार में भी गोवंश दुकानों के बाहर जमा हो जाते हैं। इससे न केवल यातायात बाधित होता है बल्कि कई बार दुकानदारी भी प्रभावित होती है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर परिषद को शिकायतें दी हैं लेकिन स्थिति में बहुत अधिक सुधार नहीं हो पाया।
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नगर परिषद पिछले कई माह से पशु पकड़ने की मुहिम लगातार चला रही है लेकिन इसके बावजूद भी सड़कों से बेसहारा गोवंश नहीं हट रहे। शहर में बेसहारा पशुओं की बढ़ती संख्या दुर्घटनाओं के साथ–साथ स्वच्छता व्यवस्था को भी प्रभावित कर रही है। गोवंश खुले में कूड़े के ढेरों के पास घूमते रहते हैं।
इससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी पैदा होता है। नगर परिषद को इस समस्या के समाधान के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए और नियमित निगरानी बढ़ानी चाहिए। साथ ही, रात के समय दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अंधेरे इलाकों में स्ट्रीट लाइटों की समस्या भी दूर की जानी चाहिए।
शहर की सड़कों से लगातार बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ा जा रहा है। इसके लिए नप के कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं। शहर के जिन मार्गों पर इन पशुओं की संख्या ज्यादा है। वहां पर प्राथमिकता से काम किया जा रहा है।-डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद जींद
संवाद
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इसके कारण शहरवासियों में रोष है। रात ही नहीं बल्कि दिन के समय भी कई जगह गोवंश सड़क किनारे बैठ जाते हैं। इससे वाहन चालकों को निकलने में दिक्कत होती है लेकिन सबसे ज्यादा खतरा रात के समय रहता है। जब सड़कों पर पर्याप्त रोशनी न होने और गोवंश के बीच सड़क पर आ जाने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
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कई वाहन चालक रात के समय अचानक सामने आए पशुओं से टकराते बचते हैं। बाजार में भी गोवंश दुकानों के बाहर जमा हो जाते हैं। इससे न केवल यातायात बाधित होता है बल्कि कई बार दुकानदारी भी प्रभावित होती है। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर परिषद को शिकायतें दी हैं लेकिन स्थिति में बहुत अधिक सुधार नहीं हो पाया।
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नगर परिषद पिछले कई माह से पशु पकड़ने की मुहिम लगातार चला रही है लेकिन इसके बावजूद भी सड़कों से बेसहारा गोवंश नहीं हट रहे। शहर में बेसहारा पशुओं की बढ़ती संख्या दुर्घटनाओं के साथ–साथ स्वच्छता व्यवस्था को भी प्रभावित कर रही है। गोवंश खुले में कूड़े के ढेरों के पास घूमते रहते हैं।
इससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी पैदा होता है। नगर परिषद को इस समस्या के समाधान के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए और नियमित निगरानी बढ़ानी चाहिए। साथ ही, रात के समय दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अंधेरे इलाकों में स्ट्रीट लाइटों की समस्या भी दूर की जानी चाहिए।
शहर की सड़कों से लगातार बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ा जा रहा है। इसके लिए नप के कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं। शहर के जिन मार्गों पर इन पशुओं की संख्या ज्यादा है। वहां पर प्राथमिकता से काम किया जा रहा है।-डॉ. अनुराधा सैनी, चेयरपर्सन नगर परिषद जींद
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