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Jind News: साढ़े चार एकड़ में जली मिली पराली, पांच हजार रुपये जुर्माना
Thu, 12 Oct 2023 01:31 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 12 Oct 2023 01:31 AM IST
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खरकरामजी में पराली जलाने की सूचना पर पहुंचे एसडीएम और कृषि विभाग अधिकारी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जिला प्रशासन को सैटेलाइट से मंगलवार देर रात खरकरामजी गांव के खेतों में पराली जलाने की सूचना मिली। इस पर एसडीएम तुरंत कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे, जहां पर कई एकड़ की धान की पराली में आग लगी हुई थी। प्रशासन ने काफी हद तक आग को बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका।
एसडीएम ने मौके पर गांव के नंबरदार और सरपंच को मौके पर बुलाया, जहां उन्होंने खेत के मालिक के बारे में पूछताछ की। जांच करने पर पता चला कि किसान खरकरामजी गांव का सुभाष था। उसने ही अपनी चार एकड़, छह कनाल और 18 मरले जमीन में आग लगाई हुई थी। प्रशासन ने उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उन्होंने आगे के लिए भी सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि दोबारा पराली में आग लगाई तो कार्रवाई की जाएगी।
जिले में पराली जलाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जिला प्रशासन पराली न जलाने को लेकर लगातार जागरूक कर रहा है, लेकिन मामले कम नहीं हो रहे हैं। हालांकि मंगलवार को भी मुख्य सचिव हरियाणा ने प्रदेश के सभी डीसी को पराली जलाने पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे, क्योंकि इस बार पिछले साल के मुकाबले ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।
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अब तक 30 जगह जल चुकी पराली
जिले में अब तक 30 जगह पराली जलाने की घटनाएं हो चुकी हैं। यह घटनाएं पिछले 13 दिनों में ही हुई हैं। हालांकि पिछले साल धान के पूरे सीजन में केवल आठ मामले ही आए थे। अभी धान का कार्य 25 प्रतिशत ही हुआ है और 30 मामले आ चुके हैं। ब्लॉक अनुसार अलेवा, जींद और पिल्लूखेड़ा में एक-एक मामला आया है। सफीदों में पांच मामले, नरवाना में 10 और उचाना में 12 मामले आए हैं। खास बात यह है कि जुलाना ब्लॉक में अभी तक पराली जलाने का एक भी मामला नहीं आया है। अब तक किसानों द्वारा पराली जलाने पर प्रशासन 52 हजार 500 रुपये जुर्माना लगा चुका है। पूरे जिले में 29 एकड़ 19 कनाल 34 मरले में पराली जा चुकी है और 26 किसानों को नोटिस दिया जा चुका है।
यह भी जानिए...
बुधवार के जिले का एक्यूआई 92 रहा, जोकि मध्यम है। जैसे-जैसे एक्यूआई बढ़ता चला जाएगा तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता चला जाएग। 50 तक एक्यूआई अच्छा रहता है। उसके बाद एक्यूआई 50 से 100 तक मध्यम रहता है। उसके बाद 100 से 200 के बीच एक्यूआई स्वास्थ्य के लिए लाभदायक नहीं रहता। 200 से 300 तक एक्यूआई पहुंचने पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाता है। 300 से 400 तक पहुंचने पर ज्यादा हानिकारक होता है और 400 से ऊपर एक्यूआई खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है, जोकि स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह हो जाता है।
धान की पराली जलाना कानूनी रूप से अवैध है और यह स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। किसानों से आह्वान है कि वह पराली न जलाएं, बल्कि उसे बेचकर आमदनी का जरिया भी बनाए। यदि फिर भी कोई व्यक्ति पराली जलाता पाया गया तो उसको जुर्माना लगाया जाएगा।
-डॉ. पंकज सिंह, एसडीएम, जींद।
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जींद। जिला प्रशासन को सैटेलाइट से मंगलवार देर रात खरकरामजी गांव के खेतों में पराली जलाने की सूचना मिली। इस पर एसडीएम तुरंत कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे, जहां पर कई एकड़ की धान की पराली में आग लगी हुई थी। प्रशासन ने काफी हद तक आग को बुझाने की कोशिश की, लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका।
एसडीएम ने मौके पर गांव के नंबरदार और सरपंच को मौके पर बुलाया, जहां उन्होंने खेत के मालिक के बारे में पूछताछ की। जांच करने पर पता चला कि किसान खरकरामजी गांव का सुभाष था। उसने ही अपनी चार एकड़, छह कनाल और 18 मरले जमीन में आग लगाई हुई थी। प्रशासन ने उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उन्होंने आगे के लिए भी सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि दोबारा पराली में आग लगाई तो कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में पराली जलाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जिला प्रशासन पराली न जलाने को लेकर लगातार जागरूक कर रहा है, लेकिन मामले कम नहीं हो रहे हैं। हालांकि मंगलवार को भी मुख्य सचिव हरियाणा ने प्रदेश के सभी डीसी को पराली जलाने पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे, क्योंकि इस बार पिछले साल के मुकाबले ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं।
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अब तक 30 जगह जल चुकी पराली
जिले में अब तक 30 जगह पराली जलाने की घटनाएं हो चुकी हैं। यह घटनाएं पिछले 13 दिनों में ही हुई हैं। हालांकि पिछले साल धान के पूरे सीजन में केवल आठ मामले ही आए थे। अभी धान का कार्य 25 प्रतिशत ही हुआ है और 30 मामले आ चुके हैं। ब्लॉक अनुसार अलेवा, जींद और पिल्लूखेड़ा में एक-एक मामला आया है। सफीदों में पांच मामले, नरवाना में 10 और उचाना में 12 मामले आए हैं। खास बात यह है कि जुलाना ब्लॉक में अभी तक पराली जलाने का एक भी मामला नहीं आया है। अब तक किसानों द्वारा पराली जलाने पर प्रशासन 52 हजार 500 रुपये जुर्माना लगा चुका है। पूरे जिले में 29 एकड़ 19 कनाल 34 मरले में पराली जा चुकी है और 26 किसानों को नोटिस दिया जा चुका है।
यह भी जानिए...
बुधवार के जिले का एक्यूआई 92 रहा, जोकि मध्यम है। जैसे-जैसे एक्यूआई बढ़ता चला जाएगा तो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता चला जाएग। 50 तक एक्यूआई अच्छा रहता है। उसके बाद एक्यूआई 50 से 100 तक मध्यम रहता है। उसके बाद 100 से 200 के बीच एक्यूआई स्वास्थ्य के लिए लाभदायक नहीं रहता। 200 से 300 तक एक्यूआई पहुंचने पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाता है। 300 से 400 तक पहुंचने पर ज्यादा हानिकारक होता है और 400 से ऊपर एक्यूआई खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है, जोकि स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह हो जाता है।
धान की पराली जलाना कानूनी रूप से अवैध है और यह स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। किसानों से आह्वान है कि वह पराली न जलाएं, बल्कि उसे बेचकर आमदनी का जरिया भी बनाए। यदि फिर भी कोई व्यक्ति पराली जलाता पाया गया तो उसको जुर्माना लगाया जाएगा।
-डॉ. पंकज सिंह, एसडीएम, जींद।