{"_id":"6314f252bfea22728e139bda","slug":"someone-looking-for-radha-saw-my-shyam-jind-news-rtk6570652146","type":"story","status":"publish","title_hn":"राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा....","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा....
विज्ञापन
कथावाचक बालन्यास अरविंद शास्त्री। संवाद
- फोटो : Jind
उचाना। उचाना मंडी में कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पास कान्हा सेवा सदन में साप्ताहिक भागवत गीता के तीसरे दिन कथावाचक बालन्यास अरविंद शास्त्री महाराज ने भागवत कथा का सार बताते हुए कहा कि जीव के जीवन का लक्ष्य परमात्मा के चरणों की भक्ति करना है। भक्ति में शक्ति होती है। सच्चे मन से की गई भक्ति से भगवान प्रसन्न होते है। मनुष्य आज स्वार्थी हो चला है। वह भगवान को तब ही याद करता है जब वह दुख में होता है। सुख में भी भगवान को याद करना चाहिए। सुख में भगवान को याद करें तो दुख नहीं होगा।
शास्त्री ने कहा कि अंत समय मनुष्य अगर कुछ जाता है तो वो अच्छाई, बुराई है। मौत अटल सत्य है इसका पता है लेकिन फिर भी मोह-माया के चक्कर में मनुष्य इस कदर फंसा हुआ है कि उसे सिर्फ मोह, माया के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता है। मनुष्य जीवन के लिए देवता भी तरसते है। जो यह जीवन मिला है उसका फायदा उठाते हुए अच्छे कर्म करने के साथ-साथ जितना हो सकें उतनी लोगों की मदद करें। दवा से ज्यादा दुआ में ताकत होती है। जीवन में अगर कोई चीज कमा सको तो वो दुआ कमाना ताकि कभी दवा की जरूरत न पड़े।
कथा में सुंदर भजनों अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, मिलने सुदामा गरीब आ गया है, राधे-राधे कहने की आदत सी हो गई है, राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा, भर दे श्यामा झोली भर दे ना बहला बातों में, जरा इतना बता दे कान्हा तेरा रंग काला क्यों, तू काला होकर भी जग से निराला क्यों, श्याम आन बसो वृंदावन में मेरी उम्र बीत गई गोकल में सहित अन्य भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे।
विज्ञापन
इस मौके पर कैलाश बंसल, विनोद बंसल, सोनिया बंसल, बिंदया, सोनू, बबीता, सरोज, सुदेश, ऊमा, चांदी शास्त्री, सतपाल करसिंधु, सुरेश गर्ग, रोशन लाल घोघड़िया, कर्मबीर शर्मा, तरषेग गर्ग, राजेश गर्ग मौजूद रहे।
विज्ञापन
शास्त्री ने कहा कि अंत समय मनुष्य अगर कुछ जाता है तो वो अच्छाई, बुराई है। मौत अटल सत्य है इसका पता है लेकिन फिर भी मोह-माया के चक्कर में मनुष्य इस कदर फंसा हुआ है कि उसे सिर्फ मोह, माया के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता है। मनुष्य जीवन के लिए देवता भी तरसते है। जो यह जीवन मिला है उसका फायदा उठाते हुए अच्छे कर्म करने के साथ-साथ जितना हो सकें उतनी लोगों की मदद करें। दवा से ज्यादा दुआ में ताकत होती है। जीवन में अगर कोई चीज कमा सको तो वो दुआ कमाना ताकि कभी दवा की जरूरत न पड़े।
विज्ञापन
कथा में सुंदर भजनों अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, मिलने सुदामा गरीब आ गया है, राधे-राधे कहने की आदत सी हो गई है, राधा ढूंढ रही किसी ने मेरा श्याम देखा, भर दे श्यामा झोली भर दे ना बहला बातों में, जरा इतना बता दे कान्हा तेरा रंग काला क्यों, तू काला होकर भी जग से निराला क्यों, श्याम आन बसो वृंदावन में मेरी उम्र बीत गई गोकल में सहित अन्य भजनों पर श्रद्धालु खूब झूमे।
विज्ञापन
इस मौके पर कैलाश बंसल, विनोद बंसल, सोनिया बंसल, बिंदया, सोनू, बबीता, सरोज, सुदेश, ऊमा, चांदी शास्त्री, सतपाल करसिंधु, सुरेश गर्ग, रोशन लाल घोघड़िया, कर्मबीर शर्मा, तरषेग गर्ग, राजेश गर्ग मौजूद रहे।