{"_id":"576446b34f1c1b591811bc25","slug":"pilles-mistak-sdm-observe-jind","type":"story","status":"publish","title_hn":"दाल गड़बड़ी की जांच करेंगे एसडीएम ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दाल गड़बड़ी की जांच करेंगे एसडीएम
jind
Updated Sat, 18 Jun 2016 12:21 AM IST
विज्ञापन
डीसी से मिलने पहुंचे ग्रामीण।
- फोटो : bureau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में दाल रोटी योजना के तहत आई दाल के बंटवारे में गड़बड़ी की जांच अब एसडीएम करेंगे। इतना ही नहीं डीसी ने एसडीएम को दो दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा है। वहीं डिपो होल्डर द्वारा पूरी दाल नहीं दिए जाने की शिकायत लेकर एक बार फिर मेहरड़ा गांव के लोग शुक्रवार को डीसी विनय सिंह से मिलने पहुंचे। जिले में 277553 राशन कार्ड धारक हैं। इसमें 34561 एसबीपीएल, 14469 सीबीपीएल व 17925 अंतयोदय योजना के लाभार्थी हैं। कुल 66955 राशनकार्ड धारकों को सरकार द्वारा भेजी गई 15 किलोग्राम दाल 20 रुपये प्रति किलोग्राम के रेट पर मिलनी है, लेकिन कई गांवों के लोगों को यह दाल नहीं मिल पा रही है। वहीं सफीदों और किनाना गांव में दाल के खाली पैकट भी भारी मात्रा में मिलने से योजना पर सवाल उठ रहे हैं। लिजवाना, मेहरड़ा और जलापुरा गांव के लोगों की तरफ से शिकायत आने के बाद अब प्रशासन इस मामले में सख्ती के मूढ में है। शुक्रवार के फिर से मेहरड़ा गांव के लोग डिपो धारक पर कम दाल देने की शिकायत लेकर डीसी दरबार पहुंचे।
पांच किलोग्राम दाल ही मिली
डीसी को दी शिकायत में इन लोगों ने कहा कि डिपो धारक ने उन्हें 15 की बजाय पांच किलोग्राम दाल ही दी है। इन लोगों का आरोप है कि प्रति राशनकार्ड 10 किलोग्राम दाल डिपो होल्डर ने हड़प ली है। ग्रामीणों ने कहा कि इस गोरखधंधे में विभाग के कुछ लोग भी मिले हुए हैं।
गांव में हैं 200 लाभार्थी
ग्रामीणों ने बताया गांव में करीब 200 लाभार्थी हैं और इनमें से किसी को भी पूरी 15 किलोग्राम दाल नहीं मिली है। इस हिसाब से अकेले मेहरड़ा गांव में करीब 20 क्विंटल दाल का गोलमाल हुआ है। गौरतलब है कि राज्य बीपीएल, केंद्रीय बीपीएल व अंतयोदय योजना के तहत लाभार्थियों को सस्ती दाल मुहैया करवाई जा रही है।
विज्ञापन
जिले को मिली दस हजार क्विंटल दाल
योजना के तहत जिला दस हजार क्विंटल दाल मिली है और विभाग पूरी दाल डिपो पर भेज चुका है, लेकिन सूत्रों के अनुसार दाल का गोलमाल डिपो के बाहर ही हुआ है। सूत्रों के अनुसार जिन गांवों में गड़बड़ी हुई है, वहां डिपो धारकों ने पांच किलोग्राम प्रति राशनकार्ड के हिसाब से दाल डिपो में उतरवाई और शेष दाल को वहीं से वापस कर दिया। ऐसे में अंदेशा है कि इस खेल में काई बड़ा गिरोह काम कर रहा है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामले की जांच सही प्रकार से हुई तो इसमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी सामने आएगी।
इस मामले को प्रशासन गंभीरता से ले रहा है। इसकी जांच एसडीएम जींद को सौंपी गई है। वे गांव में जाकर जांच करेंगे। एसडीएम दो दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे और इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विनय सिंह डीसी, जींद।
विज्ञापन
पांच किलोग्राम दाल ही मिली
डीसी को दी शिकायत में इन लोगों ने कहा कि डिपो धारक ने उन्हें 15 की बजाय पांच किलोग्राम दाल ही दी है। इन लोगों का आरोप है कि प्रति राशनकार्ड 10 किलोग्राम दाल डिपो होल्डर ने हड़प ली है। ग्रामीणों ने कहा कि इस गोरखधंधे में विभाग के कुछ लोग भी मिले हुए हैं।
विज्ञापन
गांव में हैं 200 लाभार्थी
ग्रामीणों ने बताया गांव में करीब 200 लाभार्थी हैं और इनमें से किसी को भी पूरी 15 किलोग्राम दाल नहीं मिली है। इस हिसाब से अकेले मेहरड़ा गांव में करीब 20 क्विंटल दाल का गोलमाल हुआ है। गौरतलब है कि राज्य बीपीएल, केंद्रीय बीपीएल व अंतयोदय योजना के तहत लाभार्थियों को सस्ती दाल मुहैया करवाई जा रही है।
विज्ञापन
जिले को मिली दस हजार क्विंटल दाल
योजना के तहत जिला दस हजार क्विंटल दाल मिली है और विभाग पूरी दाल डिपो पर भेज चुका है, लेकिन सूत्रों के अनुसार दाल का गोलमाल डिपो के बाहर ही हुआ है। सूत्रों के अनुसार जिन गांवों में गड़बड़ी हुई है, वहां डिपो धारकों ने पांच किलोग्राम प्रति राशनकार्ड के हिसाब से दाल डिपो में उतरवाई और शेष दाल को वहीं से वापस कर दिया। ऐसे में अंदेशा है कि इस खेल में काई बड़ा गिरोह काम कर रहा है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि मामले की जांच सही प्रकार से हुई तो इसमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी सामने आएगी।
इस मामले को प्रशासन गंभीरता से ले रहा है। इसकी जांच एसडीएम जींद को सौंपी गई है। वे गांव में जाकर जांच करेंगे। एसडीएम दो दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे और इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विनय सिंह डीसी, जींद।