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किसान आंदोलन में पूनिया खाप के गांव से जाएंगे दस-दस किसान
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महापंचायत को संबोधित करते राष्ट्रीय प्रवक्ता जितेंद्र पूनिया। संवाद।
- फोटो : Jind
राष्ट्रीय सर्व जातीय पूनिया खाप के बैनर तले पूनिया खाप की महापंचायत रविवार को जाट धर्मशाला में हुई। महापंचायत में पंजाब, राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, उत्तराखंड से आए खाप के लोगों ने भाग लिया। महापंचायत में पूनिया खाप ने प्रस्ताव पास करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द तीनों कृषि कानूनों को वापस ले। सभी फसलों के लिए एमएसपी लिखित में दे। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू किया जाए। किसानों के कर्ज तत्काल माफ किए जाएं व केंद्र सरकार निजीकरण की प्रथा को बंद करे। महापंचायत में फैसला लिया गया कि जब तक किसान आंदोलन चलेगा पूनिया खाप के प्रत्येक गांव से दस-दस लोग इसमें भाग लेंगे। हर गांव से एक ट्रैक्टर जरूर जाएगा। आंदोलन कर रहे किसानों की हरसंभव मदद की जाएगी। महापंचायत की अध्यक्षता पूर्व विधायक सूबे सिंह पूनिया ने की।
राष्ट्रीय अध्यक्ष राजस्थान के भलेराम पूनिया ने कहा कि प्रतिदिन किसान दिल्ली बॉर्डर पर और उनके बेटे देश की सीमा की रक्षा करते हुए शहीद हो रहे हैं। देश में चल रहे शांतिपूर्वक किसान आंदोलन का पूनिया खाप पूरा समर्थन करती है। यह आंदोलन चाहे पांच साल चले पूनिया खाप अब पीछे नहीं हटेगी। पूनिया खाप का कोई भी गांव देश के किसी भी कोने में हो, उस गांव से दस-दस किसान आंदोलन में भाग लेंगे। प्रत्येक गांव से एक-एक ट्रैक्टर दिल्ली जाएगा।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने किसानों से स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था। सरकार अपना यह वादा पूरा करे। आज किसान कर्ज के बोझ तले दब चुका है, इसलिए सरकार को किसानों का कर्ज माफ करना चाहिए। उत्तराखंड के प्रधान वीरेंद्र सिंह ने कहा कि आज किसान अपनी जमीन बचाने के लिए आंदोलन कर रहा हैं, लेकिन सरकार पूंजीपतियों को यह जमीन बेचना चाहती है। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए इन कानूनों को रद्द करवाना होगा। महापंचायत को राष्ट्रीय प्रवक्ता जितेंद्र पूनिया, जिला प्रधान कृष्ण पूनिया, हिसार के प्रधान नरेश पूनिया, कैथल के प्रधान मान सिंह पूनिया, दादरी के प्रधान सुरेंद्र पूनिया, पंजाब के प्रधान अमन पूनिया, राजस्थान से अंग्रेज सिंह, उत्तरप्रदेश से वजीर सिंह, सोनी पूनिया ने भी महापंचायत को संबोधित किया।
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किसानों की गर्दन पूंजीपतियों के हाथ में सौंप रही सरकार
हिसार के प्रधान नरेश पूनिया ने कहा कि सरकार नए कृषि कानूनों द्वारा किसानों की गर्दन को पूंजीपतियों के हाथों में सौंप रही है। आज किसान अपनी जमीन, अपना मान-सम्मान तथा वजूद बचाने के लिए शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहा है। जिस प्रकार से दिल्ली बॉर्डर पर कीलें गाड़ी गई हैं, उससे साफ है कि केंद्र सरकार ने अब गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। यदि इस समय भी किसान एकजुट नहीं हुआ तो कभी कोई भी आंदोलन भविष्य में नहीं हो सकेगा। अब यह आंदोलन जनांदोलन बन चुका है।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष राजस्थान के भलेराम पूनिया ने कहा कि प्रतिदिन किसान दिल्ली बॉर्डर पर और उनके बेटे देश की सीमा की रक्षा करते हुए शहीद हो रहे हैं। देश में चल रहे शांतिपूर्वक किसान आंदोलन का पूनिया खाप पूरा समर्थन करती है। यह आंदोलन चाहे पांच साल चले पूनिया खाप अब पीछे नहीं हटेगी। पूनिया खाप का कोई भी गांव देश के किसी भी कोने में हो, उस गांव से दस-दस किसान आंदोलन में भाग लेंगे। प्रत्येक गांव से एक-एक ट्रैक्टर दिल्ली जाएगा।
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उन्होंने कहा कि भाजपा ने किसानों से स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था। सरकार अपना यह वादा पूरा करे। आज किसान कर्ज के बोझ तले दब चुका है, इसलिए सरकार को किसानों का कर्ज माफ करना चाहिए। उत्तराखंड के प्रधान वीरेंद्र सिंह ने कहा कि आज किसान अपनी जमीन बचाने के लिए आंदोलन कर रहा हैं, लेकिन सरकार पूंजीपतियों को यह जमीन बेचना चाहती है। हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए इन कानूनों को रद्द करवाना होगा। महापंचायत को राष्ट्रीय प्रवक्ता जितेंद्र पूनिया, जिला प्रधान कृष्ण पूनिया, हिसार के प्रधान नरेश पूनिया, कैथल के प्रधान मान सिंह पूनिया, दादरी के प्रधान सुरेंद्र पूनिया, पंजाब के प्रधान अमन पूनिया, राजस्थान से अंग्रेज सिंह, उत्तरप्रदेश से वजीर सिंह, सोनी पूनिया ने भी महापंचायत को संबोधित किया।
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किसानों की गर्दन पूंजीपतियों के हाथ में सौंप रही सरकार
हिसार के प्रधान नरेश पूनिया ने कहा कि सरकार नए कृषि कानूनों द्वारा किसानों की गर्दन को पूंजीपतियों के हाथों में सौंप रही है। आज किसान अपनी जमीन, अपना मान-सम्मान तथा वजूद बचाने के लिए शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहा है। जिस प्रकार से दिल्ली बॉर्डर पर कीलें गाड़ी गई हैं, उससे साफ है कि केंद्र सरकार ने अब गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। यदि इस समय भी किसान एकजुट नहीं हुआ तो कभी कोई भी आंदोलन भविष्य में नहीं हो सकेगा। अब यह आंदोलन जनांदोलन बन चुका है।