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Jind News: फौजी वर्दी में लौटे बेटे को देख नम हो गई आखें, डूमरखा कलां बना देशभक्ति का गवाह

Wed, 24 Jun 2026 11:52 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 11:52 PM IST
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Seeing his son return in military uniform, eyes became moist, Doomarkha Kalan became a witness to patriotism.
फोटो 6 नरवाना। अपने पिता बलजीत के सिर पर टोपी सजाते हुए अग्निवीर राहुल। संवाद
नरवाना। गांव डूमरखा कलां के राहुल अग्निवीर की ट्रेनिंग पूरी कर बुधवार को पहली बार भारतीय फौजी वर्दी पहनकर गांव लौटे तो पूरा माहौल देशभक्ति से भर गया। बेटे की वर्दी देखकर परिवार की आंखें नम हो गईं। ग्रामीणों ने भारत माता की जय के नारों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया।
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राहुल ने फौजी अंदाज में अपने माता-पिता को सलामी दी। इसके बाद पिता बलजीत को अपनी फौजी टोपी पहनाकर सम्मान दिया। यह पल हर किसी के दिल को छू गया।
गांव के शिव मंदिर में पहुंचकर राहुल ने भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। इसके बाद लोगों ने राहुल को फूल-मालाओं से लाद दिया और खुली गाड़ी में बैठाकर पूरे गांव में विजय जुलूस निकाला। रास्ते भर जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया।
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ग्रामीणों का कहना है कि राहुल की सफलता पूरे गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा है। इससे यह संदेश मिलता है कि मेहनत और लगन से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। इस दौरान ताऊ ओमप्रकाश, ब्रह्मानंद, महेंद्र, ताई कृष्णा, कमलेश, बबली, भाभी सरिता, भाई सुखदेव, राजेश तथा बहन कविता, पूजा, पार्वती, छोटी और नेहा मौजूद रहीं।
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संघर्ष की मिट्टी को नमन, युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
राहुल उस मैदान पर भी गए जहां फौज में भर्ती होने के लिए वर्षों तक अभ्यास किया था। उस ट्रैक की मिट्टी को चूमकर अपनी मेहनत और संघर्ष को नमन किया। वहां मौजूद अपने कोच से मिलकर आशीर्वाद लिया और अभ्यास कर रहे युवाओं को अनुशासन और लगातार मेहनत का महत्व समझाया।
राहुल ने कभी नहीं छोड़ा अभ्यास : कोच
कोच राहुल ने बताया कि अग्निवीर राहुल शुरू से ही मेहनती और अनुशासित रहा है। वह प्रतिदिन समय पर ट्रैक पर पहुंचता था और उसकी आंखों में फौजी बनने का सपना साफ दिखाई देता था। आज उसकी सफलता अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा है।

मेहनत करने वालों को वर्दी पहनने से कोई नहीं रोक सकता
राहुल के पिता बलजीत, माता अनीता और भाई अजय ने कहा कि वह परिवार के पहले फौजी हैं। राहुल ने दिन-रात मेहनत करके यह मुकाम हासिल किया है। परिवार का कहना है कि यदि युवा लगन, अनुशासन और लगातार अभ्यास करें तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। मेहनत करने वालों को वर्दी पहनने से कोई नहीं रोक सकता।

फोटो 6 नरवाना। अपने पिता बलजीत के सिर पर टोपी सजाते हुए अग्निवीर राहुल। संवाद
फोटो 7 नरवाना। राहुल को टीका कर स्वागत करते हुए बहन काजल। संवाद।
फोटो 8 नरवाना। अग्निवीर भाई राहुल के साथ खड़ी बहन कविता व पूजा। संवाद।
फोटो 9 नरवाना। अपने माता पिता के साथ खड़े राहुल। संवाद।
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