{"_id":"58810daa4f1c1b4216efe6c7","slug":"suspend-two-official-jind-susaite-jind","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएफएससी और जुलाना के तत्कालीन थाना प्रभारी निलंबित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीएफएससी और जुलाना के तत्कालीन थाना प्रभारी निलंबित
jind
Updated Fri, 20 Jan 2017 12:34 AM IST
विज्ञापन
नागरिक अस्पताल में धरने पर बैठे मृतक के परिजन।
- फोटो : bureau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कॉन्फेड के सेवानिवृत्त स्टोर कीपर ईश्वर की आत्महत्या के मामले में आरोपी अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर दूसरे दिन भी परिजन नागरिक अस्पताल में धरने पर बैठे रहे। धरने पर बैठे परिजनों का कहना है कि जब तक मामले में आरोपी डीएफएससी अशोक रावत, जुलाना के तत्कालीन थाना प्रभारी रामनिवास और कॉन्फेड ठेकेदार राकेश कुमार की गिरफ्तारी नहीं होती वह शव को नागरिक अस्पताल से नहीं उठाएंगे। वहीं वीरवार को जेएनयू छात्र संघ के छात्र धरना स्थल पर पहुंचे और धरने का समर्थन किया। दोपहर बाद डीसी विनय सिंह और एसएसपी शशांक आनंद धरना स्थल पर पहुंचे। जहां पर दोनों ही अधिकारियों ने आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी करने और परिजनों की मर्जी के मुताबिक किसी भी एजेंसी से जांच करवाने का आश्वासन दिया। लेकिन मृतक के परिजन इस बात पर अड़े रहे कि जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की जाती है वह शव को नहीं उठाएंगे और उनका धरना जारी रहेगा। परिजनों से बातचीत के बाद डीसी विनय सिंह ने डीएफएससी अशोक रावत को व एसएसपी शशांक आनंद ने जुलाना थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी रामनिवास सिंह को सस्पेंड करने के आदेश जारी कर दिए। रात को भी कड़कड़ाती ठंड के बीच धरने पर बैठे परिजनों ने कहा कि स्टोर कीपर ईश्वर सिंह को साजिश के तहत झूठे मुकदमें में फंसाया गया और उसे आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया है। मृतक के भतीजे और शिकायतकर्ता दिनेश ने कहा कि उसके चाचा ईश्वर सिंह के साथ हुई घटनाक्रम की वह शुरुआत से अंत तक जानता है। डीएफएससी अशोक रावत व ठेकेदार अशोक कुमार ने अपनी फर्जीवाड़े को दबाने के लिए ईश्वर सिंह पर मुकदमा दर्ज करवाया और उसे81 दिन तक जेल में रहना पड़ा। इस मामले में जुलाना के तत्कालीन थाना प्रभारी राम निवास ने डीएफएससी अशोक रावत से रिश्वत लेकर दोनों को ही बाहर निकाल दिया और उसके चाचा के ऊपर सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आए गेहूं के दो ट्रकों को बाहर भेजने के झूठे आरोप लगाकर फंसाया। इसलिए जब तक डीएफएससी अशोक रावत, जुलाना थाने के तत्कालीन प्रभारी रामनिवास व ठेकेदार राकेश कुमार की गिरफ्तारी तक वह शव को नहीं उठाएंगे और उनका धरना जारी रहेगा। डीसी विनय सिंह ने बताया कि आत्महत्या के मामले के आरोपी डीएफएससी अशोक रावत और जुलाना थाने के तत्कालीन प्रभारी रामनिवास को सस्पेंड कर दिया है। परिजनों को आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है, लेकिन परिजन फिलहाल मानने को तैयार नहीं है। आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के पुलिस को आदेश दिए गए हैं।
पुलिस को उखाड़ने पड़ेंगे तीन माह पुराने गड़े मुर्दे
अर्बन एस्टेट निवासी सेवानिवृत्त स्टोर कीपर ईश्वर सिंह पर जिस मामले में फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं उसकी पुलिस दोबारा से जांच करवाने के लिए तैयार हो गई है। परिजनों द्वारा मामले के जांच अधिकारी एसआई रामनिवास पर सवाल उठाने पर एसएसपी शशांक आनंद ने परिजनों के बीच में पहुंचकर आश्वासन दिया कि ईश्वर सिंह पर जो आरोप लगे हैं उनकी दोबारा से जांच करवा दी जाएगी। फिलहाल उनका मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए कोर्ट में पुलिस अर्जी लगाकर दोबारा से इस मामले में स्पेशल जांच की डिमांड कर लेगी। अगर परिजनों को स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है तो वह जिस भी अधिकारी व एजेंसी से जांच की डिमांड करेंगे उसकी जांच के लिए तैयार हैं। चाहे तो परिजन इस मामले की जांच स्टेट क्राइम ब्रांच से करवा सकते हैं, लेकिन परिवार के लोगों ने कहा कि जिस मामले में मिली भगत करके स्टोर कीपर ईश्वर सिंह को आरोप बनाया गया है उसकी जांच निष्पक्षता से जांच करवाई दी जाए।
यह है मामला
जुलाना थाने में 30 सितंबर 2016 को दर्ज हुई एफआईआर के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि वेयर हाउस जुलाना से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दो गेहूं से भरे ट्रक निकले हैं और उनकी गलत बिल्टी काट कर रोहतक की तरफ भेजा गया है। गेहूं गांव लखमीरवाला, निर्जन, लोहचब, बरसाना व दालमवाला के राशन डिपो में 570 गेहूं के कट्टे जाने थे। तत्कालीन जुलाना थाना प्रभारी रामनिवास ने सूचना के आधार पर गेहूं से भरे दो ट्रकों को काबू कर लिया था। इसमें एक ट्रक से 310 गेहूं के कट्टे व दूसरे ट्रक से 260 गेहूं के कट्टे बरामद किए हैं। इसमें पुलिस ने वेयर हाउस जुलाना में कार्यरत स्टोर कीपर ईश्वर सिंह, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक कश्मीरी व ठेकेदार राकेश कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी स्टोर कीपर ईश्वर सिंह, निरीक्षक कश्मीरी व ठेकेदार राकेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में आरोपी स्टोर कीपर ईश्वर सिंह को लगभग एक माह पहले जेल से जमानत में मिल गई थी। इसी मामले में ईश्वर सिंह ने सुसाइड नोट लिखकर डीएफएससी अशोक रावत, जुलाना थाना प्रभारी रामनिवास और ठेकेदार राकेश कुमार पर साजिश के तहत फंसाने के आरोप लगाकर आत्महत्या कर ली है।
विज्ञापन
चाचा जानते थे, प्रभावशाली लोगों से लड़ नहीं पाएंगे इसलिए की आत्महत्या’
कॉन्फेड के स्टोर कीपर द्वारा आत्महत्या करने के बाद पीड़ित पक्ष और प्रशासन के बीच नागरिक अस्पताल के ट्रेनिंग सेंटर में करीब 40 मिनट बातचीत हुई, लेकिन परिजन शव उठाने पर सहमत नहीं हुए। अब यह मामला प्रशासन के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। इस दौरान मृतक ईश्वर सिंह के भतीजे दिनेश ने कहा, उसके चाचा महीने में दो-तीन बार अपने गांव खापड़ा जाते थे, लेकिन जेल से आने के बाद वे एक दिन भी गांव नहीं गए। इस मामले में झूठे फंसाए जाने के बाद वे बहुत परेशान रहते थे। जमानत पर रिहा होने के बावजूद उन्हें लगता था कि डीएफएससी आशोक रावत और पूर्व थाना प्रभारी रामनिवास से वे लड़ नहीं पाएंगे, इसी डर से उन्होंने आत्महत्या की है। सुसाइड नोट का मजमून भी यही बता कर रहा है।
बातचीत में हुए सवाल जवाब
सवाल: बसपा नेता कर्मबीर सैनी ने डीसी से कहा कि सर अशोक रावत काबू नहीं आएगा। उसकी बहुत पहुंच है। उसे जल्दी गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
जवाब: डीसी विनय सिंह ने कहा कि किसी भी आरोपी को छोड़ नहीं जाएगा और कानून से कोई नहीं बच सकता। इसकी चिंता मत करो।
सवाल: बातचीत में शामिल अनिल नामक व्यक्ति ने कहा कि अब तक पुलिस ने क्या किया है। प्रशासन सिर्फ मैनेज करने का प्रयास कर रहा है।
जवाब: इस पर एसएसपी शशांक आनंद ने कहा कि शिकायतकर्ता और मृतक के भतीजे दिनेश के मैजिस्ट्रेट के समक्ष बयान पुलिस करवाएगी। इससे केस मजबूत होगा।
सवाल: शिकायतकर्ता दिनेश ने कहा कि उसके चाचा ने अधिकारियों से परेशान होकर आत्महत्या की है। गेहूं के मामले में पकड़े जाने पर एक इमानदार व्यक्ति पर क्या बीत रही होगी। उसको न्याय नहीं मिला तो भगवान को क्या जवाब देंगे।
जवाब: डीसी विनय सिंह ने कहा कि वे भी न्याय के पक्ष में हैं। जिस भी अधिकारी या एजेंसी से वे चाहते हैं, उससे जांच करवाई जा सकती है।
पिता को एफआईआर के साथ ही गिरफ्तार किया
बातचीत के दौरान मृतक ईश्वर सिंह का बेटा दीपक भी शामिल रहा। दीपक ने कहा कि यह मामला 29 सितंबर को हुआ। उसी दिन एफआईआर भी हुई और उसके पिता को गिरफ्तार भी कर लिया गया। बेकसूर होते हुए भी उनकी जमानत करवाने में उन्हें तीन महीने लग गए। अब दोषियों को साथ ही गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा।
दसरे के टेंडर में हो रहा था ट्रांसपोर्ट का काम
इस दौरान मृतक के भतीजे दिनेश ने गंभीर सवाल उठाए। दिनेश ने कहा कि हकीकत में ट्रांस्पोर्ट का ठेका जो आदमी चला रहा था, उसके नाम से ही नहीं था। उसके कागजात भी खाद्य एवं अधिकारी जांच करते हैं। यहां राकेश नामक व्यक्ति के नाम से टेंडर छुटा, लेकिन सुशील नामक व्यक्ति ट्रांसपोर्ट चल रहा था। दिनेश के अनुसार टेंडर लेने वाला राकेश इससे पहले झज्जर में ब्लैक लिस्ट हो चुका है। यह बस डीएफएससी की शह पर चल रहा था।
डीएफएससी की पहुंच का हवाला
इस दौरान बातचीत में पीड़ित पक्ष के लोगों ने कहा कि डीएफएसी अशोक रावत बड़ी पहुंच वाले व्यक्ति हैं। इन लोगों ने कहा कि अशोक रावत का जींद से तबादला भी हो गया था, लेकिन उन्होंने अपने प्रभाव का प्रयोग इसे रुकवा लिया। गौरतलब है कि अशोक रावत के पिता विधायक रह चुके हैं। एक राजनीतिक दल से इनकी काफी नजदीकियां बताई जाती हैं।
देश भर में गूंजेगी आवाज : नरवाल
इस दौरान जेएनयू के छात्र प्रदीप नरवाल ने कहा कि देश भर में दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। ईश्वर सिंह की मौत का मामला भी देश भर में गूंजेगा। इसको लेकर महाराष्ट्र, हैदराबाद और कई अन्य राज्यों के लोगों से बात हुई है। इसके विरोध में शुक्रवार या शनिवार को दिल्ली में हरियाणा भवन पर भी प्रदर्शन किया जाएगा।
विज्ञापन
पुलिस को उखाड़ने पड़ेंगे तीन माह पुराने गड़े मुर्दे
अर्बन एस्टेट निवासी सेवानिवृत्त स्टोर कीपर ईश्वर सिंह पर जिस मामले में फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं उसकी पुलिस दोबारा से जांच करवाने के लिए तैयार हो गई है। परिजनों द्वारा मामले के जांच अधिकारी एसआई रामनिवास पर सवाल उठाने पर एसएसपी शशांक आनंद ने परिजनों के बीच में पहुंचकर आश्वासन दिया कि ईश्वर सिंह पर जो आरोप लगे हैं उनकी दोबारा से जांच करवा दी जाएगी। फिलहाल उनका मामला कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए कोर्ट में पुलिस अर्जी लगाकर दोबारा से इस मामले में स्पेशल जांच की डिमांड कर लेगी। अगर परिजनों को स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं है तो वह जिस भी अधिकारी व एजेंसी से जांच की डिमांड करेंगे उसकी जांच के लिए तैयार हैं। चाहे तो परिजन इस मामले की जांच स्टेट क्राइम ब्रांच से करवा सकते हैं, लेकिन परिवार के लोगों ने कहा कि जिस मामले में मिली भगत करके स्टोर कीपर ईश्वर सिंह को आरोप बनाया गया है उसकी जांच निष्पक्षता से जांच करवाई दी जाए।
विज्ञापन
यह है मामला
जुलाना थाने में 30 सितंबर 2016 को दर्ज हुई एफआईआर के अनुसार पुलिस को सूचना मिली थी कि वेयर हाउस जुलाना से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दो गेहूं से भरे ट्रक निकले हैं और उनकी गलत बिल्टी काट कर रोहतक की तरफ भेजा गया है। गेहूं गांव लखमीरवाला, निर्जन, लोहचब, बरसाना व दालमवाला के राशन डिपो में 570 गेहूं के कट्टे जाने थे। तत्कालीन जुलाना थाना प्रभारी रामनिवास ने सूचना के आधार पर गेहूं से भरे दो ट्रकों को काबू कर लिया था। इसमें एक ट्रक से 310 गेहूं के कट्टे व दूसरे ट्रक से 260 गेहूं के कट्टे बरामद किए हैं। इसमें पुलिस ने वेयर हाउस जुलाना में कार्यरत स्टोर कीपर ईश्वर सिंह, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक कश्मीरी व ठेकेदार राकेश कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी स्टोर कीपर ईश्वर सिंह, निरीक्षक कश्मीरी व ठेकेदार राकेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में आरोपी स्टोर कीपर ईश्वर सिंह को लगभग एक माह पहले जेल से जमानत में मिल गई थी। इसी मामले में ईश्वर सिंह ने सुसाइड नोट लिखकर डीएफएससी अशोक रावत, जुलाना थाना प्रभारी रामनिवास और ठेकेदार राकेश कुमार पर साजिश के तहत फंसाने के आरोप लगाकर आत्महत्या कर ली है।
विज्ञापन
चाचा जानते थे, प्रभावशाली लोगों से लड़ नहीं पाएंगे इसलिए की आत्महत्या’
कॉन्फेड के स्टोर कीपर द्वारा आत्महत्या करने के बाद पीड़ित पक्ष और प्रशासन के बीच नागरिक अस्पताल के ट्रेनिंग सेंटर में करीब 40 मिनट बातचीत हुई, लेकिन परिजन शव उठाने पर सहमत नहीं हुए। अब यह मामला प्रशासन के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। इस दौरान मृतक ईश्वर सिंह के भतीजे दिनेश ने कहा, उसके चाचा महीने में दो-तीन बार अपने गांव खापड़ा जाते थे, लेकिन जेल से आने के बाद वे एक दिन भी गांव नहीं गए। इस मामले में झूठे फंसाए जाने के बाद वे बहुत परेशान रहते थे। जमानत पर रिहा होने के बावजूद उन्हें लगता था कि डीएफएससी आशोक रावत और पूर्व थाना प्रभारी रामनिवास से वे लड़ नहीं पाएंगे, इसी डर से उन्होंने आत्महत्या की है। सुसाइड नोट का मजमून भी यही बता कर रहा है।
बातचीत में हुए सवाल जवाब
सवाल: बसपा नेता कर्मबीर सैनी ने डीसी से कहा कि सर अशोक रावत काबू नहीं आएगा। उसकी बहुत पहुंच है। उसे जल्दी गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
जवाब: डीसी विनय सिंह ने कहा कि किसी भी आरोपी को छोड़ नहीं जाएगा और कानून से कोई नहीं बच सकता। इसकी चिंता मत करो।
सवाल: बातचीत में शामिल अनिल नामक व्यक्ति ने कहा कि अब तक पुलिस ने क्या किया है। प्रशासन सिर्फ मैनेज करने का प्रयास कर रहा है।
जवाब: इस पर एसएसपी शशांक आनंद ने कहा कि शिकायतकर्ता और मृतक के भतीजे दिनेश के मैजिस्ट्रेट के समक्ष बयान पुलिस करवाएगी। इससे केस मजबूत होगा।
सवाल: शिकायतकर्ता दिनेश ने कहा कि उसके चाचा ने अधिकारियों से परेशान होकर आत्महत्या की है। गेहूं के मामले में पकड़े जाने पर एक इमानदार व्यक्ति पर क्या बीत रही होगी। उसको न्याय नहीं मिला तो भगवान को क्या जवाब देंगे।
जवाब: डीसी विनय सिंह ने कहा कि वे भी न्याय के पक्ष में हैं। जिस भी अधिकारी या एजेंसी से वे चाहते हैं, उससे जांच करवाई जा सकती है।
पिता को एफआईआर के साथ ही गिरफ्तार किया
बातचीत के दौरान मृतक ईश्वर सिंह का बेटा दीपक भी शामिल रहा। दीपक ने कहा कि यह मामला 29 सितंबर को हुआ। उसी दिन एफआईआर भी हुई और उसके पिता को गिरफ्तार भी कर लिया गया। बेकसूर होते हुए भी उनकी जमानत करवाने में उन्हें तीन महीने लग गए। अब दोषियों को साथ ही गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा।
दसरे के टेंडर में हो रहा था ट्रांसपोर्ट का काम
इस दौरान मृतक के भतीजे दिनेश ने गंभीर सवाल उठाए। दिनेश ने कहा कि हकीकत में ट्रांस्पोर्ट का ठेका जो आदमी चला रहा था, उसके नाम से ही नहीं था। उसके कागजात भी खाद्य एवं अधिकारी जांच करते हैं। यहां राकेश नामक व्यक्ति के नाम से टेंडर छुटा, लेकिन सुशील नामक व्यक्ति ट्रांसपोर्ट चल रहा था। दिनेश के अनुसार टेंडर लेने वाला राकेश इससे पहले झज्जर में ब्लैक लिस्ट हो चुका है। यह बस डीएफएससी की शह पर चल रहा था।
डीएफएससी की पहुंच का हवाला
इस दौरान बातचीत में पीड़ित पक्ष के लोगों ने कहा कि डीएफएसी अशोक रावत बड़ी पहुंच वाले व्यक्ति हैं। इन लोगों ने कहा कि अशोक रावत का जींद से तबादला भी हो गया था, लेकिन उन्होंने अपने प्रभाव का प्रयोग इसे रुकवा लिया। गौरतलब है कि अशोक रावत के पिता विधायक रह चुके हैं। एक राजनीतिक दल से इनकी काफी नजदीकियां बताई जाती हैं।
देश भर में गूंजेगी आवाज : नरवाल
इस दौरान जेएनयू के छात्र प्रदीप नरवाल ने कहा कि देश भर में दलितों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। ईश्वर सिंह की मौत का मामला भी देश भर में गूंजेगा। इसको लेकर महाराष्ट्र, हैदराबाद और कई अन्य राज्यों के लोगों से बात हुई है। इसके विरोध में शुक्रवार या शनिवार को दिल्ली में हरियाणा भवन पर भी प्रदर्शन किया जाएगा।