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सनातन परंपराएं भारतीय संस्कृति की आत्मा : कृष्ण कुमार बेदी
Sun, 22 Feb 2026 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 22 Feb 2026 11:52 PM IST
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22जेएनडी03: 108 कुंडीय महायज्ञ की महाआरती में मौजूद मंत्री कृष्ण बेदी। स्रोत प्रशासन
जींद। सनातन धर्म की परंपराएं केवल धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं हैं बल्कि भारतीय संस्कृति की असली आत्मा हैं। यह बातें मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने शनिवार देर शाम जगतगुरु पीठाधीश श्री श्री 1008 हरिओम जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित 108वें महायज्ञ की महाआरती कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर कहे।
कैबिनेट मंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि 108 कुंडीय महायज्ञ जैसे आयोजन पर्यावरण की शुद्धि के साथ-साथ आमजन को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने भारत को ऋषियों और संतों की तपोभूमि बताते हुए कहा कि रामायण, महाभारत और भागवद्गीता जैसे ग्रंथ आज भी जीवन प्रबंधन और नैतिक मूल्यों के सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं।
संतों का तप और त्याग ही समाज को सत्य, करुणा और सेवा के मार्ग पर अग्रसर करता है। मंत्री बेदी ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन एक देश-एक चुनाव जैसी राष्ट्रीय मुहिम को भी वैचारिक बल प्रदान करते हैं क्योंकि ये समाज में सामूहिक सहभागिता और एकता की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि राष्ट्र की उन्नति के लिए सांस्कृतिक विरासत को आत्मसात करना अनिवार्य है।
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18 से 27 फरवरी तक चलने वाले इस महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वैदिक परंपराओं का पुनरुत्थान और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना करना है। इस अवसर पर उनके पुत्र कर्ण बेदी, भारत भूषण टांक, पुष्पा तायल और गौरव भारद्वाज सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।
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कैबिनेट मंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि 108 कुंडीय महायज्ञ जैसे आयोजन पर्यावरण की शुद्धि के साथ-साथ आमजन को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने भारत को ऋषियों और संतों की तपोभूमि बताते हुए कहा कि रामायण, महाभारत और भागवद्गीता जैसे ग्रंथ आज भी जीवन प्रबंधन और नैतिक मूल्यों के सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं।
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संतों का तप और त्याग ही समाज को सत्य, करुणा और सेवा के मार्ग पर अग्रसर करता है। मंत्री बेदी ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन एक देश-एक चुनाव जैसी राष्ट्रीय मुहिम को भी वैचारिक बल प्रदान करते हैं क्योंकि ये समाज में सामूहिक सहभागिता और एकता की भावना को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने जोर दिया कि राष्ट्र की उन्नति के लिए सांस्कृतिक विरासत को आत्मसात करना अनिवार्य है।
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18 से 27 फरवरी तक चलने वाले इस महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, वैदिक परंपराओं का पुनरुत्थान और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना करना है। इस अवसर पर उनके पुत्र कर्ण बेदी, भारत भूषण टांक, पुष्पा तायल और गौरव भारद्वाज सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।