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Jind News: सुरजेवाला ने मंडी सिस्टम पर लगाए घोटाले के आरोप, कहा- खेती संकट में
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23जेएनडी25: अनाजमंडी में पत्रकार वार्ता करते हुए राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला। संवाद
जींद। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने वीरवार को अनाज मंडी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए प्रदेश में खेती-किसानी व्यवस्था को संकटग्रस्त बताया। उन्होंने गेहूं और सरसों की खरीद में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।
सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से जिम्मेदारी तय करने और किसानों, आढ़तियों व मजदूरों के लिए राहत पैकेज घोषित करने की भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार 24 फसलों पर एमएसपी खरीद के बड़े दावे करती है लेकिन जमीनी स्तर पर किसान अपनी गेहूं बेचने और भुगतान लेने के लिए परेशान हैं।
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के चलते किसानों का पीला सोना ही उनके लिए मुसीबत बन गया है। खरीद, उठान और भुगतान की प्रक्रिया में देरी से किसान आर्थिक संकट झेल रहे हैं।
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25 लाख मीट्रिक टन गेहूं अब भी बिना खरीदे मंडी में पड़ा
आंकड़ों का हवाला देते हुए सुरजेवाला ने बताया कि प्रदेश की मंडियों में 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं पहुंच चुका है लेकिन करीब 55.81 लाख मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है। लगभग 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं अब भी बिना खरीदे मंडी में पड़ा है। खरीदी गई फसल का उठान भी धीमा है और बड़ी मात्रा में गेहूं खुले में पड़ा होने से खराब होने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि 7.70 लाख किसानों में से केवल 4.62 लाख की फसल खरीदी गई, जबकि लाखों किसान अभी भी इंतजार में हैं।
मंडी के हालात पर चिंता जताई
सुरजेवाला ने जींद जिले की मंडी के हालात पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल तक 8.51 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई। इसमें से केवल 6.6 लाख मीट्रिक टन की खरीद और 1.6 लाख मीट्रिक टन का उठान हुआ है। उन्होंने बायोमीट्रिक, सर्वर और अन्य शर्तों को किसानों के लिए बाधा बताते हुए इन्हें तुरंत हटाने की मांग की।
किसानों को 72 घंटे में भुगतान सुनिश्चित किया जाए
सुरजेवाला ने आढ़तियों की कमीशन दर घटाने और भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि किसानों को 72 घंटे में भुगतान सुनिश्चित किया जाए। आढ़तियों को 2.5 प्रतिशत आढ़त बहाल हो, मजदूरों की मजदूरी बढ़ाई जाए और खराब फसल का उचित मुआवजा दिया जाए। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
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सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से जिम्मेदारी तय करने और किसानों, आढ़तियों व मजदूरों के लिए राहत पैकेज घोषित करने की भी मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार 24 फसलों पर एमएसपी खरीद के बड़े दावे करती है लेकिन जमीनी स्तर पर किसान अपनी गेहूं बेचने और भुगतान लेने के लिए परेशान हैं।
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सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के चलते किसानों का पीला सोना ही उनके लिए मुसीबत बन गया है। खरीद, उठान और भुगतान की प्रक्रिया में देरी से किसान आर्थिक संकट झेल रहे हैं।
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25 लाख मीट्रिक टन गेहूं अब भी बिना खरीदे मंडी में पड़ा
आंकड़ों का हवाला देते हुए सुरजेवाला ने बताया कि प्रदेश की मंडियों में 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं पहुंच चुका है लेकिन करीब 55.81 लाख मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है। लगभग 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं अब भी बिना खरीदे मंडी में पड़ा है। खरीदी गई फसल का उठान भी धीमा है और बड़ी मात्रा में गेहूं खुले में पड़ा होने से खराब होने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि 7.70 लाख किसानों में से केवल 4.62 लाख की फसल खरीदी गई, जबकि लाखों किसान अभी भी इंतजार में हैं।
मंडी के हालात पर चिंता जताई
सुरजेवाला ने जींद जिले की मंडी के हालात पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल तक 8.51 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई। इसमें से केवल 6.6 लाख मीट्रिक टन की खरीद और 1.6 लाख मीट्रिक टन का उठान हुआ है। उन्होंने बायोमीट्रिक, सर्वर और अन्य शर्तों को किसानों के लिए बाधा बताते हुए इन्हें तुरंत हटाने की मांग की।
किसानों को 72 घंटे में भुगतान सुनिश्चित किया जाए
सुरजेवाला ने आढ़तियों की कमीशन दर घटाने और भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि किसानों को 72 घंटे में भुगतान सुनिश्चित किया जाए। आढ़तियों को 2.5 प्रतिशत आढ़त बहाल हो, मजदूरों की मजदूरी बढ़ाई जाए और खराब फसल का उचित मुआवजा दिया जाए। चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।