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Jind News: प्रदूषण कम हुआ, हवा अब भी सेहत के लिए हानिकारक
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03जेएनडी02 : सुबह के समय हवा के साथ तैर रहा धुएं के रुप में स्मॉग। संवाद
जींद। दो दिन से प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद रविवार को कुछ हद तक वायु प्रदूषण से राहत मिली। दो दिन पहले एक्यूआई 500 तक पहुंच गया था, जो रविवार को औसतन 239 रहा। रविवार को भी अधिकतम वायु प्रदूषण का सूचकांक 306 तक रहा, जो दिन में कुछ कम रहा।
दो दिन के बाद बेशक वायु प्रदूषण कुछ कम हुआ हो, लेकिन स्वास्थ्य के लिए अब भी हानिकारक है। सड़क किनारे खड़े पेड़-पौधों पर भी पानी छिड़कने की जरूरत महसूस हो रही है। वहीं प्रशासन द्वारा शहर के अंदर सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
रविवार को अधिकतम एक्यूआई 306 तक दर्ज किया गया, जो औसतन 239 रहा। दीपावली के बाद जींद की आबोहवा जहरीली हो गई है। फसल अवशेष जलने और दीपावली पर पटाखों के जहरीले धुएं की वजह से आंखों में जलन महसूस होने लगी है। वहीं, बच्चों और वृद्धों को सांस लेने में परेशानी होने लगी है। तीन दिन से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) औसतन 400 के आसपास रहा, जो रविवार को कुछ कम होकर 239 रहा।
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जिले में अक्टूबर के अंत तक एक्यूआई अधिकतम 350 तक रहा, लेकिन नवंबर के पहले दो दिनों में ही एक्यूआई 500 तक पहुंच गया था। फिलहाल एक्यूआई का जो स्तर है, वह भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जो लोग पहले से ही अस्थमा के रोगी हैं या अन्य किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनको इससे काफी परेशानी हो सकती है।
बॉक्स
बच्चों और बुजुर्गों को बचाकर रखने की सलाह
नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रघुबीर पूनिया ने कहा कि इस समय हवा काफी प्रदूषित है। इसमें अनेक प्रकार के जहरीले कण तैर रहे हैं। यह बच्चों व बुजुर्गों के लिए काफी खतरनाक है। बेवजह बच्चों व बुजुर्गों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। सुबह की सैर पर रोक लगाने की जरूरत है। शाम को कुछ देर तक पार्क में जहां पर ज्यादा पौधे हों, वहां टहला जा सकता है।
बॉक्स
आसपास यदि कहीं आग लगी हो तो तुरंत इसकी सूचना नगर पालिका को दें। इसके अलावा सफाई करते समय भी पानी का छिड़काव करें। अपने आसपास भी पानी का छिड़काव करना चाहिए। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। बेवजह वाहन भी बाहर लेकर नहीं जाएं।
-मोहम्मद इमरान रजा, डीसी
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दो दिन के बाद बेशक वायु प्रदूषण कुछ कम हुआ हो, लेकिन स्वास्थ्य के लिए अब भी हानिकारक है। सड़क किनारे खड़े पेड़-पौधों पर भी पानी छिड़कने की जरूरत महसूस हो रही है। वहीं प्रशासन द्वारा शहर के अंदर सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
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रविवार को अधिकतम एक्यूआई 306 तक दर्ज किया गया, जो औसतन 239 रहा। दीपावली के बाद जींद की आबोहवा जहरीली हो गई है। फसल अवशेष जलने और दीपावली पर पटाखों के जहरीले धुएं की वजह से आंखों में जलन महसूस होने लगी है। वहीं, बच्चों और वृद्धों को सांस लेने में परेशानी होने लगी है। तीन दिन से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) औसतन 400 के आसपास रहा, जो रविवार को कुछ कम होकर 239 रहा।
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जिले में अक्टूबर के अंत तक एक्यूआई अधिकतम 350 तक रहा, लेकिन नवंबर के पहले दो दिनों में ही एक्यूआई 500 तक पहुंच गया था। फिलहाल एक्यूआई का जो स्तर है, वह भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जो लोग पहले से ही अस्थमा के रोगी हैं या अन्य किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उनको इससे काफी परेशानी हो सकती है।
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बच्चों और बुजुर्गों को बचाकर रखने की सलाह
नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रघुबीर पूनिया ने कहा कि इस समय हवा काफी प्रदूषित है। इसमें अनेक प्रकार के जहरीले कण तैर रहे हैं। यह बच्चों व बुजुर्गों के लिए काफी खतरनाक है। बेवजह बच्चों व बुजुर्गों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। सुबह की सैर पर रोक लगाने की जरूरत है। शाम को कुछ देर तक पार्क में जहां पर ज्यादा पौधे हों, वहां टहला जा सकता है।
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आसपास यदि कहीं आग लगी हो तो तुरंत इसकी सूचना नगर पालिका को दें। इसके अलावा सफाई करते समय भी पानी का छिड़काव करें। अपने आसपास भी पानी का छिड़काव करना चाहिए। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। बेवजह वाहन भी बाहर लेकर नहीं जाएं।
-मोहम्मद इमरान रजा, डीसी