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Jind News: सेवानिवृत्त प्राचार्य संतोष जांगड़ा का घर बना हरियाली की पाठशाला
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जींद। शिक्षा के क्षेत्र में वर्षों तक बच्चों को हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का पाठ पढ़ाने वाली सेवानिवृत्त प्राचार्य संतोष जांगड़ा आज अपने घर को ही प्रकृति की जीवंत पाठशाला बना चुकी हैं। उनके घर की चाहरदीवारी के भीतर औषधीय और सुगंधित पौधों से सजी उनकी बगिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है।
संतोष जांगड़ा ने अपने जीवन का शिक्षा और संस्कारों को समर्पित किया। विद्यालय परिसर में पौधरोपण को बढ़ावा देने के साथ उन्होंने बच्चों को पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल के लिए भी प्रेरित किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका यह जुनून बरकरार है। अब उन्होंने अपने घर को सैकड़ों औषधीय, सजावटी और सुगंधित पौधों से सजा रखा है।
उनकी बगिया में रंग-बिरंगे फूलों के साथ तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, पुदीना, अजवाइन समेत अनेक औषधीय पौधे लगे हैं, जो घरेलू इलाज में भी उपयोगी हैं। संतोष जांगड़ा प्रतिदिन स्वयं पौधों की निराई-गुड़ाई, कटाई-छंटाई, सिंचाई और अन्य आवश्यक देखभाल करती हैं। उनका कहना है कि पौधों के बीच बिताया गया समय मन को सुकून देता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार करता है।
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उन्होंने बताया कि स्कूल में भी उन्होंने विद्यार्थियों को पौधे लगाने और उनकी देखभाल के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए।
पति इंद्र सिंह भी निभा रहे हरित अभियान में बराबर की भागीदारी
संतोष जांगड़ा के हरित अभियान में उनके पति इंद्र सिंह भी बराबर के सहभागी हैं। उन्हें पौधों से विशेष लगाव है। वह घर के सामने स्थित पार्क में पौधरोपण करने के साथ उनकी नियमित देखभाल भी करते हैं। उनका मानना है कि यदि प्रत्येक परिवार अपने घर या आसपास कुछ पौधे लगाए और उनकी जिम्मेदारी उठाए तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
हरियाली से मिलती है सुकून, सेहत और नई ऊर्जा
संतोष जांगड़ा का कहना है कि पौधों की देखभाल उनके लिए केवल शौक नहीं बल्कि दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छोटे-छोटे प्रयासों से पर्यावरण को सुरक्षित और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर बनाया जा सकता है।
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संतोष जांगड़ा ने अपने जीवन का शिक्षा और संस्कारों को समर्पित किया। विद्यालय परिसर में पौधरोपण को बढ़ावा देने के साथ उन्होंने बच्चों को पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल के लिए भी प्रेरित किया। सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका यह जुनून बरकरार है। अब उन्होंने अपने घर को सैकड़ों औषधीय, सजावटी और सुगंधित पौधों से सजा रखा है।
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उनकी बगिया में रंग-बिरंगे फूलों के साथ तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, पुदीना, अजवाइन समेत अनेक औषधीय पौधे लगे हैं, जो घरेलू इलाज में भी उपयोगी हैं। संतोष जांगड़ा प्रतिदिन स्वयं पौधों की निराई-गुड़ाई, कटाई-छंटाई, सिंचाई और अन्य आवश्यक देखभाल करती हैं। उनका कहना है कि पौधों के बीच बिताया गया समय मन को सुकून देता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार करता है।
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उन्होंने बताया कि स्कूल में भी उन्होंने विद्यार्थियों को पौधे लगाने और उनकी देखभाल के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए।
पति इंद्र सिंह भी निभा रहे हरित अभियान में बराबर की भागीदारी
संतोष जांगड़ा के हरित अभियान में उनके पति इंद्र सिंह भी बराबर के सहभागी हैं। उन्हें पौधों से विशेष लगाव है। वह घर के सामने स्थित पार्क में पौधरोपण करने के साथ उनकी नियमित देखभाल भी करते हैं। उनका मानना है कि यदि प्रत्येक परिवार अपने घर या आसपास कुछ पौधे लगाए और उनकी जिम्मेदारी उठाए तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
हरियाली से मिलती है सुकून, सेहत और नई ऊर्जा
संतोष जांगड़ा का कहना है कि पौधों की देखभाल उनके लिए केवल शौक नहीं बल्कि दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। छोटे-छोटे प्रयासों से पर्यावरण को सुरक्षित और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर बनाया जा सकता है।