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Jind News: खेतों में खड़ा पानी निकलेगा, मिट्टी की सेहत सुधरेगी...8 करोड़ का टेंडर जारी

Fri, 04 Sep 2026 02:06 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 02:06 AM IST
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Stagnant water will be drained from the fields, soil health will improve... 8 crore tender issued.

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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जुलाना क्षेत्र के गांव गतौली और आसपास के इलाके में जलभराव व लवणीय मिट्टी की समस्या से प्रभावित कृषि भूमि को सुधारने के लिए कृषि विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने वर्टिकल ड्रेनेज प्रोजेक्ट के लिए 8 करोड़ 63 हजार 565 रुपये की अनुमानित लागत का टेंडर जारी किया है।
प्रोजेक्ट के तहत जमीन में जमा अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे लंबे समय से जलभराव की समस्या झेल रहे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। टेंडर के अनुसार प्रोजेक्ट का कार्य गतौली, जय जयवंती और नंदगढ़ क्षेत्र में किया जाएगा।
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वर्टिकल ड्रेनेज व्यवस्था के माध्यम से भूमि के अंदर जमा अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने का प्रयास किया जाएगा। इससे जलभराव वाले खेतों में खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने में मदद मिलेगी। जलभराव के कारण खेतों में लगातार नमी रहने से फसलों की जड़ों को पर्याप्त हवा नहीं मिल पाती और फसल उत्पादन प्रभावित होता है।
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वहीं मिट्टी में लवणीयता बढ़ने से भूमि की उर्वरता कम होने लगती है तथा कई फसलों की पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ता है। परियोजना के तहत अतिरिक्त पानी की निकासी होने से मिट्टी में जमा लवणीय तत्वों को कम करने में मदद मिलेगी। इससे भूमि की गुणवत्ता में सुधार और खेती योग्य क्षेत्र बढ़ने की उम्मीद है।
किसानों को खेतों में समय पर बुवाई करने में सुविधा होगी
जलभराव कम होने से किसानों को खेतों में समय पर बुवाई करने में सुविधा होगी। फसल की जड़ों का विकास बेहतर होगा और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहेगी। लंबे समय में इससे किसानों की आय में भी सुधार हो सकता है। साथ ही खेतों में लंबे समय तक पानी खड़ा रहने से होने वाले नुकसान और खाली पड़ी कृषि भूमि को दोबारा उपयोग में लाने में मदद मिलेगी।

बाक्स
परियोजना की अनुमानित लागत आठ करोड़ रुपये है। चयनित एजेंसी को कार्य पूरा करने के लिए 420 दिन का समय दिया जाएगा। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद गतौली सहित आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में जलभराव और लवणीय मिट्टी की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। -संत कुमार, सहायक मृदा संरक्षण अधिकारी जींद।
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