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उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे लोगों को देर रात हटाया
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इन आंखों को सहारे का इंतजार...डीसी कार्यालय के नीचे धरने पर हादसे में जान गंवाने वाले सुनील की पत्?
- फोटो : Jind
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गोहाना रोड पर शनिवार रात में पशुओं को पकड़ते समय बाइक की चपेट में आने से मरने वाले युवक राम कॉलोनी निवासी सुनील का शव परिजनों ने तीसरे दिन भी नहीं उठाया। तीसरे दिन मंगलवार को परिजन और अनुसूचित जाति के लोगों ने अस्पताल से उठकर डीसी कार्यालय में पोर्च के नीचे धरना शुरू कर दिया। हालांकि देर रात पुलिस ने धरने पर बैठे सभी लोगों को वहां से बाहर निकाल दिया।
देवीदास वाल्मीकि ने कहा कि करनाल में दो किसानों की मौत पर जिस प्रकार सरकार ने मुआवजा और नौकरी दी है, उसी प्रकार सुनील के परिजनों को भी 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और पार्ट-दो के तहत सुनील की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए। उन्होेंने एसडीएम से पूछा कि क्या प्रदेश में उच्च जातियों के लोगों की मौत पर व अनुसूचित जातियों के लोगों की मौत पर अलग-अलग मुआवजे का प्रावधान है। इस पर एसडीएम ने कहा कि करनाल की बात उनसे नहीं करें। सरकारी व्यवस्था में जो प्रावधान है वह उसके अनुसार पूरी मदद करने के लिए तैयार हैं। इस पर लोगों ने उनकी बात नहीं सुनी और एसडीएम वापस अपने कार्यालय चले गए।
नागरिक अस्पताल से डीसी कार्यालय तक किया प्रदर्शन
रविवार से ही अनुसूचित जाति के लोग सुनील के परिवार के मदद दिलवाने के लिए अस्पताल में धरना दे रहे थे। मंगलवार को अस्पताल से डीसी कार्यालय तक प्रदर्शन किया और लोगों ने यहीं डेरा डाल दिया। इस दौरान लोगों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती, वे यहीं रहेंगे।
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यहीं रहेगा धरना, प्रशासन चाहे तो बलपूर्वक उठा दे
प्रदर्शन कर लोग जैसे ही डीसी कार्यालय पहुंचे तो देवीदास वाल्मीकि ने कहा कि उनका पुलिस से कोई टकराव नहीं है। न वे कोई ऐसी नौबत आने देंगे कि पुलिस की जरूरत पड़े। शांतिपूर्ण धरना जारी रखेंगे। यदि प्रशासन बलपूर्वक उठाना चाहे तो उठा सकता है।
डीसी कार्यालय के नीचे ही शुरू किया खाना बनाना
इस दौरान नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैें तब तक वे दिन-रात यहीं रहेंगे। इसके लिए उन्होंने डीसी कार्यालय के नीचे ही खाना बनाना भी शुरू कर दिया। इन लोगों ने साफ किया कि वे सिर्फ अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।
एसडीएम से बातचीत करने वालों को बताया दलाल
जिस समय लोगों के बीच एसडीएम दलबीर सिंह आए, उन्होंने कहा कि उनकी संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं। इसके चलते ही समाज के लोगों से भी बात की है। इस पर देवीदास वाल्मीकि ने कहा कि समाज के लोग बातचीत करने नहीं आए, अधिकारियों ने ही आंदोलन को तोड़ने के लिए कुछ दलालों को बुलाया था।
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देवीदास वाल्मीकि ने कहा कि करनाल में दो किसानों की मौत पर जिस प्रकार सरकार ने मुआवजा और नौकरी दी है, उसी प्रकार सुनील के परिजनों को भी 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और पार्ट-दो के तहत सुनील की पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए। उन्होेंने एसडीएम से पूछा कि क्या प्रदेश में उच्च जातियों के लोगों की मौत पर व अनुसूचित जातियों के लोगों की मौत पर अलग-अलग मुआवजे का प्रावधान है। इस पर एसडीएम ने कहा कि करनाल की बात उनसे नहीं करें। सरकारी व्यवस्था में जो प्रावधान है वह उसके अनुसार पूरी मदद करने के लिए तैयार हैं। इस पर लोगों ने उनकी बात नहीं सुनी और एसडीएम वापस अपने कार्यालय चले गए।
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नागरिक अस्पताल से डीसी कार्यालय तक किया प्रदर्शन
रविवार से ही अनुसूचित जाति के लोग सुनील के परिवार के मदद दिलवाने के लिए अस्पताल में धरना दे रहे थे। मंगलवार को अस्पताल से डीसी कार्यालय तक प्रदर्शन किया और लोगों ने यहीं डेरा डाल दिया। इस दौरान लोगों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती, वे यहीं रहेंगे।
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यहीं रहेगा धरना, प्रशासन चाहे तो बलपूर्वक उठा दे
प्रदर्शन कर लोग जैसे ही डीसी कार्यालय पहुंचे तो देवीदास वाल्मीकि ने कहा कि उनका पुलिस से कोई टकराव नहीं है। न वे कोई ऐसी नौबत आने देंगे कि पुलिस की जरूरत पड़े। शांतिपूर्ण धरना जारी रखेंगे। यदि प्रशासन बलपूर्वक उठाना चाहे तो उठा सकता है।
डीसी कार्यालय के नीचे ही शुरू किया खाना बनाना
इस दौरान नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैें तब तक वे दिन-रात यहीं रहेंगे। इसके लिए उन्होंने डीसी कार्यालय के नीचे ही खाना बनाना भी शुरू कर दिया। इन लोगों ने साफ किया कि वे सिर्फ अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।
एसडीएम से बातचीत करने वालों को बताया दलाल
जिस समय लोगों के बीच एसडीएम दलबीर सिंह आए, उन्होंने कहा कि उनकी संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं। इसके चलते ही समाज के लोगों से भी बात की है। इस पर देवीदास वाल्मीकि ने कहा कि समाज के लोग बातचीत करने नहीं आए, अधिकारियों ने ही आंदोलन को तोड़ने के लिए कुछ दलालों को बुलाया था।

डीसी कार्यालय की पोर्च के नीचे धरना देते लोग। संवाद- फोटो : Jind

प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे सुनील के परिजन व अन्य। संवाद- फोटो : Jind