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Jind News: अब तो पराली भी नहीं जल रही, फिर भी एक्यूआई 341
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जींद। धान का सीजन खत्म हो चुका है और किसान गेहूं की बिजाई कर चुके हैं। अब कहीं भी पराली नहीं जल रही है। इसके बाद भी जिले में वायु प्रदूषण कम नहीं हो रहा है। रविवार को दिन में एक्यूआई 382 तक पहुंच गया था जो शाम पांच बजे गिरकर 341 तक पहुंच गया। सुबह स्मॉग के चलते दृश्यता भी दस मीटर के आसपास रही। इन दिनों वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण शादी समारोहों आतिशबाजी और टायर फैक्टरियों से निकला जहरीला धुआं है। इसके बाद भी ऐसी फैक्टरियों और आतिशबाजी पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
इस समय पराली जलाने के मामले बंद हो चुके हैं। दो सप्ताह से कृषि विभाग को पराली जलाने की कोई लोकेशन नहीं मिल रही है। इसके बाद भी एक्यूआई बहुत ज्यादा बढ़ चुका है। फिलहाल जींद प्रदूषित शहरों में शुमार है। पिछले एक सप्ताह से यहां का एक्यूआई काफी खतरनाक स्तर तक रह चुका है। पिछले वर्ष धान की फसल के अवशेष जलाने के 950 मामले सामने आए थे। इस बार यह 550 आए हैं। इस समय शादियों का सीजन चल रहा है। रातभर शहर में आतिशबाजी की जा रही है। इन पटाखों से निकलने वाला धुआं मौसम में आद्रता बढ़ने के कारण नीचे की तरफ ही आ जाता है जिससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है।
बॉक्स
धुआं उगलने वाली फैक्टरियों पर अंकुश नहीं
जिले में भिवानी रोड, रोहतक रोड, गोहाना रोड तथा ईक्कस गांव के पास टायर की फैक्टरियां हैं। इन फैक्टरियों में टायरों को जलाने से नुकसानदायक धुआं निकलता है जो वायु प्रदूषण को बढ़ा रहा है। आज तक इन फैक्टरियों पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा सका है। आसपास के लोगों ने शिकायत भी की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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वायु प्रदूषण से अस्थमा रोगियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा स्वस्थ व्यक्ति के शरीर पर भी वायु प्रदूषण का बहुत गहरा असर होता है। इस समय गले में खराश, खांसी व सांस लेने में परेशानी के मामले बढ़ रहे हैं।-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल
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एक सप्ताह का एक्यूआई
चार दिसंबर 341
तीन दिसंबर 323
दो दिसंबर 321
एक दिसंबर 315
30 नवंबर को 299
29 नवंबर को 310
28 नवंबर को 324
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इस समय पराली जलाने के मामले बंद हो चुके हैं। दो सप्ताह से कृषि विभाग को पराली जलाने की कोई लोकेशन नहीं मिल रही है। इसके बाद भी एक्यूआई बहुत ज्यादा बढ़ चुका है। फिलहाल जींद प्रदूषित शहरों में शुमार है। पिछले एक सप्ताह से यहां का एक्यूआई काफी खतरनाक स्तर तक रह चुका है। पिछले वर्ष धान की फसल के अवशेष जलाने के 950 मामले सामने आए थे। इस बार यह 550 आए हैं। इस समय शादियों का सीजन चल रहा है। रातभर शहर में आतिशबाजी की जा रही है। इन पटाखों से निकलने वाला धुआं मौसम में आद्रता बढ़ने के कारण नीचे की तरफ ही आ जाता है जिससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है।
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धुआं उगलने वाली फैक्टरियों पर अंकुश नहीं
जिले में भिवानी रोड, रोहतक रोड, गोहाना रोड तथा ईक्कस गांव के पास टायर की फैक्टरियां हैं। इन फैक्टरियों में टायरों को जलाने से नुकसानदायक धुआं निकलता है जो वायु प्रदूषण को बढ़ा रहा है। आज तक इन फैक्टरियों पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा सका है। आसपास के लोगों ने शिकायत भी की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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वायु प्रदूषण से अस्थमा रोगियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा स्वस्थ व्यक्ति के शरीर पर भी वायु प्रदूषण का बहुत गहरा असर होता है। इस समय गले में खराश, खांसी व सांस लेने में परेशानी के मामले बढ़ रहे हैं।-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल
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एक सप्ताह का एक्यूआई
चार दिसंबर 341
तीन दिसंबर 323
दो दिसंबर 321
एक दिसंबर 315
30 नवंबर को 299
29 नवंबर को 310
28 नवंबर को 324