{"_id":"6ae4eedc567badf251014f61","slug":"sfi-opposes-the-system-of-volunteer-teachers-in-schools-jind-news-c-199-1-sroh1009-162976-2026-10-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: स्कूलों में स्वयंसेवक शिक्षकों की व्यवस्था के खिलाफ एसएफआई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: स्कूलों में स्वयंसेवक शिक्षकों की व्यवस्था के खिलाफ एसएफआई
विज्ञापन
जींद। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की हरियाणा राज्य कमेटी ने सरकारी स्कूलों में स्वयंसेवक शिक्षकों के माध्यम से पढ़ाई करवाने की व्यवस्था का विरोध किया है। संगठन ने इसे सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला फैसला बताते हुए सरकार से स्वयंसेवक शिक्षक पोर्टल वापस लेने और शिक्षकों के रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करने की मांग की है।
एसएफआई के राज्य प्रधान अक्षय माहला ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूल पहले ही 40 हजार से अधिक शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में नियमित शिक्षकों की भर्ती करने के बजाय स्वयंसेवकों के भरोसे शिक्षा व्यवस्था चलाना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
उन्होंने कहा कि हजारों युवा हर साल हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करते हैं लेकिन सरकार उन्हें रोजगार देने के बजाय बिना मानदेय के सेवाएं लेने की व्यवस्था लागू कर रही है। शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है।
विज्ञापन
राज्य सचिव सुखदेव बूरा ने कहा कि योजना के तहत सेवानिवृत्त शिक्षकों, पूर्व सैनिकों और अन्य इच्छुक व्यक्तियों को पंजीकरण एवं चयन प्रक्रिया के बाद सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का अवसर दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए कोई मानदेय नहीं मिलेगा। अनुभवी व्यक्तियों का सामाजिक योगदान सराहनीय है, लेकिन उन्हें नियमित शिक्षकों की भर्ती के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। संवाद
विज्ञापन
एसएफआई के राज्य प्रधान अक्षय माहला ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूल पहले ही 40 हजार से अधिक शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में नियमित शिक्षकों की भर्ती करने के बजाय स्वयंसेवकों के भरोसे शिक्षा व्यवस्था चलाना विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हजारों युवा हर साल हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करते हैं लेकिन सरकार उन्हें रोजगार देने के बजाय बिना मानदेय के सेवाएं लेने की व्यवस्था लागू कर रही है। शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है।
विज्ञापन
राज्य सचिव सुखदेव बूरा ने कहा कि योजना के तहत सेवानिवृत्त शिक्षकों, पूर्व सैनिकों और अन्य इच्छुक व्यक्तियों को पंजीकरण एवं चयन प्रक्रिया के बाद सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का अवसर दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए कोई मानदेय नहीं मिलेगा। अनुभवी व्यक्तियों का सामाजिक योगदान सराहनीय है, लेकिन उन्हें नियमित शिक्षकों की भर्ती के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। संवाद