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Jind News: श्रीराम ने धनुष तोड़कर सीता से रचाया विवाह
Fri, 04 Oct 2024 11:47 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 04 Oct 2024 11:47 PM IST
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नरवाना। पुरानी अनाज मंडी में श्रीरामा भारतीय कला केंद्र की ओर से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। तीसरे दिन वीरवार को ताड़का वध, सुबाहू वध से लेकर सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। इस मौके पर मुख्यातिथि के तौर पर नगर परिषद के उप प्रधान शशिकांत शर्मा और कुलदीप मोर ने शिरकत की। मंच संचालन शैलेंद्र मोहन ने किया।
रामलीला मंचन के दौरान दिखाया गया कि विश्वामित्र किस तरह से राक्षसों से परेशान होकर राजा दशरथ के पास फरियाद लेकर जाते हैं। उसके बाद वहां आग्रह करते हैं कि वह राम-लक्षमण को जंगल में भेजकर राक्षसों का सफाया करवाएं। फिर दशरथ उन्हें भेजने में संकोच करते हैं। दरबार में मौजूद विशिष्ट राम-लक्षमण को भेजने के लिए कह देते हैं। विश्वामित्र राम-लक्षमण को लेकर जंगल में पहुंच जाते हैं और बताते हैं कि यहां एक राक्षसी ताड़का रहती है। सबसे पहले राम-लक्ष्मण उसका वध कर देते हैं। फिर आगे चलकर सुबाहू का वध कर देते हैं और फिर मारीच के साथ युद्ध होता है, जिसमें मारीच वहां से भाग जाता है। तीसरे दिन की रामलीला के अंतिम दृश्य में विश्वामित्र के पास एक पत्र आता है, जिसके बाद वह राम-लक्षमण को लेकर जनक के दरबार में पहुंच जाते हैं। वहां पर देश-विदेश के राजा सीता स्वयंवर में मौजूद होते हैं। शर्त रखी जाती है कि जो धनुष को तोड़ेगा उसका विवाह सीता के साथ किया जाएगा। सभी राजा, यहां तक की अहिरावण व रावण भी धनुष तोड़ने में असफल रहते हैं। फिर भगवान राम धनुष को तोड़ देते हैं। उसके बाद माता सीता के साथ श्रीराम विवाह कर लेते हैं। मंचन में श्रीराम की भूमिका अमन वर्मा, लक्ष्मण की भूमिका रामप्रकाश, दशरथ की भूमिका कुलदीप वर्मा, विश्वामित्र की रामनिवास जैन, रावण की भूमिका में नरेंद्र कुकरेजा, जनक की भूमिका राजेश बात्ता, ताड़का की शमशेर गोस्वामी व सुबाहू की विक्की ने निभाई। इस दौरान संजय सिंगला, जयपाल बंसल, राजेश टांक, पुनीत जैन, भारतभूषण गर्ग, खजांची बाता, कुलदीप बडऩपुर, अचल मित्तल, रामकुमार गर्ग, वेद अरोड़ा और संजय रोहिल्ला मौजूद रहे।
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रामलीला मंचन के दौरान दिखाया गया कि विश्वामित्र किस तरह से राक्षसों से परेशान होकर राजा दशरथ के पास फरियाद लेकर जाते हैं। उसके बाद वहां आग्रह करते हैं कि वह राम-लक्षमण को जंगल में भेजकर राक्षसों का सफाया करवाएं। फिर दशरथ उन्हें भेजने में संकोच करते हैं। दरबार में मौजूद विशिष्ट राम-लक्षमण को भेजने के लिए कह देते हैं। विश्वामित्र राम-लक्षमण को लेकर जंगल में पहुंच जाते हैं और बताते हैं कि यहां एक राक्षसी ताड़का रहती है। सबसे पहले राम-लक्ष्मण उसका वध कर देते हैं। फिर आगे चलकर सुबाहू का वध कर देते हैं और फिर मारीच के साथ युद्ध होता है, जिसमें मारीच वहां से भाग जाता है। तीसरे दिन की रामलीला के अंतिम दृश्य में विश्वामित्र के पास एक पत्र आता है, जिसके बाद वह राम-लक्षमण को लेकर जनक के दरबार में पहुंच जाते हैं। वहां पर देश-विदेश के राजा सीता स्वयंवर में मौजूद होते हैं। शर्त रखी जाती है कि जो धनुष को तोड़ेगा उसका विवाह सीता के साथ किया जाएगा। सभी राजा, यहां तक की अहिरावण व रावण भी धनुष तोड़ने में असफल रहते हैं। फिर भगवान राम धनुष को तोड़ देते हैं। उसके बाद माता सीता के साथ श्रीराम विवाह कर लेते हैं। मंचन में श्रीराम की भूमिका अमन वर्मा, लक्ष्मण की भूमिका रामप्रकाश, दशरथ की भूमिका कुलदीप वर्मा, विश्वामित्र की रामनिवास जैन, रावण की भूमिका में नरेंद्र कुकरेजा, जनक की भूमिका राजेश बात्ता, ताड़का की शमशेर गोस्वामी व सुबाहू की विक्की ने निभाई। इस दौरान संजय सिंगला, जयपाल बंसल, राजेश टांक, पुनीत जैन, भारतभूषण गर्ग, खजांची बाता, कुलदीप बडऩपुर, अचल मित्तल, रामकुमार गर्ग, वेद अरोड़ा और संजय रोहिल्ला मौजूद रहे।
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